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घर में नही मिली जगह तो खेत में मचान पर ली शरण
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बाराबंकी। रामसनेहीघाट क्षेत्र में गुजरात से लौटने के बाद घर में जगह नहीं मिलने पर दो भाइयों ने खेत में बने मचान पर शरण ली। युवकों का कहना है कि लोगों को संक्रमण से बचाने के लिए उनके पिता ने दोनों को खेत में मचान पर रहने की सलाह दी। एहतियात के तौर पर दोनों भाई होम क्वारंटीन का समय पूरा होने तक मचान पर रह रहे हैं। उन्हें घर से समय-समय पर नाश्ता व खाना पहुंचाया जा रहा है।
रामसनेहीघाट इलाके के ग्राम मालिनपुर निवासी रामलाल यादव के बेटे विश्राम व लवकुश गुजरात में काम करते थे। लॉकडाउन के चलते फैक्टरी बंद हो गई। उसमें काम करने लोग बेरोजगार हो गए। कई अन्य लोगों के साथ विश्राम व लवकुश एक ट्रक के सहारे 18 मई को गांव लौटे। बेटे के गुजरात के लौटने की सूचना मिलते ही रामलाल ने खेत में ट्यूवेल की रखवाली के लिए बनाए मचान के अलावा एक और मचान बनाया। उसके बाद दोनों बेटों को भाई खेत में मचान पर ही होम क्वांरटीन रहने की सलाह दी। रामलाल यादव ने बताया कि बेटे के घर लौटने की खुशी पर कोरोना का खौफ भारी पड़ रहा है। बेटों को खेत में मचान पर रोकने का फैसला उन्हें मजबूरन लेना पड़ा। विश्राम घर लौटने के बाद पत्नी व दो बेटों व बेटी से भी नहीं मिल सका है। दोनों भाईयों को खेत में बने मचान पर ही घर से समय-समय पर खाना व नाश्ता भेज दिया जाता है।
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रामसनेहीघाट इलाके के ग्राम मालिनपुर निवासी रामलाल यादव के बेटे विश्राम व लवकुश गुजरात में काम करते थे। लॉकडाउन के चलते फैक्टरी बंद हो गई। उसमें काम करने लोग बेरोजगार हो गए। कई अन्य लोगों के साथ विश्राम व लवकुश एक ट्रक के सहारे 18 मई को गांव लौटे। बेटे के गुजरात के लौटने की सूचना मिलते ही रामलाल ने खेत में ट्यूवेल की रखवाली के लिए बनाए मचान के अलावा एक और मचान बनाया। उसके बाद दोनों बेटों को भाई खेत में मचान पर ही होम क्वांरटीन रहने की सलाह दी। रामलाल यादव ने बताया कि बेटे के घर लौटने की खुशी पर कोरोना का खौफ भारी पड़ रहा है। बेटों को खेत में मचान पर रोकने का फैसला उन्हें मजबूरन लेना पड़ा। विश्राम घर लौटने के बाद पत्नी व दो बेटों व बेटी से भी नहीं मिल सका है। दोनों भाईयों को खेत में बने मचान पर ही घर से समय-समय पर खाना व नाश्ता भेज दिया जाता है।
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