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धान खरीद बंद, अब भुगतान को भटक रहा किसान
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बाराबंकी। सरकारी केंद्रों पर धान बेच किसान पछता रहा है धान खरीद बंद हो चुकी है लेकिन किसानों को खरीद में लगी एजेंसियों पर 11 करोड़ रुपया अभी भी बाकी है। इस पैसे को पाने के लिए किसान एजेंसियों से लेकर विभाग के चक्कर काट रहे हैं लेकिन उनकी समस्या का हल नहीं निकल पा रहा है।
जिले में इस वर्ष 15 अक्टूबर से धान की खरीद शुरू हुई। सरकार द्वारा घोषित समर्थन मूल्य का लाभ किसानों को मिले इसके लिए जिले भर में सात एजेंसियों के माध्यम से 56 धान खरीद केंद्र खोले गए थे। इन केंद्रों के जरिए जिले के 34 हजार 349 किसानों से एक लाख 59 हजार एमटी धान की खरीद की गई। इस दौरान करीब 29,639 करोड़ रुपये का धान खरीद गया और इसके सापेक्ष करीब 28,542 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया। लेकिन अभी भी 1096 करोड़ रुपया किसानों का धान खरीद में लगी एजेंसियों पर बकाया है।
जिसका भुगतान नहीं हो पा रहा है जबकि धान की खरीद 28 फरवरी से बंद हो चुकी है और क्रय केंद्र प्रभारी भी किसानों की इस समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। वहीं बकाया पैसे का भुगतान कब तक होगा इस संबंध में अधिकारी भी कोई सही जवाब नहीं दे रहे हैं। जबकि खून पसीने से तैयार की गई फसल की गाढ़ी कमाई पाने के लिए किसान एजेंसियों से लेकर विभाग तक चक्कर काट रहा है लेकिन उसकी समस्या का हल नहीं निकल पा रहा है।
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पहले से पता होता तो न बेचते धान
बजहा निवासी किसान महेश प्रसाद ने बताया कि उसे पता होता तो वह सरकारी क्रय केंद्रों पर धान नहीं बेचता। एक तो धान की तौल नहीं हुई और किसी तरह से तौल हुई तो अब भुगतान नहीं मिल रहा है। किसान प्रमोद ने बताया कि उसने नवीन मंडी के कांटा नंबर दो पर अपना धान एक माह पूर्व बेचा था लेकिन अभी तक भुगतान नहीं आ सका है। इसी प्रकार राममूरति, संग्राम, राजेश आदि किसानों ने बताया कि उन्होंने भी एक माह पहले सरकारी केंद्रों पर धान बेचा था लेकिन आज तक पैसा खाते में नहीं आया है और विभागीय अधिकारी भी सही जानकारी नहीं दे रहे हैं।
राइस मिलों पर बकाया है 21 हजार एमटी सीएमआर
जिले में इस बार धान की कुटाई के लिए 67 राइस मिलों को संबद्ध किया गया। अब तक खरीदे गए धान में से इन मिलों द्वारा एक लाख 57 हजार एमटी धान की उठान कर ली गई है और 85 हजार 129 एमटी चावल एफसीआई को दे दिया गया है। लेकिन 21000 एमटी सीएमआर अभी भी मिलों पर बकाया है।
किस एजेंसी पर कितना है बकाया
एजेंसी का नाम बकाया राशि
विपणन शाखा 538.12
पीसीएफ 192.42
मंडी परिषद 29.07
यूपी एग्रो 5.50
यूपीएसएस 249.53
यूपीसीयू 82.33
एफसीआई 00.00
धान बेचने वाले किसानों का धान खरीद में लगी एजेंसियों पर करीब 11 करोड़ रुपया बकाया है। इसका भुगतान कराने का प्रयास किया जा रहा है। इस संबंध में सभी एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं जिससे जल्द से जल्द किसानों के खाते में पैसा पहुंच जाए।
-संतोष कुमार द्विवेदी, जिला खाद्य विपणन अधिकारी
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जिले में इस वर्ष 15 अक्टूबर से धान की खरीद शुरू हुई। सरकार द्वारा घोषित समर्थन मूल्य का लाभ किसानों को मिले इसके लिए जिले भर में सात एजेंसियों के माध्यम से 56 धान खरीद केंद्र खोले गए थे। इन केंद्रों के जरिए जिले के 34 हजार 349 किसानों से एक लाख 59 हजार एमटी धान की खरीद की गई। इस दौरान करीब 29,639 करोड़ रुपये का धान खरीद गया और इसके सापेक्ष करीब 28,542 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया। लेकिन अभी भी 1096 करोड़ रुपया किसानों का धान खरीद में लगी एजेंसियों पर बकाया है।
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जिसका भुगतान नहीं हो पा रहा है जबकि धान की खरीद 28 फरवरी से बंद हो चुकी है और क्रय केंद्र प्रभारी भी किसानों की इस समस्या को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं। वहीं बकाया पैसे का भुगतान कब तक होगा इस संबंध में अधिकारी भी कोई सही जवाब नहीं दे रहे हैं। जबकि खून पसीने से तैयार की गई फसल की गाढ़ी कमाई पाने के लिए किसान एजेंसियों से लेकर विभाग तक चक्कर काट रहा है लेकिन उसकी समस्या का हल नहीं निकल पा रहा है।
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पहले से पता होता तो न बेचते धान
बजहा निवासी किसान महेश प्रसाद ने बताया कि उसे पता होता तो वह सरकारी क्रय केंद्रों पर धान नहीं बेचता। एक तो धान की तौल नहीं हुई और किसी तरह से तौल हुई तो अब भुगतान नहीं मिल रहा है। किसान प्रमोद ने बताया कि उसने नवीन मंडी के कांटा नंबर दो पर अपना धान एक माह पूर्व बेचा था लेकिन अभी तक भुगतान नहीं आ सका है। इसी प्रकार राममूरति, संग्राम, राजेश आदि किसानों ने बताया कि उन्होंने भी एक माह पहले सरकारी केंद्रों पर धान बेचा था लेकिन आज तक पैसा खाते में नहीं आया है और विभागीय अधिकारी भी सही जानकारी नहीं दे रहे हैं।
राइस मिलों पर बकाया है 21 हजार एमटी सीएमआर
जिले में इस बार धान की कुटाई के लिए 67 राइस मिलों को संबद्ध किया गया। अब तक खरीदे गए धान में से इन मिलों द्वारा एक लाख 57 हजार एमटी धान की उठान कर ली गई है और 85 हजार 129 एमटी चावल एफसीआई को दे दिया गया है। लेकिन 21000 एमटी सीएमआर अभी भी मिलों पर बकाया है।
किस एजेंसी पर कितना है बकाया
एजेंसी का नाम बकाया राशि
विपणन शाखा 538.12
पीसीएफ 192.42
मंडी परिषद 29.07
यूपी एग्रो 5.50
यूपीएसएस 249.53
यूपीसीयू 82.33
एफसीआई 00.00
धान बेचने वाले किसानों का धान खरीद में लगी एजेंसियों पर करीब 11 करोड़ रुपया बकाया है। इसका भुगतान कराने का प्रयास किया जा रहा है। इस संबंध में सभी एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं जिससे जल्द से जल्द किसानों के खाते में पैसा पहुंच जाए।
-संतोष कुमार द्विवेदी, जिला खाद्य विपणन अधिकारी