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Drought: सूखे से परेशान किसान, कैसे करें 15 करोड़ रुपये बिजली के बिल का भुगतान

Sun, 11 Sep 2022 04:08 PM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी Published by: लखनऊ ब्यूरो Updated Sun, 11 Sep 2022 04:08 PM IST
सार

बाराबंकी जिले में इस बार 60 फीसदी कम बारिश होने से किसान परेशान हैं। हालात ऐसे हो गए हैं कि उनके लिए अपनी फसल की लागत निकालना मुश्किल हो गया है। 

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farmers are worried because of low rain in Barabanki.
बाराबंकी के सिरौलीगौसपुर तहसील क्षेत्र में सूखी पड़ी इचौली माइनर। - फोटो : amar ujala

विस्तार

बाराबंकी जिले में इस बार 60 फीसदी से कम बारिश ने किसानों के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। मानसून की बेरुखी से सूखे के हालात पैदा हो गए हैं। किसानों को अपनी लागत निकालना मुश्किल हो गया है। ऊपर से उनके ऊपर पावर कॉर्पोरेशन का निजी नलकूपों से सिंचाई का 15 करोड़ रुपये बकाया का भुगतान और आगे की फसल कैसे बोएंगे, यह चिंता सताए जा रही है। सरकार द्वारा नलकूप के बिजली कनेक्शन न काटने व राजस्व वसूली पर रोक लगाने के आदेश पर किसानों का मत है कि यह माफ होना चाहिए और फसल का मुुआवजा मिले तब किसान इस संकट से उबर पाएगा।

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जिले में इस बार एक लाख 80 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की खेती हुई है। जबकि करीब 90 हजार हेक्टेयर क्षेत्रफल में सब्जी व अन्य फसल उगाई गई है। पूूरे सीजन मेें सामान्य से 60 फीसदी कम बारिश रिकार्ड की गई। इसी के चलते किसानों ने बारिश की आस में फसल को बचाने के लिए निजी नलकूपों जो करीब जिले 6700 हैं, से सिंचाई करते रहे। अधिक बार सिंचाई करने के कारण किसानों का बिजली का बिल भी पिछले सालों की अपेक्षा डेढ़ से दो गुना बढ़ गया है।
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पावर कॉर्पोरेशन के अधीक्षण अभियंता एएच खान ने बताया कि किसानों के निजी नलकूपों का बिल करीब 15 करोड़ 20 लाख रुपया बकाया है। किसानों का कहना है कि सूखे के चलते फसल की लागत निकालना मुश्किल हो गया है। सिरौलीगौसपुर, बनीकोडर व दरियाबाद क्षेत्रों में धान की फसल खराब होते देख किसानों ने जुताई भी कर डाली। बर्बाद हुई फसल का मुआवजा और बकाया बिजली बिल राजस्व वसूली माफ कर दी जाए तो किसान बर्बादी से बच सकता है।
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धान की फसल को बचाना मुश्किल
हैदरगढ़। सामान्य से काफी कम मानसूनी बारिश होने से जिले के किसान बोई गई फसलों को लेकर चिंतित है। कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉ. अश्वनी सिंह, डॉ. रिंकी चौहान, डॉ. एमबी सिंह, डॉ. रूपम रघुवंशी, डॉ. अमन से अमर उजाला ने खरीफ की फसलों को लेकर बात की। इन लोगों ने बताया कि बारिश कम और सिंचाई के संसाधन नहीं होने पर धान की फसल को बचाना मुश्किल है।


ऐसे में किसान तत्काल तोरिया की बोआई कर घाटे की भरपाई कर सकते हैं। अगेती आलू की बोआई के लिए खेत की तैयारी शुरू करने से लाभ होगा। नहर व नलकूप होने पर धान व गन्ना की फसल में सिंचाई करते रहें। बारिश कम होने से धान में झुलसा, झोखा, सीत ब्लाइंट, खैरा, सूखा होने पर झूठा कंडुआ रोग तथा तना छेदक, पत्ती लपेटक कीट लगने की संभावना है। गन्ना में बढ़वार प्रभावित होगी तथा रोग व कीट लगने की संभावना है। शरद कालीन गन्ना बोआई के लिए खेत में नमी होना अच्छा होता है।

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