{"_id":"69d6bbe010b39924350ccde9","slug":"congress-leader-mohsina-kidwai-close-to-the-gandhi-family-passes-away-barabanki-news-c-315-1-slko1012-163688-2026-04-09","type":"story","status":"publish","title_hn":"Barabanki News: गांधी परिवार की करीबी कांग्रेसी नेता मोहसिना किदवई का निधन","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Barabanki News: गांधी परिवार की करीबी कांग्रेसी नेता मोहसिना किदवई का निधन
Thu, 09 Apr 2026 02:04 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Thu, 09 Apr 2026 02:04 AM IST
विज्ञापन
बाराबंकी। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मोहसिना किदवई (94) का बुधवार सुबह नोएडा में बीमारी के चलते निधन हो गया। बाराबंकी के बनीकोडर ब्लॉक के अहमदपुर गांव में उनका मायका और मसौली के बड़गांव में ससुराल है। उनकी मृत्यु से राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर है। वह पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के बेहद करीब मानी जाती थीं और लंबे समय तक राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय रहीं।
एक जनवरी 1932 को बाराबंकी में जन्मीं मोहसिना किदवई की शादी वर्ष 1953 में मसौली के बड़ागांव निवासी पूर्व विधायक जमील उर रहमान के बेटे खलील उर रहमान किदवई से हुई थी। जमील उर रहमान के पंडित जवाहर लाल नेहरू से अच्छे ताल्लुकात थे। वर्ष 1970 में मोहसिना को पहली बार उत्तर प्रदेश विधान परिषद का सदस्य बनाया गया। इससे पहले वह सोशल वर्कर थी।
वर्ष 1974 में बाराबंकी की दरियाबाद विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और पहली बार विधानसभा की सदस्य निर्वाचित हुई। वर्ष 1977 के विधानसभा चुनाव में जब पूरे देश में कांग्रेस के विरुद्ध आपातकाल के विरोध में माहौल चल रहा था। उसमें मोहसिना किदवई भी चुनाव हार गईं। इसके बावजूद पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने मोहसिना को उत्तर प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया था।
विज्ञापन
वर्ष 1978 में आजमगढ़ लोकसभा का उपचुनाव हुआ, जिसमें मोहसिना की विजय हुई। वर्ष 1980 में इंदिरा गांधी और वर्ष 1984 में राजीव गांधी की सरकार में उन्हें शहरी विकास मंत्री बनाया गया। वर्ष 2002 व 2008 में उन्हें राज्यसभा भेजा गया। मोहसिना ने अपनी आत्मकथा माई लाइफ इन इंडियन पॉलिटिक्स भी लिखी है। वह विरली महिला थी, जो चारों सदनों में सदस्य बनीं।
मोहसिना की कोठी में है कांग्रेस का कार्यालय
पूर्व मंत्री मोहसिना की सिविल लाइन में कोठी है, जिसमें मौजूदा समय में कांग्रेस का कैंप कार्यालय संचालित हो रहा है। उनका अपने मायके और ससुराल अक्सर आना-जाना लगा रहता था। वह लंबे समय से परिवार के साथ नोएडा में रह रही थीं।
विज्ञापन
एक जनवरी 1932 को बाराबंकी में जन्मीं मोहसिना किदवई की शादी वर्ष 1953 में मसौली के बड़ागांव निवासी पूर्व विधायक जमील उर रहमान के बेटे खलील उर रहमान किदवई से हुई थी। जमील उर रहमान के पंडित जवाहर लाल नेहरू से अच्छे ताल्लुकात थे। वर्ष 1970 में मोहसिना को पहली बार उत्तर प्रदेश विधान परिषद का सदस्य बनाया गया। इससे पहले वह सोशल वर्कर थी।
विज्ञापन
वर्ष 1974 में बाराबंकी की दरियाबाद विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और पहली बार विधानसभा की सदस्य निर्वाचित हुई। वर्ष 1977 के विधानसभा चुनाव में जब पूरे देश में कांग्रेस के विरुद्ध आपातकाल के विरोध में माहौल चल रहा था। उसमें मोहसिना किदवई भी चुनाव हार गईं। इसके बावजूद पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने मोहसिना को उत्तर प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया था।
विज्ञापन
वर्ष 1978 में आजमगढ़ लोकसभा का उपचुनाव हुआ, जिसमें मोहसिना की विजय हुई। वर्ष 1980 में इंदिरा गांधी और वर्ष 1984 में राजीव गांधी की सरकार में उन्हें शहरी विकास मंत्री बनाया गया। वर्ष 2002 व 2008 में उन्हें राज्यसभा भेजा गया। मोहसिना ने अपनी आत्मकथा माई लाइफ इन इंडियन पॉलिटिक्स भी लिखी है। वह विरली महिला थी, जो चारों सदनों में सदस्य बनीं।
मोहसिना की कोठी में है कांग्रेस का कार्यालय
पूर्व मंत्री मोहसिना की सिविल लाइन में कोठी है, जिसमें मौजूदा समय में कांग्रेस का कैंप कार्यालय संचालित हो रहा है। उनका अपने मायके और ससुराल अक्सर आना-जाना लगा रहता था। वह लंबे समय से परिवार के साथ नोएडा में रह रही थीं।