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कोटेदारों के खाते में खपा दिया 15 करोड़ का कालाधन

Sun, 18 Dec 2016 11:30 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी
अमर उजाला ब्यूरो/बाराबंकी Updated Sun, 18 Dec 2016 11:30 PM IST
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15 crore black money in the account was expending Kotedar
काला
एक हजार व पांच सौ रुपये की नोटबंदी का सबसे करारा प्रहार नौकरशाहों व नेताओं पर हुआ है। नोटबंदी के बाद कालाधन को सफेद बनाने के लिए हर प्रकार के हथकंडे अपनाए गए। किसी ने कमीशन पर नोट बदलवाए तो किसी ने रिश्तेदारों और जानने वालों के खाते में बंद नोट जमा कराए। लेकिन बाराबंकी में नोटबंदी के बाद कोटेदारों के खातों के जरिए नवंबर और दिसंबर में करीब 15 करोड़ रुपये का कालाधन खपा दिया गया।
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यहां तक कि इसकी भनक अधिकतर कोटेदारों को खाते में पैसा जमा होने के बाद लगी। जिले में करीब 1251 कोटेदार हैं। जो महीने में कम से कम 50 से 60 हजार रुपये का राशन उठाते हैं। यह पैसा किसका है इस पर कोटा गंवाने के डर से कोई भी कोटेदार मुंह खोलने को तैयार नहीं है।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एक हजार व पांच सौ रुपये की नोट बंदी के 40 दिन बीत गए हैं। कालेधन के खिलाफ इस मुहिम को राजनेता गलत बता रहे न ही नौकरशाह। लेकिन नोटबंदी का सबसे अधिक असर इन्हीं लोगों पर हुआ है। लेकिन इन मार से बचने के लिए कुछ राजनेताओं या नौकरशाहों ने कोटेदारों का अपना निशाना बनाया है। विभागीय सूत्रों के अनुसार नोटबंदी के बाद से किसी ने जनपद के 1251 कोटेदारों के खातों में मासिक राशन उठान के लिए दो बार में औसतन 50-60 हजार रुपये एडवांस में जमा करा दिए।
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दो महीने में औसतन 15 करोड़ रुपये इन खातों में जमा हुए हैं। जब कोटेदार राशन उठान के लिए पैसा जमा करने बैंक पहुंचे तो पहले से ही धन जमा देख उनके होश उड़ गए। कोटेदारों के अनुसार लगभग सभी खातों में यही खेल हुआ है। यह पैसा किसका है कोई बताने को तैयार नहीं है। कुछ कोटेदारों ने बताया कि यदि किसी कोटेदार का नाम सामने आया तो दो मिनट में उसका कोटा निरस्त होना तय है। 

किसी विभागीय अधिकारी की मिलीभत
कोटेदारों के खातों दो महीने में 15 करोड़ रुपये एडवांस में जमा कराना किसी कम पहुंच वाले के बस का नहीं है। ये काम बिना किसी विभागीय अधिकारी की मिलीभगत से करना असंभव है। क्योंकि 1251 कोटेदारों के खातों की जानकारी सिर्फ विभागीय लोगों के पास होती है। शायद जिले के किसी बड़े नेता या फिर बड़े अधिकारी ने अपनी ताकत का इस्तेमाल कर कालाधन को सफेद किया है। पैसा किसका है यह तो कोई नहीं बता रहा क्योंकि इतने बड़े पैमाने पर खेल करना सबके बस की बात नहीं है।

ऐसे कि या कालेधन को सफेद
जिले के सभी कोटेदार हर महीने 1 से 20 तारीख के बीच राशन उठान का पैसा जमा करते हैं। उसके बाद 30 तारीख राशन उठान होती है। 8 नवंबर को प्रधानमंत्री ने 500 और हजार के नोट बंद करने का ऐलान किया। उसके पहले सिर्फ गिने चुने कोटेदारों ने पैसा जमा किया था। लेकिन आठ नवंबर के बाद सारे कोटेदारों के खातों में पैसा जमा हो गया। नवंबर में करीब साढ़े सात करोड़ के बंद नोट जमा हुए और इस तरह दिसंबर में भी इतनी ही रकम खातों में जमा हो गई।  इसके बाद कोटेदारों को विभागीय कर्मचारियों के जरिए संदेश दिया कि जमा रकम के बराबर नये या फिर छोटे नोट वापस किए जाएं।

कालाधन वाली खबर में वर्जन

कोटेदार आरटीजीएस से ट्रांसफर करते धन
जिले के किसी कोटेदार ने इस तरह की कोई शिकायत नहीं की है कि बिना उनकी जानकारी के उनके खाते में पैसा जमा हुआ है। कोटेदाराें को हर महीने आरटीजीएस के माध्यम से पैसा ट्रांसफर करना होता है। अब उनके खाते में कौन पैसा जमा कर रहा है, उनको नहीं पता।

-एसएन यादव, जिला आपूर्ति अधिकार।

नहीं मिली ऐसी कोई शिकायत
अगर बहुत बड़ी रकम है तभी ध्यान जाता है। कोटेदार हर महीने रकम ट्रांसफर करते हैं। रुपया किसी दूसरे ने जमा किया है तो उसकी जानकारी नहीं है और न ही किसी कोटेदार ने इस तरह की कोई शिकायत की है। मामला संज्ञान में आएगा तो देखा जाएगा। -अशोक मिश्रा, लीड बैंक मैनेजर।
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