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फ्लू की तरह हो सकते हैं मलेरिया के प्रारंभिक लक्षण:- डॉ. बंसल
Updated Sat, 21 Jul 2018 12:16 AM IST
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‘फ्लू की तरह हो सकते हैं
मलेरिया के प्रारंभिक लक्षण’
क्रासर-
- हिंद आयुर्विज्ञान संस्थान में हुई मलेरिया विषय पर संगोष्ठी
फोटो:- 08 पी
अमर उजाला ब्यूरो
बाराबंकी। क्षेत्र के सफेदाबाद स्थित हिन्द आयुर्विज्ञान संस्थान के बाल रोग विभाग में मलेरिया पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा बारीकी से मलेरिया के बारे में अहम जानकारियां दी गई और उससे सुरक्षा के उपाय भी बताए गए।
शुक्रवार को हुुई संगोष्ठी में मौजूद डॉ.उत्कर्ष बंसल ने बताया कि मलेरिया मादा एनोफिलिस मच्छर के काटने से फैलता है। मच्छर के काटने से प्लाजमोडियम नामक जीवाणु शरीर में प्रवेश कर जाता है और रोगी के शरीर में कई गुना वृद्धि करता है। यह जीवाणु लिवर और रक्त कोशिकाओं को संक्रमित करके रोगी को बीमार करता है। समय पर इलाज ना होने पर मर्ज जानलेवा हो सकता है। अगर मरीज को ठंड और कंपकपी के साथ बुखार व पसीना आता है, उल्टी व जी मिचलाता है, सिर, कमर व मांसपेशियों में तेज दर्द है तो यह मलेरिया के लक्षण हो सकते हैं। डॉ. एकांश ने बताया कि मलेरिया से पीड़ित व्यक्ति का गुर्दा, लीवर और फेफड़े ख़राब हो सकते हैं। गर्भवती महिलाओं में मलेरिया का संक्रमण गर्भपात का कारण भी बन सकता है। सही उपचार न होने पर मलेरिया बार-बार हो सकता है जिसे रिलैप्स मलेरिया कहते है। संगोष्ठी में डॉ. नरेंद्र ने बताया कि मलेरिया का निदान रोगी के रक्त से स्लाइड बनाकर प्रशिक्षित पैथोलोजिस्ट द्वारा प्लाजमोडियम जीवाणु को पहचान करने से होता है। सही समय पर इलाज से जटिलताओं से बचा जा सकता है। बुखार के लिए पीड़ित को पेरासिटामॉल और ज्यादा से ज्यादा पानी और तरल पदार्थ लेना चाहिए। इस मौके पर डॉ. आर आहूजा, डॉ. प्रगति, डॉ. प्रवीण, डॉ. फातिमा, डॉ. शाकिब, डॉ. आदित्य, डॉ. अमित, डॉ. अभिषेक सहित अन्य चिकित्सक मौजूद थे।
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मलेरिया के प्रारंभिक लक्षण’
क्रासर-
- हिंद आयुर्विज्ञान संस्थान में हुई मलेरिया विषय पर संगोष्ठी
फोटो:- 08 पी
अमर उजाला ब्यूरो
बाराबंकी। क्षेत्र के सफेदाबाद स्थित हिन्द आयुर्विज्ञान संस्थान के बाल रोग विभाग में मलेरिया पर एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया। विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा बारीकी से मलेरिया के बारे में अहम जानकारियां दी गई और उससे सुरक्षा के उपाय भी बताए गए।
शुक्रवार को हुुई संगोष्ठी में मौजूद डॉ.उत्कर्ष बंसल ने बताया कि मलेरिया मादा एनोफिलिस मच्छर के काटने से फैलता है। मच्छर के काटने से प्लाजमोडियम नामक जीवाणु शरीर में प्रवेश कर जाता है और रोगी के शरीर में कई गुना वृद्धि करता है। यह जीवाणु लिवर और रक्त कोशिकाओं को संक्रमित करके रोगी को बीमार करता है। समय पर इलाज ना होने पर मर्ज जानलेवा हो सकता है। अगर मरीज को ठंड और कंपकपी के साथ बुखार व पसीना आता है, उल्टी व जी मिचलाता है, सिर, कमर व मांसपेशियों में तेज दर्द है तो यह मलेरिया के लक्षण हो सकते हैं। डॉ. एकांश ने बताया कि मलेरिया से पीड़ित व्यक्ति का गुर्दा, लीवर और फेफड़े ख़राब हो सकते हैं। गर्भवती महिलाओं में मलेरिया का संक्रमण गर्भपात का कारण भी बन सकता है। सही उपचार न होने पर मलेरिया बार-बार हो सकता है जिसे रिलैप्स मलेरिया कहते है। संगोष्ठी में डॉ. नरेंद्र ने बताया कि मलेरिया का निदान रोगी के रक्त से स्लाइड बनाकर प्रशिक्षित पैथोलोजिस्ट द्वारा प्लाजमोडियम जीवाणु को पहचान करने से होता है। सही समय पर इलाज से जटिलताओं से बचा जा सकता है। बुखार के लिए पीड़ित को पेरासिटामॉल और ज्यादा से ज्यादा पानी और तरल पदार्थ लेना चाहिए। इस मौके पर डॉ. आर आहूजा, डॉ. प्रगति, डॉ. प्रवीण, डॉ. फातिमा, डॉ. शाकिब, डॉ. आदित्य, डॉ. अमित, डॉ. अभिषेक सहित अन्य चिकित्सक मौजूद थे।
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