{"_id":"6819033b03583bae64040bfb","slug":"after-five-years-the-investigator-sought-evidence-from-janesma-principal-barabanki-news-c-315-slko1012-138673-2025-05-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Barabanki News: पांच साल बाद विवेचक ने जनेस्मा प्राचार्य से मांगे साक्ष्य","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Barabanki News: पांच साल बाद विवेचक ने जनेस्मा प्राचार्य से मांगे साक्ष्य
Mon, 05 May 2025 11:58 PM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Mon, 05 May 2025 11:58 PM IST
विज्ञापन
बाराबंकी। पांच साल पहले शहर के जनेस्मा (जवाहर लाल नेहरू स्मारक परास्नातक महाविद्यालय) में हुए फीस घोटाले के मामले में विवेचक ने जनेस्मा प्राचार्य से साक्ष्य मांगे हैं। इस मामले की विवेचना आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन की लखनऊ शाखा कर रही है। पांच साल के लंबे इंतजार के बाद 1.67 करोड़ रुपये के फीस घोटाले की जांच में आई तेजी से अब गड़बड़ी में शामिल लोगों पर कार्रवाई की उम्मीद जगी है।
विवेचक ने इस मामले में जिन बिंदुओं पर प्राचार्य से साक्ष्य मांगे गए हैं, उन बिंदुओं पर मुकदमा दर्ज कराने वाले पूर्व प्राचार्य डॉ. आर एस यादव भी सटीक जवाब नहीं दे पाए थे। इस मामले का संज्ञान जनेस्मा प्रबंध समिति के सचिव एसडीएम सदर आनंद तिवारी ने भी लिया है। वह भी पुरानी फाइलों को खंगालने में जुटे हैं।जांच तेज होने से इस मामले से जुड़े लोगों में हड़कंप है। 15 फरवरी 2020 को तत्कालीन प्राचार्य डॉ. आरएस यादव ने शिव शंकर वर्मा, राकेश कुमार आदि के विरुद्ध शहर कोतवाली में 1.67 करोड़ रुपये के घालमेल का मामला दर्ज कराया था। तहरीर में बताया गया था कि एक अक्टूबर 2013 से 31 मार्च 2014 के दौरान जिन छात्रों के व्यक्तिगत परीक्षा फार्म जमा हुए, उनसे ली गई फीस की धनराशि 1.67 करोड़ रुपये बैंक में जमा नहीं कराई गई। फार्म भी अज्ञात लोगों द्वारा फॉरवर्ड किए गए। कुछ दिन बाद यह मामला जांच के लिए आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन शाखा लखनऊ को सौंप दिया गया। मामले के विवेचक ने इस संबंध में पूर्व प्राचार्य से घोटाले की धनराशि का मदवार विवरण मांगा तो 3,96,451 रुपये ही कॉलेज मद में नहीं प्राप्त होने की जानकारी दी गई। अब विवेचक इंस्पेक्टर जितेंद्र बहादुर सिंह ने पांच मार्च 2025 को मौजूदा प्राचार्य को एक पत्र जारी कर गड़बड़ी से जुड़ी पूरी धनराशि 1.67 करोड़ के संबंध में विवरण मांगा है।
विवेचक ने पूछा है कि यह धन किस प्रकार का है, कहां जमा होना चाहिए था, किन लोगों ने शुल्क राशि जमा न करके इसका गबन किया। पत्र में यह भी पूछा गया है कि क्या इस अवधि मेें जो वित्तीय गड़बड़ी हुई, उसके संबंध में आयकर विभाग में कोई मुकदमा तो नहीं चल रहा है।
विज्ञापन
