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शहर की करोड़ों कीमत की भूमि अवैध कब्जे से कराई मुक्त, शांतिभ्रंग की कार्रवाई
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शहर में करोड़ों की जमीन पर तहसील कर्मियों की मिलीभगत से अवैध कब्जा करने का मामला पकड़ा गया। डीएम और जिला जज द्वारा दो अलग-अलग भूखंडों के मामले में एसडीएम से मांगी जांच रिपोर्ट के बाद पाया गया कि न्याय विभाग की जमीन पर अवैध प्लाटिंग और नगरपालिका की सरकारी भूमि पर दुकानें बनाकर किराए पर दी गई हैं।
गुरुवार को एसडीएम की अगुवाई में नगरपालिका व पुलिस की टीम दोनों भूखंडों को खाली कराने पहुंचीं जहां अतिक्रमण करने वालों ने उनका विरोध किया। दो लोगों को शांतिभंग की आशंका में गिरफ्तार किया गया। वहीं बिजली चोरी के मामले में केस दर्ज कराने का आदेश दिया गया। इस कार्रवाई के बाद शहर के भू-माफिया में हड़कंप मच गया।
गुरुवार को एसडीएम सदर अजय द्विवेदी की अगुवाई में नगरपालिका ईओ संगीता कुमारी, पुलिस व राजस्व विभाग की टीम ने शहर के डीएवी कॉलेज के पास न्याय विभाग की जमीन पर हो रही अवैध प्लाटिंग को रोका। एसडीएम सदर अजय द्विवेदी ने बताया कि जिला जज ने जमीन पर अवैध कब्जा होने की रिपोर्ट मांगी थी।
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जांच की गई तो पता चला कि डीएवी स्कूल के बगल में न्याय विभाग की जमीन पर अवैध प्लाटिंग कर बेचा जा रहा है। मौके पर जांच की गई तो वहां दो लोग मिले। वहां बने कमरे में बिजली चोरी और बिजली का सरकारी केबल व तार पाया गया। दोनों लोगों के खिलाफ शांतिभंग की कार्रवाई की गई तथा बिजली चोरी में केस दर्ज कराने का आदेश दिया गया।
एसडीएम ने बताया कि दूसरा मामला पल्हरी चौराहे के पास 12 बीघा बंजर की भूमि का है। इस जमीन की कीमत करीब 12 करोड़ रुपये बताई जाती है। धोखाधड़ी करके मदन मोहन गुप्ता ने अभिलेखों में दर्ज करा कर इस जमीन पर कब्जा कर लिया। इस मामले में एसडीएम द्वारा फर्जी अभिलेख पाए जाने पर 1987 में खारिज कर बंजर दर्ज कराया था।
इस आदेश के खिलाफ मदन मोहन गुप्ता ने कमिश्नर के यहां अपील की और वहां से स्टे मिलने पर तहसील कर्मियों से मिलीभगत कर अपने नाम दर्ज करा ली। किंतु वर्ष 1991 में तत्कालीन कमिश्नर ने मदन मोहन गुप्ता की अपील को खारिज कर एसडीएम के आदेश को बहाल कर दिया।
इस दौरान राजस्व कर्मियों से मिलकर आदेश को अमल में ही नहीं लाने दिया। एसडीएम ने बताया कि डीएम के आदेश पर जब वह अधिकारी आवास बनाने के लिए जमीन की तलाश कर रहे थे तब मामला पकड़ में आया। एक महीने की मेहनत के बाद कमिश्नर के यहां से आदेश प्राप्त हो गया है।
इसी आधार पर उस भूमि को मुक्त कराने के लिए नोटिस चस्पा करने नगरपालिका व राजस्व कर्मियों की टीम गई थी। किंतु विरोध के कारण जब नोटिस चस्पा नहीं कर सकी तो उन्हें स्वयं पुलिस बल लेकर नोटिस तामील कराने जाना पड़ा।
इस भूमि पर मदन मोहन गुप्ता द्वारा दर्जनों दुकानें बनाकर किराए पर उठाई गई हैं। खाली कराने की कार्रवाई के बाद शहर में भूमाफिया में हड़कंप मच गया है।
एसडीएम सदर अजय द्विवेदी ने बताया कि शहर में करोड़ों कीमत की न्याय विभाग और सरकारी भूमि जांच के दौरान दूसरों के कब्जे में पाई गई जिसे मुक्त कराने की कार्रवाई की गई है। न्याय विभाग की जमीन पर प्लाटिंग कर बेचा जा रहा था जबकि दूसरी जमीन पर दुकनें बनाकर कब्जा कर रखा है जिसकी कीमत 12 करोड़ रुपये बताई जाती है।
