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कुदरत की दोहरी मार से सदमें में तराई के किसान
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सिरौलीगौसपुर (बाराबंकी)। खरीफ की फसल मड़ाई के समय बारिश व नेपाली पानी की दस्तक के बाद जारी एलर्ट ने तराई के किसानों की मुसीबतें बढ़ा दी हैं। कुदरत की दोहरी मार को लेकर सदमे में किसानों के पास ईश्वर से प्रार्थना करने के सिवाय कोई दूसरा रास्ता नहीं दिख रहा है। मंगलवार को प्रशासन के अलर्ट जारी करने के बाद से तराई में हाहाकार मच गया।
सरयू के किनारे स्थित अपने खेतों में किसानों ने तीन माह पहले धान के पौधों की रोपाई की थी। बीते वर्षों की तरह इस बार नदी में पानी कम होने को लेकर किसानों ने मेहनत की तो फसल भी अच्छी थी। खेतों में लदी खड़ी लहलहाती फसल देख किसान काफी खुश थे। मगर, शायद ईश्वर को यह मंजूर नहीं था। सितंबर में हुई मूसलाधार बारिश से किसानों की फसल खेतों में चटाई हो गई।
उसके बाद भी किसानों को बची हुई फसल से काफी उम्मीद थी। मगर, मड़ाई का समय शुरू होते ही किसानों ने फसल की कटाई शुरू ही की थी कि रविवार से बारिश शुरू हो गई। लगातार बारिश से किसानों की कटी फसल को तो नुकसान हुआ है। वहीं मंगलवार को नेपाल से छह लाख क्यूसेक पानी सरयू छोड़ने के बाद प्रशासन ने तराई के गांवों में अलर्ट जारी कर गांव को खाली कराने में जुट गया।
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ऐसे में कुदरत की दोहरी मार को देख तराई के किसान बेहाल हो गए। क्योंकि अक्टूबर में पहली बार पानी छोड़ने से तराई में हाहाकार मचा है। मगर, तैयार फसल को बर्बाद होते किसान नहीं देख पा रहा है। किसान संदीप मौर्य बताते हैं कि उनकी नदी की तलहटी में करीब 15 बीघा धान की फसल कटी पड़ी हुई है।
कई दिनों से हो रही बरसात के चलते फसल बर्बादी की कगार पर पहुंच गई है। रमेश बताते हैं कि इस बार फसल काफी अच्छी थी। मौसम की बेरुखी से 50 प्रतिशत फसल तो चली गई। मगर, बची हुई फसल नेपाली पानी ने लीलने की फिराक में है। ऐसे में आगे की रोटी का सहारा भी छिनता दिखने लगा है।
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सरयू के किनारे स्थित अपने खेतों में किसानों ने तीन माह पहले धान के पौधों की रोपाई की थी। बीते वर्षों की तरह इस बार नदी में पानी कम होने को लेकर किसानों ने मेहनत की तो फसल भी अच्छी थी। खेतों में लदी खड़ी लहलहाती फसल देख किसान काफी खुश थे। मगर, शायद ईश्वर को यह मंजूर नहीं था। सितंबर में हुई मूसलाधार बारिश से किसानों की फसल खेतों में चटाई हो गई।
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उसके बाद भी किसानों को बची हुई फसल से काफी उम्मीद थी। मगर, मड़ाई का समय शुरू होते ही किसानों ने फसल की कटाई शुरू ही की थी कि रविवार से बारिश शुरू हो गई। लगातार बारिश से किसानों की कटी फसल को तो नुकसान हुआ है। वहीं मंगलवार को नेपाल से छह लाख क्यूसेक पानी सरयू छोड़ने के बाद प्रशासन ने तराई के गांवों में अलर्ट जारी कर गांव को खाली कराने में जुट गया।
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ऐसे में कुदरत की दोहरी मार को देख तराई के किसान बेहाल हो गए। क्योंकि अक्टूबर में पहली बार पानी छोड़ने से तराई में हाहाकार मचा है। मगर, तैयार फसल को बर्बाद होते किसान नहीं देख पा रहा है। किसान संदीप मौर्य बताते हैं कि उनकी नदी की तलहटी में करीब 15 बीघा धान की फसल कटी पड़ी हुई है।
कई दिनों से हो रही बरसात के चलते फसल बर्बादी की कगार पर पहुंच गई है। रमेश बताते हैं कि इस बार फसल काफी अच्छी थी। मौसम की बेरुखी से 50 प्रतिशत फसल तो चली गई। मगर, बची हुई फसल नेपाली पानी ने लीलने की फिराक में है। ऐसे में आगे की रोटी का सहारा भी छिनता दिखने लगा है।