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बदमाशों की गोली से घायल शिक्षामित्र की मौत

Wed, 12 Jun 2019 11:50 PM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Wed, 12 Jun 2019 11:50 PM IST
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बदमाशों की गोली से घायल शिक्षामित्र की मौत
सुढ़ियामऊ(बाराबंकी)। बीती दस जून की रात बदमाशों की फायरिंग से घायल शिक्षामित्र की इलाज के दौरान केजीएमयू में बुधवार सुबह मौत हो गई। इसके बाद लखनऊ में हुए पोस्टमार्टम के बाद देर शाम शव घर पहुंचा तो कोहराम मच गया। गमगीन माहौल में अंतिम संस्कार किया गया है। इस दौरान यहां पर एएसपी समेत भारी पुलिस बल मुस्तैद रहा। वहीं पुलिस अभी तक वारदात के मुख्य आरोपियों की तलाश में है।
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बीते रविवार की देर रात मोहम्मदपुर खाला थाना क्षेत्र के गगौरा गांव में बदमाशों ने मोतीलाल के घर दो लाख का सामान समेट ले गए थे। इसके बाद बदमाश बिबियापुर गांव के शिक्षामित्र राकेश यादव (38) के घर पहुंचे थे।
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यहां पर बदमाशों व राकेश के बीच हुई भिड़ंत के बाद बदमाशों ने उनके गोली मार दी थी। लखनऊ के ट्रॉमा सेंटर में पुलिस ने भर्ती कराया था जहां पर बुधवार की भोर राकेश ने दम तोड़ दिया है। शव घर पहुंचने पर पत्नी फूममती समेत अन्य परिवारीजनों का रो -रो कर बुरा हाल था।
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कड़ी सुरक्षा में हुआ अंतिम संस्कार
शिक्षा मित्र राकेश यादव का शव जब बुधवार की शाम उनके गांव बिबियापुर पहुंचा तो हर कोई गम के माहौल में डूब गया। यहां ग्रामीणों में यही सवाल था कि आखिरकार आरोपी कब पकड़े जाएंगे। इस दौरान एएसपी उत्तरी आरएस गौतम, सीओ अरविंद वर्मा, एसओ मनोज शर्मा समेत आस पास थानों की पुलिस मौजूद रही।

सीओ फतेहपुर अरविंद वर्मा ने बताया पुलिस ने अज्ञात बदमाशों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर उनकी तलाश कर रही है। कुछ संदिग्ध पुलिस पकड़ में है जिनसे पूछताछ भी हो रही है। सीओ ने कहा जल्द ही घटना का खुलासा कर दिया जाएगा।

पहले शराफत और अब हो रहे राकेश की बहादुरी के चर्चे

सुढ़ियामऊ(बाराबंकी)। शिक्षामित्र की नौकरी करने वाले राकेश यादव काफी सरल स्वभाव के थे। इनकी गांव में हर किसी से मधुर संबंध थे। बारह साल पहले विवाह होने के बाद भी राकेश के एक भी संतान नहीं है। हालांकि अब इनकी हत्या के बाद गांव व आस पास इलाके में बहादुरी के भी चर्चे हो रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि वह बदमाशों से न भिड़ते तो शायद आज जिंदा होते। इस घटना को सोचकर हर कोई गमगीन है।

बदमाशों की गोली का शिकार हुए शिक्षामित्र राकेश यादव सरल होने के साथ निडर भी थे। इसी का नतीजा रहा कि जब बदमाश उनके घर पर पहुंचे तो उन्होंने उन्हें पकड़ने का प्रयास किया। एक बदमाश को पकड़ा भी तभी उन्हें गोली मार दी गई। गोली लगने के बाद भी वह हर किसी से बात करते रहे और पुलिस को बयान भी दिया। पहले तो लोगों को लगा था कि राकेश की हालत खतरे में नहीं है लेकिन बाद में अचानक तबियत बिगड़ी और फिर उनकी मौत हो गई है। पति की मौत के बाद से पत्नी फूलमती का रो-रो कर काफी खराब हाल है। मृतक राजेश अपने चार भाइयों विनोद, ओमप्रकाश, हंसराज में सबसे छोटे थे। वहीं ग्रामीण से लेकर परिवार के लोग भी राकेश की निडरता के कायल हो गए है। लोग यही कह रहे है कि राकेश किसी से डरते नहीं थे शायद आज यही निडरता उनकी जान की दुश्मन बन गई है।
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