{"_id":"67744a058dd3d833bd0a2da2","slug":"autumn-has-started-in-parijat-tree-drought-will-last-for-six-months-barabanki-news-c-315-brp1007-130779-2025-01-01","type":"story","status":"publish","title_hn":"Barabanki News: पारिजात वृक्ष में शुरू हुआ पतझड़, छह माह तक रहेगा सूखा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Barabanki News: पारिजात वृक्ष में शुरू हुआ पतझड़, छह माह तक रहेगा सूखा
Wed, 01 Jan 2025 01:16 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Wed, 01 Jan 2025 01:16 AM IST
विज्ञापन
कोटवाधाम (बाराबंकी)। तहसील सिरौलीगौसपुर क्षेत्र के बरोलिया गांव स्थित महाभारतकालीन पारिजात वृक्ष में पतझड़ शुरू हो गया है। अब अगले छह माह तक यह वृक्ष सूखा रहेगा। ऐसे में यहां आने वाले श्रद्धालुओं को पारिजात वृक्ष की सुंदरता से वंचित होना पड़ेगा।
पर्यटन स्थल पारिजात धाम में लगे वृक्ष को देखने के लिए दूर-दराज से लोग आते हैं। सबसे ज्यादा सुखद अहसास वृक्ष पर आने वाले फूल और फल को देखकर होता है। पारिजात वृक्ष में अन्य वृक्षों के मुकाबले पहले पतझड़ शुरू हो जाता है और सबसे बाद में हरा-भरा होता है। दिसंबर माह के अंत से मई माह के अंत तक पतझड़ का असर बना रहेगा। इस दौरान देवताओं के वृक्ष की निगरानी वन विभाग करता है, क्योंकि इसमें अनेक प्रकार के रोग लगने की भी आशंका रहती है।
इसके लिए विशेषज्ञों की निगरानी में विशेष प्रकार की दवा का छिड़काव भी समय-समय पर होता रहता है। सेवादार महंत मंगलदास बताते हैं कि पतझड़ के समय वृक्ष को कोई नहीं छूता है। फूल व फल लगने के बाद इसे कोई भी छूकर आशीर्वाद प्राप्त कर सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
पर्यटन स्थल पारिजात धाम में लगे वृक्ष को देखने के लिए दूर-दराज से लोग आते हैं। सबसे ज्यादा सुखद अहसास वृक्ष पर आने वाले फूल और फल को देखकर होता है। पारिजात वृक्ष में अन्य वृक्षों के मुकाबले पहले पतझड़ शुरू हो जाता है और सबसे बाद में हरा-भरा होता है। दिसंबर माह के अंत से मई माह के अंत तक पतझड़ का असर बना रहेगा। इस दौरान देवताओं के वृक्ष की निगरानी वन विभाग करता है, क्योंकि इसमें अनेक प्रकार के रोग लगने की भी आशंका रहती है।
विज्ञापन
इसके लिए विशेषज्ञों की निगरानी में विशेष प्रकार की दवा का छिड़काव भी समय-समय पर होता रहता है। सेवादार महंत मंगलदास बताते हैं कि पतझड़ के समय वृक्ष को कोई नहीं छूता है। फूल व फल लगने के बाद इसे कोई भी छूकर आशीर्वाद प्राप्त कर सकता है।
विज्ञापन