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Barabanki News: युगों से अयोध्या व बाराबंकी का रहा नाता
Mon, 01 Jan 2024 01:08 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Mon, 01 Jan 2024 01:08 AM IST
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बाराबंकी। देश के कोने-कोने से रामभक्त अयोध्या पहुंच रहे हैं। मगर आपको यह जानकर सुखद आश्चर्य होगा कि अयोध्या व बाराबंकी का नाता कई युगों से है। त्रेता युग में जहां गुरु वशिष्ठ द्वारा सतरिख आश्रम में युवा राजकुमारों को शिक्षा-दीक्षा दी गई, वहीं राममंदिर आंदोलन हुआ तो बाराबंकी के हजारों लोग तन-मन-धन से इसमें शामिल हुए। आज भी बाराबंकी जिले के करीब सवा चार लाख मतदाता अयोध्या का सांसद चुनते हैं। जबकि चौरासी कोसी यात्रा भी बाराबंकी से होकर ही जाती है।
आज पूरी दुनिया की निगाहें अयोध्या पर लगी हैं। भगवान राम के भव्य मंदिर का निर्माण तेजी से चल रहा है। 22 जनवरी को होने वाले प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को लेकर रामभक्तों में खुशी का माहौल है। इस माहौल के बीच अयोध्या का पश्चिमी द्वार कहे जाने वाले बाराबंकी जिले में कुछ अलग ही उल्लास है। ऐसा इसलिए क्योंकि रामनगरी का बाराबंकी से युगों-युगों का नाता है। इसके एक नहीं कई प्रमाण हैं।
वेदों व इतिहास की किताबों में वर्णित है कि बाराबंकी जिला सूर्यवंशी राजाओं के राज्य का हिस्सा था, जिसकी राजधानी अयोध्या थी। त्रेता युग में राजा दशरथ के कुल गुरू वशिष्ठ ऋषि थे। उन्होंने भगवान राम व अन्य राजकुमारों को बाराबंकी के सतरिख स्थित आश्रम मेें शिक्षा-दीक्षा दी थी। इसका उल्लेख जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट barabanki.nic.in में प्रमुखता से किया गया है। इसके बाद की तमाम घटनाएं दोनों जिलों के रिश्तों को बयां करती हैं। लेकिन 1992 में जब अयोध्या में ढांचा विध्वंस हुआ तो बाराबंकी के हजारों लोग पैदल बाराबंकी गए। यहां के लोग मुकदमे में नामजद हुए। राममंदिर आंदोलन में कई लोगों को जेल जाना पड़ा।
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अयोध्या का 84 कोसी परिक्रमा मार्ग का करीब 24 किमी हिस्सा बाराबंकी में पड़ता है। दरियाबाद के अलियाबाद, नियामतगंज से बारिनबाग होकर सरयू नदी के मुर्तियनघाट तक यह मार्ग है। अब तो इसे नेशनल हाईवे का दर्जा मिल चुका है। केवल वैदिक, ऐतिहासिक, आर्थिक व सामाजिक ही नहीं लोकतांत्रिक दृष्टि से बाराबंकी अयोध्या का हिस्सा है। पहले अयोध्या का रुदौली विधानसभा क्षेत्र बाराबंकी में था।
रुदौली अयोध्या में शामिल हुई तो बाराबंकी का पूरा दरियाबाद विधानासभा क्षेत्र अयोध्या संसदीय क्षेत्र में शामिल कर दिया गया। करीब 1000 गांवों व मजरोें के चार लाख 20 हजार मतदाता बाराबंकी जिले में रहकर भी देश की सबसे पड़ी पंचायत को चुनने के लिए अयोध्या के मतदाता के रूप में भाग लेते हैं। इन हालातों में अब जब राममंदिर निर्माण चल रहा है और 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम है तो बाराबंकी भी अयोध्या से अपने रिश्ते को निभाने के लिए बेकरार है।
द्वार के साथ वृहद अयोध्या ही है बाराबंकी
बाराबंकी अयोध्या का दक्षिणी-पश्चिमी द्वार है। बाराबंकी के लोग भगवान राम के अनुयायी हैं। मेरे हिसाब से वृहद अयोध्या का जो रूप है, बाराबंकी उसी में शामिल है। यह नाता युगों से है।
