{"_id":"6a5543de06e8d3c7e80df38d","slug":"ai-used-to-hijack-digital-identities-fraudsters-are-even-scanning-retinas-barabanki-news-c-315-1-brp1006-174075-2026-07-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"Barabanki News: एआई से डिजिटल पहचान पर डाका, रेटिना तक स्कैन कर रहे ठग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Barabanki News: एआई से डिजिटल पहचान पर डाका, रेटिना तक स्कैन कर रहे ठग
Tue, 14 Jul 2026 01:30 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Tue, 14 Jul 2026 01:30 AM IST
विज्ञापन
बाराबंकी। साइबर अपराध की दुनिया में अब सबसे बड़ा हथियार आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) बन चुका है। ठग अब न तो एटीएम कार्ड चुरा रहे हैं और न ही सिर्फ ओटीपी के भरोसे बैठे हैं। उनका नया निशाना है आपकी डिजिटल पहचान।
सोशल मीडिया से फोटो, इंटरनेट से मोबाइल नंबर और दूसरी सार्वजनिक जानकारियां जुटाकर एआई के जरिये ऐसी फर्जी पहचान तैयार की जा रही है कि आधार में मोबाइल नंबर तक बदल जा रहा है। इसके बाद बैंक में ऑनलाइन लोन के लिए आवेदन कर रकम निकाल ली जा रही है।
बाराबंकी साइबर सेल की जांच में सामने आया है कि ठग पहले व्यक्ति की डिजिटल प्रोफाइल तैयार करते हैं। इसके बाद आधार से जुड़ी ऑनलाइन प्रक्रिया का दुरुपयोग कर मोबाइल नंबर बदल बैंकिंग सेवाओं पर नियंत्रण हासिल कर लेते हैं। इतना ही नहीं, जहां आंखों के रेटिना की जरूरत होती है, वो भी एआई टूल्स की मदद से बनाकर स्कैन कर देते हैं।
विज्ञापन
डीपफेक तकनीक से नकली वीडियो और आवाज तैयार कर ठगी कर रहे हैं। कई घटनाएं सामने आने के बाद साइबर सेल ने इसे लेकर अलर्ट जारी कर दिया है। संवाद
........................................................
एआई के जरिये आधार अपडेट कर बैंक से लोन
असंद्रा क्षेत्र के मिर्चिया गांव निवासी हिमांशु चौरसिया का ठगों ने पहले मोबाइल नंबर और फोटो जुटाया। इसके बाद एआई टूल्स की मदद से आधार एप पर अपडेट की ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी कराई। एआई से रेटिना स्कैन कर डिजिटल सत्यापन कर आधार में मोबाइल नंबर बदल दिया गया। नंबर बदलते ही बैंक खाते से लोन ले लिया। इस मामले में एक माह पहले बरेली के दो ठगों को गिरफ्तार किया गया।
........................................................
कनाडा में बैठे युवक के दस्तावेज तैयार, बैंक में आवेदन
जहांगीराबाद निवासी दीपक कनाडा की एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं। विदेश जाने के बाद उनका भारतीय मोबाइल नंबर बंद हो गया। इसी का फायदा उठाकर साइबर ठगों ने इंटरनेट से उनका नाम, पता और फोटो जुटा लिया। आरोप है कि आधार में मोबाइल नंबर बदलने के बाद एआई टूल्स की मदद से अन्य जरूरी दस्तावेज तैयार किए गए और बैंक में कर्ज के लिए आवेदन कर दिया गया।
........................................................
हाईकोर्ट में एसी का झांसा देकर बदल दिए नंबर
मसौली क्षेत्र के एसी मिस्त्री अदनान और उनके पांच साथियों को ठगों ने हाईकोर्ट में 15 एसी मरम्मत का काम दिलाने की बात कहकर नकली कार्यालय या अदालत जैसा माहौल दिखाया। पास बनवाने के नाम पर सभी के आधार कार्ड मंगा लिए। फिर मोबाइल नंबर बदलने के साथ एआई टूल्स की मदद से फर्जी दस्तावेज तैयार किए और लोन के लिए आवेदन कर दिया।
.......................
ऐसे सुरक्षित करें अपना आधार
एम-आधार बंद कर आईडीएआई का नया एप आ गया है। नए एप में ही बायोमीट्रिक लॉक, फेस ऑथेंटिकेशन और अन्य सुरक्षा सुविधाएं दी गई हैं। आधार एप पर जाकर बायोमीट्रिक लॉक फीचर सक्रिय करें। इससे आपकी अंगुलियों के निशान और आइरिस का गलत इस्तेमाल नहीं हो सकेगा। जब बायोमीट्रिक प्रमाणीकरण की जरूरत हो, तभी इसे अस्थायी रूप से अनलॉक करें।
.............................
