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Barabanki News: दुनिया में फैल रही हिंदी, बना लो इसे माथे की बिंदी
Sun, 15 Sep 2024 03:00 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sun, 15 Sep 2024 03:00 AM IST
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बाराबंकी। जिले के शिक्षण संस्थानों में शनिवार को हिंदी दिवस पर गोष्ठी, भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन हुआ। इसमें विद्यार्थियों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन कर पुरस्कार भी जीते। वक्ताओं ने कहा कि हिंदी पूरी दुनिया में तेजी के साथ बढ़ रही है। आवश्यकता है कि हर भारतीय हिन्दी को अपना कर इसे माथे की बिंदी की तरह सजाएं।
जवाहरलाल नेहरू स्नातकोत्तर महाविद्यालय हिंदी दिवस पर प्राचार्य प्रो. सीताराम सिंह ने हिंदी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भाषा विकास की वाहन होती है। प्राचार्य ने बीए प्रथम सेमेस्टर की छात्रा ममता कुमारी तथा बीएससी की छात्रा शीबा को बेहतरीन वक्तव्य के लिए पुरस्कृत भी किया। प्रो. अनिता सिंह ने हिंदी की वैश्विक स्थिति पर प्रकाश डाला। प्रो. विजय कुमार वर्मा ने हिंदी साहित्य के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए वर्तमान समय में हिन्दी की दशा और दिशा पर गंभीर पर चर्चा की।
प्रो. रीना सिंह ने सोशल मीडिया पर हिंदी लेखन को लेकर चिंता व्यक्ति की और सुधार की संभावनाओं पर बल दिया। प्रो. शार्दूल विक्रम सिंह ने भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के हिंदी प्रेम की चर्चा की। प्रो. कृष्णकांत चंद्रा व प्रो. अमित कुमार ने हिंदी के वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त की। डॉ.मानव कुमार सिंह ने ग्लोबल स्तर पर किसी एक भाषा के होने की बात की। प्रो. अनिल कुमार विश्वकर्मा, डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. अनुराग यादव आदि ने अपने विचार व्यक्त किए। चंदौली स्थित राम सेवक यादव परास्नातक महाविद्यालय गोष्ठी का आयोजन हुआ। सतरखि स्थित टीआरसी लॉ कॉलेज में भारतीय न्यायिक व्यवस्था में हिन्दी भाषा का प्रयोग विषय पर निबंध प्रतियोगिता हुई।
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जवाहरलाल नेहरू स्नातकोत्तर महाविद्यालय हिंदी दिवस पर प्राचार्य प्रो. सीताराम सिंह ने हिंदी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भाषा विकास की वाहन होती है। प्राचार्य ने बीए प्रथम सेमेस्टर की छात्रा ममता कुमारी तथा बीएससी की छात्रा शीबा को बेहतरीन वक्तव्य के लिए पुरस्कृत भी किया। प्रो. अनिता सिंह ने हिंदी की वैश्विक स्थिति पर प्रकाश डाला। प्रो. विजय कुमार वर्मा ने हिंदी साहित्य के इतिहास पर प्रकाश डालते हुए वर्तमान समय में हिन्दी की दशा और दिशा पर गंभीर पर चर्चा की।
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प्रो. रीना सिंह ने सोशल मीडिया पर हिंदी लेखन को लेकर चिंता व्यक्ति की और सुधार की संभावनाओं पर बल दिया। प्रो. शार्दूल विक्रम सिंह ने भारतेन्दु हरिश्चन्द्र के हिंदी प्रेम की चर्चा की। प्रो. कृष्णकांत चंद्रा व प्रो. अमित कुमार ने हिंदी के वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त की। डॉ.मानव कुमार सिंह ने ग्लोबल स्तर पर किसी एक भाषा के होने की बात की। प्रो. अनिल कुमार विश्वकर्मा, डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. अनुराग यादव आदि ने अपने विचार व्यक्त किए। चंदौली स्थित राम सेवक यादव परास्नातक महाविद्यालय गोष्ठी का आयोजन हुआ। सतरखि स्थित टीआरसी लॉ कॉलेज में भारतीय न्यायिक व्यवस्था में हिन्दी भाषा का प्रयोग विषय पर निबंध प्रतियोगिता हुई।
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