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ड्रेस के इंतजार में साढ़े तीन लाख बच्चे

Wed, 08 Sep 2021 12:56 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 08 Sep 2021 12:56 AM IST
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education
बाराबंकी। परिषदीय विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों में अभी तक ड्रेस का वितरण नहीं किया जा सका है। जबकि इससे पहले जुलाई माह में ही ड्रेस का वितरण करा दिया जाता था। इसके पीछे तर्क दिया जा रहा है कि एक तो कोरोना काल की वजह से लंबे समय से विद्यालय बंद चल रहे हैं। दूसरे शासन स्तर से अभी तक इस मद में एक धेला नहीं मिला है। जिससे अभी तक बच्चों में ड्रेस का वितरण नहीं कराया जा सका है।
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परिषदीय विद्यालय में पंजीकृत छात्रों की संख्या करीब साढ़े तीन लाख है। लेकिन इन बच्चों में अभी तक ड्रेस, जूता और मोजा का वितरण नहीं किया जा सका है। जबकि इससे पहले जुलाई माह तक हरहाल में ड्रेस आदि का वितरण बच्चों में करा दिया जाता था।
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नई ड्रेस न मिलने के कारण बच्चे पुरानी ड्रेस से ही अपना काम चला रहे हैं और ज्यादातर बच्चे पुरानी ड्रेस ही पहनकर विद्यालय भी आ रहे हैं। लेकिन विभागीय अधिकारी इसको लेकर गंभीर नहीं दिखाई दे रहे हैं। जबकि अभिभावक बराबर इसके लिए विभागीय अधिकारियों से संपर्क कर रहे हैं लेकिन ब्लॉकों में तैनात अधिकारी आज कल की बात कहकर उन्हें टाल रहे हैं।
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वहीं इसके पीछे विभाग द्वारा तर्क दिया जा रहा है कि अभी तक शासन स्तर से ड्रेस, मोजा और जूता के लिए कोई पैसा नहीं मिला है। क्योंकि इस बार ड्रेस, जूता और मोजा का पैसा सीधे बच्चों के खाते में भेजा जाना है, इसी वजह से देरी हो रही है।
डेढ़ लाख बच्चों केे नहीं मिल सकी किताबें
परिषदीय विद्यालय में पढ़ने वाले करीब डेढ़ लाख बच्चे ऐसे हैं जिन्हें अभी तक किताबें नहीं मिल सकी है। जबकि यहां पढ़ने वाले बच्चों की संख्या करीब साढ़े तीन लाख है। विभाग का दावा है कि अब तक दो लाख बच्चों में किताबों का वितरण करा दिया गया है। वहीं बच्चे रह गए हैं जो किन्हीं कारणों से विद्यालय नहीं आ रहे हैं जो बच्चे विद्यालय आ रहे हैं उनमें किताबों का वितरण कराया जा रहा है।

परिषदीय विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों में अभी ड्रेस का वितरण नहीं कराया जा सका है। क्योंकि इसके लिए अभी तक कोई पैसा शासन स्तर नहीं मिला है। इस बार ड्रेस का पैसा सीधे बच्चों के खाते में भेजने की तैयारी है इसी वजह से देरी हो रही है। इस संबंध में शासन स्तर से जो निर्देश प्राप्त होंगे उनका पूरी तरह से अनुपालन किया जाएगा।
-अजय कुमार सिंह, बीएसए
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