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Barabanki News: जांबाज देश के प्रेमी अमर रहेंगे इस जग में...

Mon, 14 Aug 2023 01:36 AM IST
लखनऊ ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी Updated Mon, 14 Aug 2023 01:36 AM IST
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Brave country lovers will remain immortal in this world...
बाराबंकी। इंकलाब का नारा जिनके दौड़ रहा था रग रग में, वो जाबांज देश के प्रेमी अमर रहेंगे इस जग में....। कविता की यह लाइनें बाराबंकी के राजा बलभद्र सिंह चहलारी व उसके करीब 1000 साथियों पर बिल्कुल सटीक बैठती है। शायद यह जानकर आप चौंक जाए कि देश के पहले स्वतंत्रता संग्राम की सबसे बड़ी और आखिरी लड़ाई बाराबंकी में ही लड़ी गई। जी हां, जिले की नई पीढ़ी इस पर फर्ख कर सकती है।
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स्वतंत्रता पाने के लिए 1857 में पहला संग्राम शुरु हुआ ताे देश भर में कई लड़ाई लड़ी गई। अंग्रेजों द्वारा लखनऊ के बाद जब बाराबंकी की ओर विस्तार किया जाने लगा तो बहराइच के राजा बलभद्र सिंह चहलारी ने मौजूदा बाराबंकी शहर के ओबरी के मैदान में रेठ नदी के किनारे हजारों लड़ाकों के साथ मोर्चा संभाला। बताते हैं कि वे आगे बढ़ते हुए नासिक को ब्रिटिश से मुक्त कराना चाहते थे। जब अंग्रेजों ने ब्रिगेडियर होप ग्रांट के नेतृत्व में तोपखानों व आधुनिक हथियारों से लैस एक बड़ी सेना राजा से युद्ध करने के लिए भेज दी। दोनों सेनाओं में भीषण युद्ध हुआ।
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राजा की सेना ने छक्के छुड़ा दिए तो अंग्रेजों ने तोपों से गोलों की स्कार्फ लगा दी। इस युद्ध में मात्र 18 साल के राजा बलभद्र सिंह चहलारी ने अपने एक हजार लड़ाकों से साथ प्राण न्योछावर कर दिए। इसके बाद क्रांतिकारियों का अंतिम मोर्चा भिटौली में बना। भिटौली मोर्चा पीछे छोड़कर आजादी के कट्टरपंथियों ने बेगम हजरत महल, नाना साहब के संग स्वतंत्रता संग्राम जारी रखने के लिए नेपाल के क्षेत्र में प्रवेश किया। इस लड़ाई बाराबंकी व आसपास के जिलों में आजादी की ललक जगा गई थी।
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स्कूल में दी गिरफ्तारी, लूटा था हैदरगढ़ डाकघर
आजादी की लड़ाई में जिले के दर्जनों स्वंतत्रता संग्राम सेनानियों ने अपना योगदान दिया। 1921 में गांधीजी ने असहयोग आंदोलन शुरू और प्रिंस ऑफ वेल्स के भारत आगमन का विरोध किया तो बाराबंकी में जोरदार प्रदर्शन हुए। सरकारी हाईस्कूल, नवाबगंज (अब जीआईसी) स्वतंत्रता सेनानियों व देशप्रेमियों में गिरफ्तारी दी। मसाैली के रफी अहमद किदवई भी गिरफ्तार हुये थे। आजादी की लड़ाई तेज हुई तो जिला कांग्रेस कार्यालय को सील कर दिया गया। 24 अगस्त 1942 ई. को जिले के वीरों ने हैदरगढ़ डाकघर का लूट लिया।
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