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कोरोना ने रोकी परिषदीय स्कूलों में एडमिशन की रफ्तार
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बाराबंकी। कोरोना कॉल का असर परिषदीय विद्यालयों में नौनिहालों के दाखिले पर साफ दिख रहा है। अप्रैल से शुरू हुए नए शैक्षिक सत्र के चार माह बीतने को हैं। विभागीय आंकड़ों के अनुसार अभी तक इन स्कूलों में करीब पांच हजार बच्चों को ही दाखिला मिल सका है। विभाग से कोई दिशा-निर्देश न मिलने के कारण शिक्षक अभिभावक के साथ स्कूल आने वाले बच्चों का ही एडमिशन कर रहे हैं।
जिले में 3017 परिषदीय विद्यालय हैं। इनमें 2171 प्राथमिक व 846 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। इनमें शैक्षिक-सत्र 2019-20 में 3.34 लाख नौनिहालों को पंजीकृत किया गया था। कोविड-19 को लेकर मार्च से ही विद्यालय बंद होने के कारण प्रस्तावित परीक्षाएं रद्द कर दी गई। वहीं बच्चों को बिना परीक्षा के नई कक्षाओं में प्रमोट कर प्रवेश दे दिया गया। मगर, नए प्रवेश को लेकर विभाग ने कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं किया। वहीं छात्रों के नामांकन का लक्ष्य भी नहीं तय किया। ऐसे में शिक्षक भी अभिभावकों के साथ स्कूल आने वाले बच्चों को ही दाखिला दे रहे हैं।
वहीं कोरोना कॉल को लेकर विद्यालयों में प्रवेश को लेकर बच्चों व अभिभावकों का उत्साह भी ठंडा दिख रहा है। ज्यादातर तो स्कूल तक जाने से डर रहे हैं। नौनिहालों व उनके अभिभावकों को जागरूक करने वाला स्कूल-चलो अभियान भी ठंडा पड़ा है। ऐसे में जुलाई तक करीब-करीब पूरी हो जाने वाली एडमिशन की गति सुस्त है। शैक्षिक सत्र के चार माह में अभी तक कुछ स्कूलों में एक-दो तो कइयों में एक भी नया एडमिशन नहीं हो सका है। विभागीय सूत्रों के अनुसार अभी तक पांच हजार नौनिहालों को ही प्रवेश दिया गया है।
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प्रभारी बीएसए आलोक कुमार सिंह ने बताया कि परिषदीय स्कूलों में एडमिशन की प्रक्रिया चल रही है। यह बात जरूर है कि कोविड-19 को लेकर अभिभावक व बच्चों के न आने के कारण दाखिले की गति सुस्त जरूर है। हालांकि अभी तक करीब पांच हजार बच्चों को प्रवेश दिया जा चुका है।
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जिले में 3017 परिषदीय विद्यालय हैं। इनमें 2171 प्राथमिक व 846 उच्च प्राथमिक विद्यालय हैं। इनमें शैक्षिक-सत्र 2019-20 में 3.34 लाख नौनिहालों को पंजीकृत किया गया था। कोविड-19 को लेकर मार्च से ही विद्यालय बंद होने के कारण प्रस्तावित परीक्षाएं रद्द कर दी गई। वहीं बच्चों को बिना परीक्षा के नई कक्षाओं में प्रमोट कर प्रवेश दे दिया गया। मगर, नए प्रवेश को लेकर विभाग ने कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं किया। वहीं छात्रों के नामांकन का लक्ष्य भी नहीं तय किया। ऐसे में शिक्षक भी अभिभावकों के साथ स्कूल आने वाले बच्चों को ही दाखिला दे रहे हैं।
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वहीं कोरोना कॉल को लेकर विद्यालयों में प्रवेश को लेकर बच्चों व अभिभावकों का उत्साह भी ठंडा दिख रहा है। ज्यादातर तो स्कूल तक जाने से डर रहे हैं। नौनिहालों व उनके अभिभावकों को जागरूक करने वाला स्कूल-चलो अभियान भी ठंडा पड़ा है। ऐसे में जुलाई तक करीब-करीब पूरी हो जाने वाली एडमिशन की गति सुस्त है। शैक्षिक सत्र के चार माह में अभी तक कुछ स्कूलों में एक-दो तो कइयों में एक भी नया एडमिशन नहीं हो सका है। विभागीय सूत्रों के अनुसार अभी तक पांच हजार नौनिहालों को ही प्रवेश दिया गया है।
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प्रभारी बीएसए आलोक कुमार सिंह ने बताया कि परिषदीय स्कूलों में एडमिशन की प्रक्रिया चल रही है। यह बात जरूर है कि कोविड-19 को लेकर अभिभावक व बच्चों के न आने के कारण दाखिले की गति सुस्त जरूर है। हालांकि अभी तक करीब पांच हजार बच्चों को प्रवेश दिया जा चुका है।