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Barabanki News: शाम होते ही चार सीएचसी में लटक जाता ताला
Thu, 13 Feb 2025 01:00 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Thu, 13 Feb 2025 01:00 AM IST
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बाराबंकी। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा होने के बाद भी चार अस्पतालों में इलाज से जुड़े सुविधाएं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से भी बदतर हैं। इसके चलते शाम ढलते ही इन पर ताला पड़ जाता है। इस दौरान यदि कोई गंभीर मरीज पहुंचता भी है तो उसे इलाज की सुविधा न मिल पाने के कारण जिला अस्पताल अथवा लखनऊ ले कर भागना तीमारदारों के लले मजबूरी बन जाता है।
जिले में स्थित के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जहांगीराबाद, सआदतगंज, परीवां एट शुंभा और सुबेहा पर शाम होते ही ताला लटक जाता है। यहां पर एक या दो डॉक्टरों की तैनाती कर ओपीडी चलाई जा रही है लेकिन इमरजेंसी सेवाओं के संचालन की न तो कोई सुविधा है न ही जरूरी संसाधन। क्षेत्रीय निवासी राहुल, राजेंद्र, गौतम, कौशल ने बताया कि कहने को तो यह सीएचसी है पर यहां पर सुविधाएं पीएचसी जैसी भी नहीं मिलती है। डॉक्टर आते नहीं दवाएं मिलती नहीं है और यदि कोई मरीज आ भी जाता है तो उसे बिना इलाज के ही वापस लौटना पड़ता है। इन चारों अस्पतालों में स्वीकृति के बावजूद तैनाती न होने के कारण चिकित्सकों के पद बीते काफी समय से खाली हैं।
इस कारण इन चारों सीएचसी पर इलाज का जिम्मा एक से लेकर दो डॉक्टरों के भरोसे है। ऐसे में ओपीडी का संचालन तो किसी तरह हो जाता है लेकिन चिकित्सकों की कमी से इमरजेंसी सेवाओं का संचालन नहीं हो पाता है। सीएमओ डॉ. अवधेश कुमार यादव ने बताया कि इन चारों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का संचालन तो किया जा रहा है परंतु एक व दो डॉक्टरों से इमरजेंसी नहीं चलाई जा सकती है। जितने पद स्वीकृत हैं उतने डॉक्टर तैनात होने पर ही इमरजेंसी सेवा शुरू हो सकेगी। इसी लिए दोपहर के बाद यहां पर इलाज की सुविधा मुहैया नहीं हो पाती है।
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जिले में स्थित के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जहांगीराबाद, सआदतगंज, परीवां एट शुंभा और सुबेहा पर शाम होते ही ताला लटक जाता है। यहां पर एक या दो डॉक्टरों की तैनाती कर ओपीडी चलाई जा रही है लेकिन इमरजेंसी सेवाओं के संचालन की न तो कोई सुविधा है न ही जरूरी संसाधन। क्षेत्रीय निवासी राहुल, राजेंद्र, गौतम, कौशल ने बताया कि कहने को तो यह सीएचसी है पर यहां पर सुविधाएं पीएचसी जैसी भी नहीं मिलती है। डॉक्टर आते नहीं दवाएं मिलती नहीं है और यदि कोई मरीज आ भी जाता है तो उसे बिना इलाज के ही वापस लौटना पड़ता है। इन चारों अस्पतालों में स्वीकृति के बावजूद तैनाती न होने के कारण चिकित्सकों के पद बीते काफी समय से खाली हैं।
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इस कारण इन चारों सीएचसी पर इलाज का जिम्मा एक से लेकर दो डॉक्टरों के भरोसे है। ऐसे में ओपीडी का संचालन तो किसी तरह हो जाता है लेकिन चिकित्सकों की कमी से इमरजेंसी सेवाओं का संचालन नहीं हो पाता है। सीएमओ डॉ. अवधेश कुमार यादव ने बताया कि इन चारों सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों का संचालन तो किया जा रहा है परंतु एक व दो डॉक्टरों से इमरजेंसी नहीं चलाई जा सकती है। जितने पद स्वीकृत हैं उतने डॉक्टर तैनात होने पर ही इमरजेंसी सेवा शुरू हो सकेगी। इसी लिए दोपहर के बाद यहां पर इलाज की सुविधा मुहैया नहीं हो पाती है।
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