इस जमीन को फर्जी तरीके से बंजर से अपने नाम दर्ज कराने का मामला भी मिला है और करीब 35 सालों से उक्त भूमि का एक आदेश अभिलेखों में दर्ज नहीं किया गया था। इसकी भी जांच कराई जाएगी।
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गुरुवार को एसडीएम की अगुवाई में नगरपालिका व पुलिस की टीम दोनों भूखंडों को खाली कराने पहुंचीं जहां अतिक्रमण करने वालों ने उनका विरोध किया। दो लोगों को शांतिभंग की आशंका में गिरफ्तार किया गया। वहीं बिजली चोरी के मामले में केस दर्ज कराने का आदेश दिया गया। इस कार्रवाई के बाद शहर के भू-माफिया में हड़कंप मच गया।
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गुरुवार को एसडीएम सदर अजय द्विवेदी की अगुवाई में नगरपालिका ईओ संगीता कुमारी, पुलिस व राजस्व विभाग की टीम ने शहर के डीएवी कॉलेज के पास न्याय विभाग की जमीन पर हो रही अवैध प्लाटिंग को रोका। एसडीएम सदर अजय द्विवेदी ने बताया कि जिला जज ने जमीन पर अवैध कब्जा होने की रिपोर्ट मांगी थी।
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जांच की गई तो पता चला कि डीएवी स्कूल के बगल में न्याय विभाग की जमीन पर अवैध प्लाटिंग कर बेचा जा रहा है। मौके पर जांच की गई तो वहां दो लोग मिले। वहां बने कमरे में बिजली चोरी और बिजली का सरकारी केबल व तार पाया गया। दोनों लोगों के खिलाफ शांतिभंग की कार्रवाई की गई तथा बिजली चोरी में केस दर्ज कराने का आदेश दिया गया।
एसडीएम ने बताया कि दूसरा मामला पल्हरी चौराहे के पास 12 बीघा बंजर की भूमि का है। इस जमीन की कीमत करीब 12 करोड़ रुपये बताई जाती है। धोखाधड़ी करके मदन मोहन गुप्ता ने अभिलेखों में दर्ज करा कर इस जमीन पर कब्जा कर लिया। इस मामले में एसडीएम द्वारा फर्जी अभिलेख पाए जाने पर 1987 में खारिज कर बंजर दर्ज कराया था।
इस आदेश के खिलाफ मदन मोहन गुप्ता ने कमिश्नर के यहां अपील की और वहां से स्टे मिलने पर तहसील कर्मियों से मिलीभगत कर अपने नाम दर्ज करा ली। किंतु वर्ष 1991 में तत्कालीन कमिश्नर ने मदन मोहन गुप्ता की अपील को खारिज कर एसडीएम के आदेश को बहाल कर दिया।
इस दौरान राजस्व कर्मियों से मिलकर आदेश को अमल में ही नहीं लाने दिया। एसडीएम ने बताया कि डीएम के आदेश पर जब वह अधिकारी आवास बनाने के लिए जमीन की तलाश कर रहे थे तब मामला पकड़ में आया। एक महीने की मेहनत के बाद कमिश्नर के यहां से आदेश प्राप्त हो गया है।
इसी आधार पर उस भूमि को मुक्त कराने के लिए नोटिस चस्पा करने नगरपालिका व राजस्व कर्मियों की टीम गई थी। किंतु विरोध के कारण जब नोटिस चस्पा नहीं कर सकी तो उन्हें स्वयं पुलिस बल लेकर नोटिस तामील कराने जाना पड़ा।
इस भूमि पर मदन मोहन गुप्ता द्वारा दर्जनों दुकानें बनाकर किराए पर उठाई गई हैं। खाली कराने की कार्रवाई के बाद शहर में भूमाफिया में हड़कंप मच गया है।
एसडीएम सदर अजय द्विवेदी ने बताया कि शहर में करोड़ों कीमत की न्याय विभाग और सरकारी भूमि जांच के दौरान दूसरों के कब्जे में पाई गई जिसे मुक्त कराने की कार्रवाई की गई है। न्याय विभाग की जमीन पर प्लाटिंग कर बेचा जा रहा था जबकि दूसरी जमीन पर दुकनें बनाकर कब्जा कर रखा है जिसकी कीमत 12 करोड़ रुपये बताई जाती है।
इस जमीन को फर्जी तरीके से बंजर से अपने नाम दर्ज कराने का मामला भी मिला है और करीब 35 सालों से उक्त भूमि का एक आदेश अभिलेखों में दर्ज नहीं किया गया था। इसकी भी जांच कराई जाएगी।