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नदी में समाई बाढ़ राहत चौकी
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
Updated Sat, 13 Aug 2016 11:38 PM IST
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गन्ने की खेतों मेें कटान से पीड़ितों में हड़कंप
- फोटो : अमर उजाला
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घाघरा नदी के पानी की चपेट में आकर नकहरा गांव के निकट बाढ़ खंड द्वारा बनाई गई बाढ़ राहत चौकी नदी की धारा में समा गई है। इसके अलावा नदी का पानी गन्ने के खेतों को तेजी से काट रहा है जिससे किसानों में हड़कंप मचा हुआ है।
तटबंध में भी कटान तेजी से हो रही यह नकहरा गांव के पास तक पहुंच गई है। कटान को रोकने के कोई उपाय नहीं किए जा रहे हैं और न ही राहत सामग्री का वितरण किया जा रहा है। जबकि नदी का पानी अभी भी खतरे के निशान से 38 सेमी ऊपर बह रहा है।
टिकैतनगर प्रतिनिधि के अनुसार बाढ़ खंड द्वारा नकहरा गांव के निकट एल्गिन चरसड़ी तटबंध पर बनाई गई बाढ़ राहत चौकी शनिवार को घाघरा की धारा में समा गई है। वहीं नदी का पानी करौनी गांव के निकट गन्ने के खेतों के तेजी से कटा रहा है किसानों की करीब 10 से 12 बीघे फसल घाघरा में अब तक समा चुकी है। जिससे यहां के बाढ़ पीड़ितों में हड़कंप मचा हुआ है।
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गांव के लोगों का कहना है कि नदी का पानी गन्ने की खड़ी फसल को काट रहा है वहीं तटबंध को काटते हुए नदी नकहरा गांव के निकट तक पहुंच गई है। प्रशासन की ओर से कटान रोकने के कोई उपाय नहीं किए जा रहे हैं। जिससे नदी की कटान और तेज होती जा रही है। वहीं बाढ़ पीड़ितों में एक बार राहत सामग्री का वितरण कर औपचारिकता निभा दी गई है।
नदी का पानी रायपुर मांझा, परसावल, नैपुरा, कमियार आदि में तेजी से बढ़ता जा रहा है। लेकिन अभी भी इन गांवों में कई परिवार फंसे हुए हैं तमाम प्रयासों के बाद भी इन्हें सुरक्षित स्थानों पर अभी तक पहुंचाया नहीं जा सका है। बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि नदी के पानी की पूरी गृहस्थी समा गई है अब बचा क्या है। जान बची है घाघरा मैया चाहें तो वह भी ले ले लेकिन हम लोग गांव छोड़कर जाने वाले नहीं हैं।
तटबंध पर बनी बाढ़ राहत चौकी के नदी में समाने की जानकारी बाढ़ खंड के अधिकारियों ने नहीं दी है। गन्ने की फसल नदी के पानी द्वारा काटे जाने की सूचना मिली है। बाढ़ खंड के अधिकारियों को मौके पर जांच के लिए भेजा जा रहा है। बाढ़ पीड़ितों में राहत वितरण का कार्य बराबर चल रहा है और जो लोग गांवों में फंसे हैं उन्हें सुरक्षित स्थानाें पर पहुंचाने का कार्य जारी है। -हरिकेश चौरसिया, अपर जिलाधिकारी
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तटबंध में भी कटान तेजी से हो रही यह नकहरा गांव के पास तक पहुंच गई है। कटान को रोकने के कोई उपाय नहीं किए जा रहे हैं और न ही राहत सामग्री का वितरण किया जा रहा है। जबकि नदी का पानी अभी भी खतरे के निशान से 38 सेमी ऊपर बह रहा है।
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टिकैतनगर प्रतिनिधि के अनुसार बाढ़ खंड द्वारा नकहरा गांव के निकट एल्गिन चरसड़ी तटबंध पर बनाई गई बाढ़ राहत चौकी शनिवार को घाघरा की धारा में समा गई है। वहीं नदी का पानी करौनी गांव के निकट गन्ने के खेतों के तेजी से कटा रहा है किसानों की करीब 10 से 12 बीघे फसल घाघरा में अब तक समा चुकी है। जिससे यहां के बाढ़ पीड़ितों में हड़कंप मचा हुआ है।
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गांव के लोगों का कहना है कि नदी का पानी गन्ने की खड़ी फसल को काट रहा है वहीं तटबंध को काटते हुए नदी नकहरा गांव के निकट तक पहुंच गई है। प्रशासन की ओर से कटान रोकने के कोई उपाय नहीं किए जा रहे हैं। जिससे नदी की कटान और तेज होती जा रही है। वहीं बाढ़ पीड़ितों में एक बार राहत सामग्री का वितरण कर औपचारिकता निभा दी गई है।
नदी का पानी रायपुर मांझा, परसावल, नैपुरा, कमियार आदि में तेजी से बढ़ता जा रहा है। लेकिन अभी भी इन गांवों में कई परिवार फंसे हुए हैं तमाम प्रयासों के बाद भी इन्हें सुरक्षित स्थानों पर अभी तक पहुंचाया नहीं जा सका है। बाढ़ पीड़ितों का कहना है कि नदी के पानी की पूरी गृहस्थी समा गई है अब बचा क्या है। जान बची है घाघरा मैया चाहें तो वह भी ले ले लेकिन हम लोग गांव छोड़कर जाने वाले नहीं हैं।
तटबंध पर बनी बाढ़ राहत चौकी के नदी में समाने की जानकारी बाढ़ खंड के अधिकारियों ने नहीं दी है। गन्ने की फसल नदी के पानी द्वारा काटे जाने की सूचना मिली है। बाढ़ खंड के अधिकारियों को मौके पर जांच के लिए भेजा जा रहा है। बाढ़ पीड़ितों में राहत वितरण का कार्य बराबर चल रहा है और जो लोग गांवों में फंसे हैं उन्हें सुरक्षित स्थानाें पर पहुंचाने का कार्य जारी है। -हरिकेश चौरसिया, अपर जिलाधिकारी