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राज्य वित व मनरेगा के विकास कार्यो में लाखों का घोटाला
Updated Thu, 09 Nov 2017 01:03 AM IST
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राज्य वित्त व मनरेगा के विकास कार्यों में लाखों का घोटाला
दरियाबाद (बाराबंकी)। राज्य वित्त निधि व मनरेगा से कराए गए विकास कार्यों में लाखों के घोटालों की पोल बुधवार को एडीपीआरओ की जांच में सामने आई। स्थलीय निरीक्षण करने पहुंचे एडीपीआरओ को कई अनियमितताएं मिलीं। इस बारे में ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव से पूछताछ भी की है।
दरियाबाद ब्लॉक के सरायरज्जन गांव निवासी मनीष कुमार ने वर्ष 2010 से 15 के बीच में खुली बैठकों का विवरण तथा राज्य वित्त निधि व मनरेगा से कराए गए विकास कार्यों का लेखा-जोखा जन सूचना के जरिये मांगा था।
सूचना मिलने के बाद नाली निर्माण, खड़ंजा निर्माण, कच्ची पटाई व तालाब खोदाई आदि विकास कार्यों में अनियमितता मिलने पर इसकी जांच कराने की मांगी डीएम से की थी। जिसके बाद बुधवार को मामले की जांच करने एडीपीआरओ जेके गौड़ गांव पहुंचे। उन्होंने कराए गए कार्यों को देखा।
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गांव में बनी एक नाली के बारे में पूछा तो पता चला कि उस नाली का निर्माण वर्ष 2008 में हुआ था जबकि इस नाली का निर्माण 2010 के बाद दिखाकर धनराशि हजम कर ली गई। मौके पर मात्र 52 मीटर ही खड़ंजा लगा है जबकि इस खड़ंजा के नाम पर तीन लाख 98 हजार रुपये की रकम निकाल ली गई।
विवियापुर गांव में जिस तालाब का सुंदरीकरण वर्ष 2012-13 में दिखाया गया, उस तालाब की खोदाई वर्ष 2013-14 में कराई गई। इस प्रकार ड्रेन की खोदाई किये बिना ही पैसा निकालने की बात सामने आई है।
एडीपीआरओ ने बताया कि स्थलीय जांच में अनियमितता मिली है रिकार्ड को तलब किया गया है, तीन दिन में जांच पूरी हो जाने पर रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी जाएगी।
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दरियाबाद (बाराबंकी)। राज्य वित्त निधि व मनरेगा से कराए गए विकास कार्यों में लाखों के घोटालों की पोल बुधवार को एडीपीआरओ की जांच में सामने आई। स्थलीय निरीक्षण करने पहुंचे एडीपीआरओ को कई अनियमितताएं मिलीं। इस बारे में ग्राम प्रधान व पंचायत सचिव से पूछताछ भी की है।
दरियाबाद ब्लॉक के सरायरज्जन गांव निवासी मनीष कुमार ने वर्ष 2010 से 15 के बीच में खुली बैठकों का विवरण तथा राज्य वित्त निधि व मनरेगा से कराए गए विकास कार्यों का लेखा-जोखा जन सूचना के जरिये मांगा था।
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सूचना मिलने के बाद नाली निर्माण, खड़ंजा निर्माण, कच्ची पटाई व तालाब खोदाई आदि विकास कार्यों में अनियमितता मिलने पर इसकी जांच कराने की मांगी डीएम से की थी। जिसके बाद बुधवार को मामले की जांच करने एडीपीआरओ जेके गौड़ गांव पहुंचे। उन्होंने कराए गए कार्यों को देखा।
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गांव में बनी एक नाली के बारे में पूछा तो पता चला कि उस नाली का निर्माण वर्ष 2008 में हुआ था जबकि इस नाली का निर्माण 2010 के बाद दिखाकर धनराशि हजम कर ली गई। मौके पर मात्र 52 मीटर ही खड़ंजा लगा है जबकि इस खड़ंजा के नाम पर तीन लाख 98 हजार रुपये की रकम निकाल ली गई।
विवियापुर गांव में जिस तालाब का सुंदरीकरण वर्ष 2012-13 में दिखाया गया, उस तालाब की खोदाई वर्ष 2013-14 में कराई गई। इस प्रकार ड्रेन की खोदाई किये बिना ही पैसा निकालने की बात सामने आई है।
एडीपीआरओ ने बताया कि स्थलीय जांच में अनियमितता मिली है रिकार्ड को तलब किया गया है, तीन दिन में जांच पूरी हो जाने पर रिपोर्ट जिलाधिकारी को सौंप दी जाएगी।