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Barabanki News: आश्वी अस्पताल सील, चार संचालकों को नोटिस
Sat, 04 Jul 2026 02:03 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sat, 04 Jul 2026 02:03 AM IST
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बाराबंकी। टॉस्क फोर्स ने शुक्रवार को शहर के पांच अस्पतालों में स्वास्थ्य एवं सुरक्षा मानकों का जायजा लिया। पल्हरी के निकट आश्वी अस्पताल को नियमों की अनदेखी पर सील कर दिया। इसके अलावा चार अस्पताल संचालकों को नोटिस जारी करते हुए जवाब-तलब किया गया है।
नोडल अधिकारी डॉ. एलबी गुप्ता, एसीएमओ डॉ. संजय बाबू और जितेंद्र शुक्ला की टीम अग्निशमन अधिकारियों के साथ अस्पतालों की जांच कर रही है। टीम ने शुक्रवार का पल्हरी के निकट संचालित आश्वी अस्पताल की जांच की। संचालक मौके पर मौजूद नहीं थे। पंजीकरण प्रपत्र पर जिनके नाम दर्ज थे, वे भी मौके पर नहीं मिले।
इस पर अस्पताल को सील करते हुए संचालक से जवाब-तलब किया गया है। जांच के दौरान चौहान अस्पताल बेसमेंट में संचालित मिला। यहां पर एक मरीज भी भर्ती था। जांच के दौरान उमा अस्पताल बंद मिला। संचालक ने बताया कि मानक पूरा न होने की वजह से उन्होंने खुद बंद कर दिया है।
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नोबल और कुमार अस्पताल में भी कई प्रकार की खामियां मिली। एसीएमओ ने बताया कि बेसमेंट में चले रहे अस्पताल में भर्ती मरीज को जिला अस्पताल में शिफ्ट करा दिया गया है।
अधीक्षकों ने नहीं कराई जांच
सबसे ज्यादा अवैध रूप से अस्पतालों का संचालन ग्रामीण इलाकों में हो रहा है। सीएमओ ने सभी सीएचसी अधीक्षकों को टीम बनाकर इनके खिलाफ अभियान चलाने के निर्देश दिए थे, लेकिन अधीक्षकों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। सीएमओ का आदेश दरकिनार करने वाले अधीक्षकों की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में आ गई है।
हाल ही में झोलाछापों के इलाज से मासूम बच्चे सहित दो लोगों की मौत के बाद इनकी नींद टूटी थी। अब तो आदेश के बाद भी जांच के लिए अधीक्षक कदम आगे नहीं बढ़ा रहे हैं।
शुक्रवार को टीम ने पांच अस्पतालों की जांच की। एक अस्पताल को बंद करा दिया गया है। चार अस्पताल संचालकों को नोटिस जारी किया गया है। यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। जो भी अधिकारी इस कार्य में लापरवाही बरतेगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. रंजन गौतम, सीएमओ
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नोडल अधिकारी डॉ. एलबी गुप्ता, एसीएमओ डॉ. संजय बाबू और जितेंद्र शुक्ला की टीम अग्निशमन अधिकारियों के साथ अस्पतालों की जांच कर रही है। टीम ने शुक्रवार का पल्हरी के निकट संचालित आश्वी अस्पताल की जांच की। संचालक मौके पर मौजूद नहीं थे। पंजीकरण प्रपत्र पर जिनके नाम दर्ज थे, वे भी मौके पर नहीं मिले।
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इस पर अस्पताल को सील करते हुए संचालक से जवाब-तलब किया गया है। जांच के दौरान चौहान अस्पताल बेसमेंट में संचालित मिला। यहां पर एक मरीज भी भर्ती था। जांच के दौरान उमा अस्पताल बंद मिला। संचालक ने बताया कि मानक पूरा न होने की वजह से उन्होंने खुद बंद कर दिया है।
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नोबल और कुमार अस्पताल में भी कई प्रकार की खामियां मिली। एसीएमओ ने बताया कि बेसमेंट में चले रहे अस्पताल में भर्ती मरीज को जिला अस्पताल में शिफ्ट करा दिया गया है।
अधीक्षकों ने नहीं कराई जांच
सबसे ज्यादा अवैध रूप से अस्पतालों का संचालन ग्रामीण इलाकों में हो रहा है। सीएमओ ने सभी सीएचसी अधीक्षकों को टीम बनाकर इनके खिलाफ अभियान चलाने के निर्देश दिए थे, लेकिन अधीक्षकों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। सीएमओ का आदेश दरकिनार करने वाले अधीक्षकों की कार्यशैली भी सवालों के घेरे में आ गई है।
हाल ही में झोलाछापों के इलाज से मासूम बच्चे सहित दो लोगों की मौत के बाद इनकी नींद टूटी थी। अब तो आदेश के बाद भी जांच के लिए अधीक्षक कदम आगे नहीं बढ़ा रहे हैं।
शुक्रवार को टीम ने पांच अस्पतालों की जांच की। एक अस्पताल को बंद करा दिया गया है। चार अस्पताल संचालकों को नोटिस जारी किया गया है। यह कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। जो भी अधिकारी इस कार्य में लापरवाही बरतेगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. रंजन गौतम, सीएमओ