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Barabanki News: परिषदीय स्कूलों के बच्चों की खेल प्रतिभा निखारने पर जोर
Thu, 16 Jul 2026 01:57 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Thu, 16 Jul 2026 01:57 AM IST
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बाराबंकी। परिषदीय स्कूलों के मैदान अब उपलब्धियों की नई इबारत लिखने के लिए तैयार हैं। विभाग ने खेल नीति में बड़ा बदलाव करते हुए हर छात्र-छात्रा के लिए खेल के मैदान में उतरना और न्यूनतम दो खेलों में अनिवार्य रूप से प्रतिभाग करना तय कर दिया है।
इस नए बदलाव को पूरी तरह प्रभावी बनाने के लिए विभाग ने नियम तय किए हैं, जिसके तहत प्रत्येक छात्र-छात्रा को अपनी रुचि के अनुसार न्यूनतम दो अलग-अलग खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेना अनिवार्य होगा। बच्चों को या तो एक टीम गेम और एक एकल खेल चुनना होगा, अथवा वे दोनों ही टीम गेम्स का चयन कर सकते हैं।
दरअसल, अंक पत्र में खेलकूद और शारीरिक शिक्षा के नंबर दर्ज करने की व्यवस्था कोई नई नहीं है। पहले भी स्काउट गाइड, खेलकूद और शारीरिक शिक्षा के नंबर संयुक्त रूप से एक ही कॉलम में दर्ज होते थे लेकिन इस बार असली बदलाव यह है कि हर छात्र को अनिवार्य रूप से दो खेलों में प्रतिभाग करना ही होगा और उसकी विस्तृत प्रविष्टि रिपोर्ट कार्ड में दर्ज की जाएगी।
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प्रगति रिपोर्ट में दिखेगा प्रदर्शन
विभाग इस अनिवार्य खेल नीति को केवल कागजों या मैदान तक सीमित नहीं रखना चाहता। इसके लिए प्रत्येक छात्र के वार्षिक मूल्यांकन और प्रगति रिपोर्ट (अंक पत्र) में उसके भाग लिए गए दोनों खेलों और उसके प्रदर्शन का संक्षिप्त ब्योरा व अंक दर्ज किए जाएंगे। खेल गतिविधियों के नंबर सीधे रिपोर्ट कार्ड में जुड़ने से अब बच्चों के साथ-साथ शिक्षकों पर भी इस बात का नैतिक दबाव रहेगा कि वे हर बच्चे को खेल गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल करें।
अंक पत्र में खेल के नंबरों की व्यवस्था पहले से थी लेकिन अब हर छात्र के लिए दो खेल अनिवार्य करने और उसका ब्योरा प्रगति रिपोर्ट में शामिल करने से स्कूलों में खेल का माहौल पूरी तरह बदल जाएगा। जिले के सभी 2,618 परिषदीय विद्यालयों में पंजीकृत करीब ढाई लाख बच्चों की प्रतिभा को निखारने का यह बेहतरीन अवसर है।
- नवीन कुमार पाठक, बीएसए
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इस नए बदलाव को पूरी तरह प्रभावी बनाने के लिए विभाग ने नियम तय किए हैं, जिसके तहत प्रत्येक छात्र-छात्रा को अपनी रुचि के अनुसार न्यूनतम दो अलग-अलग खेल प्रतियोगिताओं में भाग लेना अनिवार्य होगा। बच्चों को या तो एक टीम गेम और एक एकल खेल चुनना होगा, अथवा वे दोनों ही टीम गेम्स का चयन कर सकते हैं।
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दरअसल, अंक पत्र में खेलकूद और शारीरिक शिक्षा के नंबर दर्ज करने की व्यवस्था कोई नई नहीं है। पहले भी स्काउट गाइड, खेलकूद और शारीरिक शिक्षा के नंबर संयुक्त रूप से एक ही कॉलम में दर्ज होते थे लेकिन इस बार असली बदलाव यह है कि हर छात्र को अनिवार्य रूप से दो खेलों में प्रतिभाग करना ही होगा और उसकी विस्तृत प्रविष्टि रिपोर्ट कार्ड में दर्ज की जाएगी।
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प्रगति रिपोर्ट में दिखेगा प्रदर्शन
विभाग इस अनिवार्य खेल नीति को केवल कागजों या मैदान तक सीमित नहीं रखना चाहता। इसके लिए प्रत्येक छात्र के वार्षिक मूल्यांकन और प्रगति रिपोर्ट (अंक पत्र) में उसके भाग लिए गए दोनों खेलों और उसके प्रदर्शन का संक्षिप्त ब्योरा व अंक दर्ज किए जाएंगे। खेल गतिविधियों के नंबर सीधे रिपोर्ट कार्ड में जुड़ने से अब बच्चों के साथ-साथ शिक्षकों पर भी इस बात का नैतिक दबाव रहेगा कि वे हर बच्चे को खेल गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल करें।
अंक पत्र में खेल के नंबरों की व्यवस्था पहले से थी लेकिन अब हर छात्र के लिए दो खेल अनिवार्य करने और उसका ब्योरा प्रगति रिपोर्ट में शामिल करने से स्कूलों में खेल का माहौल पूरी तरह बदल जाएगा। जिले के सभी 2,618 परिषदीय विद्यालयों में पंजीकृत करीब ढाई लाख बच्चों की प्रतिभा को निखारने का यह बेहतरीन अवसर है।
- नवीन कुमार पाठक, बीएसए