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तटबंध पर भूखे-प्यासे पड़े बाढ़पीड़ित

Fri, 17 Aug 2018 11:33 PM IST
Amarujala
Amarujala Updated Fri, 17 Aug 2018 11:33 PM IST
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Flood situations bad
लोगों को परेशानी - फोटो : Amarujala

उफनाई घाघरा तराई में कहर बरपा रही है। पानी से भरने वाले गांवों की संख्या दिन पर दिन बढ़ती जा रही है। वहीं नेपाल द्वारा 2 लाख 70 हजार क्यूसेक पानी छोड़ने के बाद नदी का पानी देरशाम फिर से बढ़ने लगा है और यह खतरे के निशान से 72 सेमी से ऊपर पहुंच गया है। वहीं रामनगर तहसील के आधा दर्जन गांव और पानी से भर गए हैं। यहां के लोगों का संपर्क मुख्य मार्गों से टूट जाने से लोग तटबंधे पर शरण लिए हुए हैं।

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तटबंधों पर बसे लोगों को एक बार सिंचाई मंत्री और मुख्यमंत्री के आने पर राहत सामग्री मिली थी। इसके बाद से बाढ़ पीड़ितों को इनके हाल पर छोड़ दिया गया है। बाढ़ पीड़ितों की माने तो इसके बाद से कोई जिम्मेदार अफसर हाल जानने नहीं आया है यदि कोई आता भी है तो महज आश्वासन देकर चला जाता है। जिससे हम लोगों को दो वक्त की रोटी के लाले पड़ गए हैं। जबकि कई परिवारीजन ऐसे हैं जो राहत सामग्री के लिए तरस रहे हैं।  
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घाघरा नदी का पानी खतरे के निशान 106.076 से बढ़कर 106.796 पर पहुंच गया है। सुबह नदी का पानी घट रहा था लेकिन देरशाम से नदी का पानी फिर से बढ़ने लगा था। नेपाल द्वारा 2 लाख 70 हजार क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद नदी का पानी खतरे के निशान से 72 सेमी ऊपर पहुंच गया है। गनेशपुर प्रतिनिधि के अनुसार नदी का पानी बढ़ने की वजह से क्षेत्र के लहड़रा, दुर्गापुर, तपेसिपाह, परसादी पुरवा, नामेपुर सिरौली, सिकौडा समेत आधा दर्जन गांवों में पानी भर गया है। जिससे यहां के लोगों के सामने सुरक्षित स्थानों पर पहुंचे का संकट गहराने लगा है क्योंकि इन गांवों का संपर्क भी मुख्य मार्गों से खत्म हो गया है।
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इसके बाद भी गांव के लोग परिवारीजनों के साथ सुरक्षित स्थानों के लिए निकल रहे हैं। लेकिन प्रशास की ओर से इन्हें कोई मदद नहीं मिल पा रही है। वहीं टिकैतनगर प्रतिनिधि के अनुसार बांध पर डेरा डाले हुए हैं बाढ़ पीड़ितों को खुले आसमान तले गुजर-बसर करना मजबूरी बन गया है। यहां चारों तरफ पानी फैला हुआ है छप्परनुमा मकान और पानी के बीच है गुजारा हो रहा है। रायपुर में पानी भरा होने की वजह से जो कुछ बचा है वह अलमारी व तख्त पर रखा हुआ है। चरसड़ी तटबंध कटने के बाद जिले के मांझा रायपुर परसावल, नैपुरा, कमियार, नवन पुरवा, बेहटा, नैपुरा और कमियार गांव पानी से डूबे हुए हैं। इनके पास अब खाने पीने का सामान भी खत्म हो गया है। बंधे पर परिवार के साथ रह रहे महादेव बताते हैं कि मुख्यमंत्री के आने पर एक बार जितने भी लोग बंधे पर थे सभी को राहत सामग्री दी गई थी वह खत्म हो गई है। यहीं पर रह रहे शिवनाम बतातें कि बाढ़ के दौरान हम लोगों का यहीं हाल रहता है अधिकारी आते हैं और आश्वासन देकर चले जाते हैं इसके बाद फिर पलट कर नहीं आते हैं। बाढ़ तो हर साल आती है और हम लोग भगवान भरोसे रहकर अपनी जिंदगी गुजारते हैं।                    

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