- लल्लू सिंह, सांसद अयोध्या
आस्था के साथ विकास का संगम
अयोध्या में भगवान श्रीराम का मंदिर बनने के साथ बाराबंकी की जनता को अनेकों विकास कार्यों की सौगात मिल रही है। सड़क, ट्रेन व परिवहन की सुविधाओं के साथ हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा।
- सतीशचंद्र शर्मा, दरियाबाद के विधायक व राज्यमंत्री
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आज पूरी दुनिया की निगाहें अयोध्या पर लगी हैं। भगवान राम के भव्य मंदिर का निर्माण तेजी से चल रहा है। 22 जनवरी को होने वाले प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम को लेकर रामभक्तों में खुशी का माहौल है। इस माहौल के बीच अयोध्या का पश्चिमी द्वार कहे जाने वाले बाराबंकी जिले में कुछ अलग ही उल्लास है। ऐसा इसलिए क्योंकि रामनगरी का बाराबंकी से युगों-युगों का नाता है। इसके एक नहीं कई प्रमाण हैं।
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वेदों व इतिहास की किताबों में वर्णित है कि बाराबंकी जिला सूर्यवंशी राजाओं के राज्य का हिस्सा था, जिसकी राजधानी अयोध्या थी। त्रेता युग में राजा दशरथ के कुल गुरू वशिष्ठ ऋषि थे। उन्होंने भगवान राम व अन्य राजकुमारों को बाराबंकी के सतरिख स्थित आश्रम मेें शिक्षा-दीक्षा दी थी। इसका उल्लेख जिला प्रशासन की आधिकारिक वेबसाइट barabanki.nic.in में प्रमुखता से किया गया है। इसके बाद की तमाम घटनाएं दोनों जिलों के रिश्तों को बयां करती हैं। लेकिन 1992 में जब अयोध्या में ढांचा विध्वंस हुआ तो बाराबंकी के हजारों लोग पैदल बाराबंकी गए। यहां के लोग मुकदमे में नामजद हुए। राममंदिर आंदोलन में कई लोगों को जेल जाना पड़ा।
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अयोध्या का 84 कोसी परिक्रमा मार्ग का करीब 24 किमी हिस्सा बाराबंकी में पड़ता है। दरियाबाद के अलियाबाद, नियामतगंज से बारिनबाग होकर सरयू नदी के मुर्तियनघाट तक यह मार्ग है। अब तो इसे नेशनल हाईवे का दर्जा मिल चुका है। केवल वैदिक, ऐतिहासिक, आर्थिक व सामाजिक ही नहीं लोकतांत्रिक दृष्टि से बाराबंकी अयोध्या का हिस्सा है। पहले अयोध्या का रुदौली विधानसभा क्षेत्र बाराबंकी में था।
रुदौली अयोध्या में शामिल हुई तो बाराबंकी का पूरा दरियाबाद विधानासभा क्षेत्र अयोध्या संसदीय क्षेत्र में शामिल कर दिया गया। करीब 1000 गांवों व मजरोें के चार लाख 20 हजार मतदाता बाराबंकी जिले में रहकर भी देश की सबसे पड़ी पंचायत को चुनने के लिए अयोध्या के मतदाता के रूप में भाग लेते हैं। इन हालातों में अब जब राममंदिर निर्माण चल रहा है और 22 जनवरी को प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम है तो बाराबंकी भी अयोध्या से अपने रिश्ते को निभाने के लिए बेकरार है।
द्वार के साथ वृहद अयोध्या ही है बाराबंकी
बाराबंकी अयोध्या का दक्षिणी-पश्चिमी द्वार है। बाराबंकी के लोग भगवान राम के अनुयायी हैं। मेरे हिसाब से वृहद अयोध्या का जो रूप है, बाराबंकी उसी में शामिल है। यह नाता युगों से है।
- लल्लू सिंह, सांसद अयोध्या
आस्था के साथ विकास का संगम
अयोध्या में भगवान श्रीराम का मंदिर बनने के साथ बाराबंकी की जनता को अनेकों विकास कार्यों की सौगात मिल रही है। सड़क, ट्रेन व परिवहन की सुविधाओं के साथ हजारों लोगों को रोजगार मिलेगा।
- सतीशचंद्र शर्मा, दरियाबाद के विधायक व राज्यमंत्री