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कोरोना टीकाकरण के रिकार्ड में भी फर्जीवाड़ा
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बाराबंकी। कोरोना वैक्सीन लगाने के लिए निर्धारित केंद्रों के बजाए गांव में टीकाकरण कराए जाने की जल्दबाजी में दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा किए जाने के मामले प्रकाश में आ रहे हैं। 17 मार्च को टीकाकरण कराने वालों के नाम के आगे दर्ज मोबाइल नंबरों पर बात की गई तो न नाम सही मिला और न ही ये लोग जिले के रहने वाले ही पाए गए।
मामला कितना सच है ये तो पूरी पड़ताल के बाद ही पता चलेगा लेकिन ये साफ हो गया कि जिस तरह कोरोना का टीका लगाने में लापरवाही बरती गई उसमें अभी भी बहुत रहस्य छिपे हैं। रामनगर की जांच तो पूरी हो गई, किंतु जिले के अन्य स्थानों पर जांच कब होगी अभी इसका इंतजार है।
जिले में 17 मार्च को हुए टीकाकरण में लक्ष्य को हासिल करने के लिए अधिकारियों ने नियमों को दरकिनार कर दिया। गांव-गांव में जाकर टीके ही नहीं लगाये गए बल्कि ऐसे लोगों के दस्तावेज में नाम और मोबाइल नंबर दर्ज कर दिए गए जो डायल करने पर या तो बंद मिल रहे हैं या फिर खुद को दूसरे जिले का रहने वाला बता रहे हैं। यहीं नहीं कई ऐसे लोगों हैं जिनसे बात ही नहीं हो पा रही है।
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वहीं कई केंद्रों पर 20 लोगों को टीके लगाए गए जबकि लक्ष्य को पूरा करने के लिए सूची में तमाम लोगों के नाम चढ़ा दिए गए। इससे कोरोना टीकाकरण को लेकर जो दस्तावेज बनाए गए हैं उनमें भी बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किए जाने की आशंका जताई जा रही है। टीकाकरण में हुए फर्जीवाड़े को लेेकर दिन ब दिन किए जा रहे खुलासों के बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
जो गांव में हैं नहीं उनको भी लग गया टीका
17 मार्च को कोरोना का टीका गांवों में जाकर लगाए जाने की शांति देवी, श्यामलाल, मुन्ना साहू आदि ने पुष्टि करते हुए बताया कि हम लोगों को प्राथमिक विद्यालय में बुलाकर कोरोना का टीका लगाया गया था। वहीं कई ऐसे लोगों के टीके लगाए गए हैं जो हमारे गांव के रहने वाले तक नहीं हैं।
रामनगर प्रकरण के बाद सभी सीएचसी अधीक्षकों को साफ निर्देश दे दिए गए हैं कि यदि कहीं पर भी नियम विपरीत टीकाकरण हुआ तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अन्य स्थानों पर कराए गए टीकाकरण की भी जांच कराई जाएगी।
-डॉ. बीकेएस चौहान, सीएमओ
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मामला कितना सच है ये तो पूरी पड़ताल के बाद ही पता चलेगा लेकिन ये साफ हो गया कि जिस तरह कोरोना का टीका लगाने में लापरवाही बरती गई उसमें अभी भी बहुत रहस्य छिपे हैं। रामनगर की जांच तो पूरी हो गई, किंतु जिले के अन्य स्थानों पर जांच कब होगी अभी इसका इंतजार है।
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जिले में 17 मार्च को हुए टीकाकरण में लक्ष्य को हासिल करने के लिए अधिकारियों ने नियमों को दरकिनार कर दिया। गांव-गांव में जाकर टीके ही नहीं लगाये गए बल्कि ऐसे लोगों के दस्तावेज में नाम और मोबाइल नंबर दर्ज कर दिए गए जो डायल करने पर या तो बंद मिल रहे हैं या फिर खुद को दूसरे जिले का रहने वाला बता रहे हैं। यहीं नहीं कई ऐसे लोगों हैं जिनसे बात ही नहीं हो पा रही है।
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वहीं कई केंद्रों पर 20 लोगों को टीके लगाए गए जबकि लक्ष्य को पूरा करने के लिए सूची में तमाम लोगों के नाम चढ़ा दिए गए। इससे कोरोना टीकाकरण को लेकर जो दस्तावेज बनाए गए हैं उनमें भी बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा किए जाने की आशंका जताई जा रही है। टीकाकरण में हुए फर्जीवाड़े को लेेकर दिन ब दिन किए जा रहे खुलासों के बाद विभाग में हड़कंप मचा हुआ है।
जो गांव में हैं नहीं उनको भी लग गया टीका
17 मार्च को कोरोना का टीका गांवों में जाकर लगाए जाने की शांति देवी, श्यामलाल, मुन्ना साहू आदि ने पुष्टि करते हुए बताया कि हम लोगों को प्राथमिक विद्यालय में बुलाकर कोरोना का टीका लगाया गया था। वहीं कई ऐसे लोगों के टीके लगाए गए हैं जो हमारे गांव के रहने वाले तक नहीं हैं।
रामनगर प्रकरण के बाद सभी सीएचसी अधीक्षकों को साफ निर्देश दे दिए गए हैं कि यदि कहीं पर भी नियम विपरीत टीकाकरण हुआ तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। अन्य स्थानों पर कराए गए टीकाकरण की भी जांच कराई जाएगी।
-डॉ. बीकेएस चौहान, सीएमओ