पूर्व प्राचार्य डॉ. आरएस यादव द्वारा 1.67 करोड़ की शुल्क राशि के गबन का मुकदमा दर्ज कराया गया था। इस मामले की जांच कर रहे विवेचक ने पत्र भेजकर पूरा विवरण मांगा है। फिलहाल यह विवरण उपलब्ध नहीं है। इस मामले में नियमानुसार पूरा सहयोग किया जा रहा है।
एसडीएम व सचिव ने बताया कि जनेस्मा में फीस गबन के मामले की जांच लंबे समय से लंबित पड़ा है। इस संबंध में जो भी अभिलेख हैं, उन्हें देखने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। मामले की पूरी तैयारी के साथ पैरवी कराई जाएगी ताकि वास्तविक दोषियों को चिह्नित कर कार्रवाई के घेरे में लाया जा सके।
विज्ञापन
विवेचक ने इस मामले में जिन बिंदुओं पर प्राचार्य से साक्ष्य मांगे गए हैं, उन बिंदुओं पर मुकदमा दर्ज कराने वाले पूर्व प्राचार्य डॉ. आर एस यादव भी सटीक जवाब नहीं दे पाए थे। इस मामले का संज्ञान जनेस्मा प्रबंध समिति के सचिव एसडीएम सदर आनंद तिवारी ने भी लिया है। वह भी पुरानी फाइलों को खंगालने में जुटे हैं।जांच तेज होने से इस मामले से जुड़े लोगों में हड़कंप है। 15 फरवरी 2020 को तत्कालीन प्राचार्य डॉ. आरएस यादव ने शिव शंकर वर्मा, राकेश कुमार आदि के विरुद्ध शहर कोतवाली में 1.67 करोड़ रुपये के घालमेल का मामला दर्ज कराया था। तहरीर में बताया गया था कि एक अक्टूबर 2013 से 31 मार्च 2014 के दौरान जिन छात्रों के व्यक्तिगत परीक्षा फार्म जमा हुए, उनसे ली गई फीस की धनराशि 1.67 करोड़ रुपये बैंक में जमा नहीं कराई गई। फार्म भी अज्ञात लोगों द्वारा फॉरवर्ड किए गए। कुछ दिन बाद यह मामला जांच के लिए आर्थिक अपराध अनुसंधान संगठन शाखा लखनऊ को सौंप दिया गया। मामले के विवेचक ने इस संबंध में पूर्व प्राचार्य से घोटाले की धनराशि का मदवार विवरण मांगा तो 3,96,451 रुपये ही कॉलेज मद में नहीं प्राप्त होने की जानकारी दी गई। अब विवेचक इंस्पेक्टर जितेंद्र बहादुर सिंह ने पांच मार्च 2025 को मौजूदा प्राचार्य को एक पत्र जारी कर गड़बड़ी से जुड़ी पूरी धनराशि 1.67 करोड़ के संबंध में विवरण मांगा है।
विज्ञापन
विवेचक ने पूछा है कि यह धन किस प्रकार का है, कहां जमा होना चाहिए था, किन लोगों ने शुल्क राशि जमा न करके इसका गबन किया। पत्र में यह भी पूछा गया है कि क्या इस अवधि मेें जो वित्तीय गड़बड़ी हुई, उसके संबंध में आयकर विभाग में कोई मुकदमा तो नहीं चल रहा है।
विज्ञापन
पूर्व प्राचार्य डॉ. आरएस यादव द्वारा 1.67 करोड़ की शुल्क राशि के गबन का मुकदमा दर्ज कराया गया था। इस मामले की जांच कर रहे विवेचक ने पत्र भेजकर पूरा विवरण मांगा है। फिलहाल यह विवरण उपलब्ध नहीं है। इस मामले में नियमानुसार पूरा सहयोग किया जा रहा है।
एसडीएम व सचिव ने बताया कि जनेस्मा में फीस गबन के मामले की जांच लंबे समय से लंबित पड़ा है। इस संबंध में जो भी अभिलेख हैं, उन्हें देखने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। मामले की पूरी तैयारी के साथ पैरवी कराई जाएगी ताकि वास्तविक दोषियों को चिह्नित कर कार्रवाई के घेरे में लाया जा सके।