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Barabanki News: 23 साल पुराने असलहा फैक्टरी केस के दोनों आरोपी बरी
Mon, 11 May 2026 01:23 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Mon, 11 May 2026 01:23 AM IST
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बाराबंकी। करीब 23 साल पुराने अवैध असलहा बनाने के मामले में अदालत ने सबूतों के अभाव में दोनों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। मामला वर्ष 2002 का था, जिसमें पुलिस ने खेत में कथित तौर पर तमंचा बनाने का कारखाना पकड़ा था।
अभियोजन के अनुसार पांच अक्तूबर 2002 को तत्कालीन शहर कोतवाल आदित्य प्रकाश गंगवार ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि मोहम्मदपुर गांव निवासी जयप्रकाश वर्मा अपने खेत में अवैध असलहा बनाने की फैक्टरी चला रहे हैं। सूचना पर पुलिस टीम ने घेराबंदी कर जयप्रकाश वर्मा तथा उत्तर टोला बंकी निवासी राकेश कुमार को गिरफ्तार किया था।
मौके से तमंचे और तमंचा बनाने के उपकरण बरामद किए जाने का दावा किया गया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि वर्ष 2003 से लंबित इस मामले में पुलिस और अभियोजन पक्ष कई तारीखों पर कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके। न्यायालय द्वारा अभियोजन गवाहों को उपस्थित कराने के लिए बार-बार निर्देश दिए गए।
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22 अप्रैल 2026 को भी अभियोजन और पुलिस को साक्ष्य प्रस्तुत करने का अंतिम अवसर दिया गया। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट दिवाकर कुमार ने साक्ष्यों के अभाव में जयप्रकाश वर्मा और राकेश कुमार को बरी कर दिया।
दुकानों पर मिला कब्जा, मुकदमा समाप्त
विवादित दुकानों को खाली कराकर कब्जा सौंपे जाने के बाद अदालत ने मामले का निस्तारण कर पत्रावली को अभिलेखागार में दाखिल करने का आदेश दिया है। शहर निवासी ओमप्रकाश निगम ने विपक्षी हिदायत रसूल उर्फ वसीम अहमद के खिलाफ अदालत में अर्जी दाखिल कर आरोप लगाया था कि उनकी दुकानों पर कब्जा कर लिया गया है। मामले की सुनवाई अपर जिला जज परशुराम की अदालत में चल रही थी। सुनवाई के दौरान ओमप्रकाश निगम की ओर से अदालत को बताया गया कि उन्हें दुकानों का कब्जा वापस मिल चुका है। अब वह मुकदमे को आगे नहीं चलाना चाहते।
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अभियोजन के अनुसार पांच अक्तूबर 2002 को तत्कालीन शहर कोतवाल आदित्य प्रकाश गंगवार ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि मोहम्मदपुर गांव निवासी जयप्रकाश वर्मा अपने खेत में अवैध असलहा बनाने की फैक्टरी चला रहे हैं। सूचना पर पुलिस टीम ने घेराबंदी कर जयप्रकाश वर्मा तथा उत्तर टोला बंकी निवासी राकेश कुमार को गिरफ्तार किया था।
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मौके से तमंचे और तमंचा बनाने के उपकरण बरामद किए जाने का दावा किया गया था। सुनवाई के दौरान अदालत ने पाया कि वर्ष 2003 से लंबित इस मामले में पुलिस और अभियोजन पक्ष कई तारीखों पर कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सके। न्यायालय द्वारा अभियोजन गवाहों को उपस्थित कराने के लिए बार-बार निर्देश दिए गए।
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22 अप्रैल 2026 को भी अभियोजन और पुलिस को साक्ष्य प्रस्तुत करने का अंतिम अवसर दिया गया। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट दिवाकर कुमार ने साक्ष्यों के अभाव में जयप्रकाश वर्मा और राकेश कुमार को बरी कर दिया।
दुकानों पर मिला कब्जा, मुकदमा समाप्त
विवादित दुकानों को खाली कराकर कब्जा सौंपे जाने के बाद अदालत ने मामले का निस्तारण कर पत्रावली को अभिलेखागार में दाखिल करने का आदेश दिया है। शहर निवासी ओमप्रकाश निगम ने विपक्षी हिदायत रसूल उर्फ वसीम अहमद के खिलाफ अदालत में अर्जी दाखिल कर आरोप लगाया था कि उनकी दुकानों पर कब्जा कर लिया गया है। मामले की सुनवाई अपर जिला जज परशुराम की अदालत में चल रही थी। सुनवाई के दौरान ओमप्रकाश निगम की ओर से अदालत को बताया गया कि उन्हें दुकानों का कब्जा वापस मिल चुका है। अब वह मुकदमे को आगे नहीं चलाना चाहते।