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Barabanki News: सेना की नौकरी के बाद जरबेरा की खेती, कमा रहे लाखों
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रामनगर (बाराबंकी)। पहले देश सेवा का जज्बा लेकर सोना में नौकरी की। सेवानिवृत्त हुए तो गांव आकर फूलों की खेती शुरू कर दी। अब खुद तो सालाना लाखों रुपये कमा रहे ही है साथ ही कई लोगों को रोजगार भी दे रहे हैं। रामतीर्थ आज अपने दम पर जय जवान जय किसान का नारा चरितार्थ कर रहे हैं।
रामनगर तहसील क्षेत्र के त्रिलोकपुर मजरे बादीपुरवा गांव निवासी रामलखन के पुत्र रामतीर्थ को वर्ष 1996 में सेना में नौकरी मिल गई थी। वर्ष 2022 में वह नायक सूबेदार की पोस्ट से सेवानिवृत्त होकर गांव लौटे। लोगों ने उन्हे कहीं और नौकरी करने की सलाल दी मगर उनका मन गांव में ही रम गया। उन्होंने खेती करने की ठानी और जरबेरा फूल की खेती शुरू की। करीब चार हजार वर्गमीटर में पॉलीहाउस लगाया और जरबेरा की खेती करना शुरू की। खेती बढ़ती चली गई तो वे क्षेत्र के किसानों के लिए मिसाल बन गए। रामतीर्थ बताते है कि जरबेरा की खेती से साल भर में 15 से 20 लाख रुपये की आमदनी हो जाती है। इसके लिए वे थाइलैंड से बीज मंगाते हैं। पुणे में इसकी नर्सरी तैयार की जाती है फिर वहीं से पौधे मंगा कर खेती करते हैं।
जरबेरा का फूल सजावट के काम आता है। रामतीर्थ ने बताया कि उनके पॉलीहाउस का फूल लखनऊ के चौक व आगरा की मंडी जाता है। एक फूल की कीमत आठ से दस रुपये तक होती है। उद्यान विभाग से 50 प्रतिशत का अनुदान भी मिला।
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रामनगर तहसील क्षेत्र के त्रिलोकपुर मजरे बादीपुरवा गांव निवासी रामलखन के पुत्र रामतीर्थ को वर्ष 1996 में सेना में नौकरी मिल गई थी। वर्ष 2022 में वह नायक सूबेदार की पोस्ट से सेवानिवृत्त होकर गांव लौटे। लोगों ने उन्हे कहीं और नौकरी करने की सलाल दी मगर उनका मन गांव में ही रम गया। उन्होंने खेती करने की ठानी और जरबेरा फूल की खेती शुरू की। करीब चार हजार वर्गमीटर में पॉलीहाउस लगाया और जरबेरा की खेती करना शुरू की। खेती बढ़ती चली गई तो वे क्षेत्र के किसानों के लिए मिसाल बन गए। रामतीर्थ बताते है कि जरबेरा की खेती से साल भर में 15 से 20 लाख रुपये की आमदनी हो जाती है। इसके लिए वे थाइलैंड से बीज मंगाते हैं। पुणे में इसकी नर्सरी तैयार की जाती है फिर वहीं से पौधे मंगा कर खेती करते हैं।
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जरबेरा का फूल सजावट के काम आता है। रामतीर्थ ने बताया कि उनके पॉलीहाउस का फूल लखनऊ के चौक व आगरा की मंडी जाता है। एक फूल की कीमत आठ से दस रुपये तक होती है। उद्यान विभाग से 50 प्रतिशत का अनुदान भी मिला।
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