खातों में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन जरूरी
किसी भी फोन या वीडियो कॉल पर केवल आवाज या चेहरे के आधार पर भरोसा न करें और पैसे भेजने से पहले पहचान की पुष्टि अवश्य करें। अनजान लिंक, क्यूआर कोड और संदिग्ध एप से बचें। साथ ही सभी महत्वपूर्ण खातों में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू रखें। ठगी का संदेह होने पर तुरंत बैंक को सूचना दें और 1930 हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
- अर्पित विजयवर्गीय, एसपी
विज्ञापन
सोशल मीडिया से फोटो, इंटरनेट से मोबाइल नंबर और दूसरी सार्वजनिक जानकारियां जुटाकर एआई के जरिये ऐसी फर्जी पहचान तैयार की जा रही है कि आधार में मोबाइल नंबर तक बदल जा रहा है। इसके बाद बैंक में ऑनलाइन लोन के लिए आवेदन कर रकम निकाल ली जा रही है।
विज्ञापन
बाराबंकी साइबर सेल की जांच में सामने आया है कि ठग पहले व्यक्ति की डिजिटल प्रोफाइल तैयार करते हैं। इसके बाद आधार से जुड़ी ऑनलाइन प्रक्रिया का दुरुपयोग कर मोबाइल नंबर बदल बैंकिंग सेवाओं पर नियंत्रण हासिल कर लेते हैं। इतना ही नहीं, जहां आंखों के रेटिना की जरूरत होती है, वो भी एआई टूल्स की मदद से बनाकर स्कैन कर देते हैं।
विज्ञापन
डीपफेक तकनीक से नकली वीडियो और आवाज तैयार कर ठगी कर रहे हैं। कई घटनाएं सामने आने के बाद साइबर सेल ने इसे लेकर अलर्ट जारी कर दिया है। संवाद
........................................................
एआई के जरिये आधार अपडेट कर बैंक से लोन
असंद्रा क्षेत्र के मिर्चिया गांव निवासी हिमांशु चौरसिया का ठगों ने पहले मोबाइल नंबर और फोटो जुटाया। इसके बाद एआई टूल्स की मदद से आधार एप पर अपडेट की ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी कराई। एआई से रेटिना स्कैन कर डिजिटल सत्यापन कर आधार में मोबाइल नंबर बदल दिया गया। नंबर बदलते ही बैंक खाते से लोन ले लिया। इस मामले में एक माह पहले बरेली के दो ठगों को गिरफ्तार किया गया।
........................................................
कनाडा में बैठे युवक के दस्तावेज तैयार, बैंक में आवेदन
जहांगीराबाद निवासी दीपक कनाडा की एक निजी कंपनी में कार्यरत हैं। विदेश जाने के बाद उनका भारतीय मोबाइल नंबर बंद हो गया। इसी का फायदा उठाकर साइबर ठगों ने इंटरनेट से उनका नाम, पता और फोटो जुटा लिया। आरोप है कि आधार में मोबाइल नंबर बदलने के बाद एआई टूल्स की मदद से अन्य जरूरी दस्तावेज तैयार किए गए और बैंक में कर्ज के लिए आवेदन कर दिया गया।
........................................................
हाईकोर्ट में एसी का झांसा देकर बदल दिए नंबर
मसौली क्षेत्र के एसी मिस्त्री अदनान और उनके पांच साथियों को ठगों ने हाईकोर्ट में 15 एसी मरम्मत का काम दिलाने की बात कहकर नकली कार्यालय या अदालत जैसा माहौल दिखाया। पास बनवाने के नाम पर सभी के आधार कार्ड मंगा लिए। फिर मोबाइल नंबर बदलने के साथ एआई टूल्स की मदद से फर्जी दस्तावेज तैयार किए और लोन के लिए आवेदन कर दिया।
.......................
ऐसे सुरक्षित करें अपना आधार
एम-आधार बंद कर आईडीएआई का नया एप आ गया है। नए एप में ही बायोमीट्रिक लॉक, फेस ऑथेंटिकेशन और अन्य सुरक्षा सुविधाएं दी गई हैं। आधार एप पर जाकर बायोमीट्रिक लॉक फीचर सक्रिय करें। इससे आपकी अंगुलियों के निशान और आइरिस का गलत इस्तेमाल नहीं हो सकेगा। जब बायोमीट्रिक प्रमाणीकरण की जरूरत हो, तभी इसे अस्थायी रूप से अनलॉक करें।
.............................
खातों में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन जरूरी
किसी भी फोन या वीडियो कॉल पर केवल आवाज या चेहरे के आधार पर भरोसा न करें और पैसे भेजने से पहले पहचान की पुष्टि अवश्य करें। अनजान लिंक, क्यूआर कोड और संदिग्ध एप से बचें। साथ ही सभी महत्वपूर्ण खातों में टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन चालू रखें। ठगी का संदेह होने पर तुरंत बैंक को सूचना दें और 1930 हेल्पलाइन या राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।
- अर्पित विजयवर्गीय, एसपी