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Barabanki News: 60 ट्रेनों को मिलेगा कवच, नहीं होगी टक्कर
Wed, 07 Jun 2023 12:48 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Wed, 07 Jun 2023 12:48 AM IST
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बाराबंकी। ओडिशा के बालासोर में हुए ट्रेन हादसे में करीब 300 लोगों की मौत के बाद रेलवे हादसे से बचाव के लिए हरसंभव कोशिश में जुट गया है। इसकी पहल पूर्वोत्तर रेलवे से शुरु हो चुकी है। बाराबंकी से गोरखपुर तक के करीब 241 किमी. लंबे रेलवे ट्रैक पर स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली (कवच) लगेगी। इससे करीब 60 ट्रेनों को इसका लाभ मिलेगा। इस खास तकनीक से ट्रेनों में टक्कर नहीं होगी। इसमें जीपीएस, रेडियो फ्रीक्वेंसी का प्रयोग होगा। ट्रेनों के टकराने की स्थिति आने से पहले ही दोनों ट्रेनों में ऑटोमेटिक ब्रेक लग जाएंगे।
दरअसल, ट्रेनों में होनी वाली टक्कर को रोकने के लिए दो साल पहले ही रेलवे ने संस्था आरडीएसओ के साथ मिलकर काम किया था और स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली विकसित की। इसका प्रयोग किया जा चुका है। पूर्वोत्तर रेलवे ने इस प्रणाली से लैस करने के लिए बाराबंकी-गोरखपुर रेलवे ट्रैक का चयन किया था। इंजीनियरों के सर्वे के बाद रेलवे बोर्ड ने पिछले साल ही इस काम को मंजूरी देते हुए 467 करोड़ रुपये का बजट बनाया था। इस काम की शुरुआत करने के लिए इसी साल के आम बजट में सात करोड़ रुपये आवंटित कर दिए थे।
इस रूट पर लखनऊ से गोरखपुर तक ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नल सिस्टम लगाया जा रहा है। कार्य शुरू कर दिया गया है। लेकिन ओडिशा में हुए भीषण ट्रेन हादसे के कारण इस कार्य को तेज कर दिया गया है। इसके प्रभावी होने के बाद हादसे की संभावनाएं बनते ही पांच किलोमीटर के दायरे में सभी ट्रेन रुक जाएंगी। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि ट्रेनें दो स्टेशनों के बीच भी आगे-पीछे चल सकेंगी, मगर हादसे का खतरा नहीं रहेगा। बाराबंकी रेलवे स्टेशन के अधीक्षक पियूष वर्मा ने बताया कि बाराबंकी से गोरखपुर तक संचालित होने वाली 50 से 60 ट्रेनों को यह कवच मिल सकेगा।
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माइक्रो प्रोसेसर के जरिए ऑडियो-वीडियो करेंगे अलर्ट
स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली (कवच) में कई प्रकार की विश्वसनीय तकनीक का प्रयोग होगा। रेल अधिकारियों के अनुसार ये सिस्टम माइक्रो प्रोसेसर, ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम और रेडियो संचार से जुड़ा रहेगा। यह लोकोमोटिव तथा सिग्नलिंग सिस्टम के साथ-साथ पटरियों में भी प्रभावी रहेगा। इससे लोको पायलट की गतिविधियों की निगरानी होगी। ट्रेनों में टक्कर होने से पहले ही ऑडियो-वीडियो द्वारा अलर्ट कर दिया जाएगा। एक ट्रैक पर होने के बाद भी ट्रेनों में स्वत: ब्रेक लग जाएगी। खास बात यह होगी कि पांच किलोमीटर तक सभी ट्रेनों का संचालन बंद हो जाएगा।
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दरअसल, ट्रेनों में होनी वाली टक्कर को रोकने के लिए दो साल पहले ही रेलवे ने संस्था आरडीएसओ के साथ मिलकर काम किया था और स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली विकसित की। इसका प्रयोग किया जा चुका है। पूर्वोत्तर रेलवे ने इस प्रणाली से लैस करने के लिए बाराबंकी-गोरखपुर रेलवे ट्रैक का चयन किया था। इंजीनियरों के सर्वे के बाद रेलवे बोर्ड ने पिछले साल ही इस काम को मंजूरी देते हुए 467 करोड़ रुपये का बजट बनाया था। इस काम की शुरुआत करने के लिए इसी साल के आम बजट में सात करोड़ रुपये आवंटित कर दिए थे।
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इस रूट पर लखनऊ से गोरखपुर तक ऑटोमेटिक ब्लॉक सिग्नल सिस्टम लगाया जा रहा है। कार्य शुरू कर दिया गया है। लेकिन ओडिशा में हुए भीषण ट्रेन हादसे के कारण इस कार्य को तेज कर दिया गया है। इसके प्रभावी होने के बाद हादसे की संभावनाएं बनते ही पांच किलोमीटर के दायरे में सभी ट्रेन रुक जाएंगी। इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि ट्रेनें दो स्टेशनों के बीच भी आगे-पीछे चल सकेंगी, मगर हादसे का खतरा नहीं रहेगा। बाराबंकी रेलवे स्टेशन के अधीक्षक पियूष वर्मा ने बताया कि बाराबंकी से गोरखपुर तक संचालित होने वाली 50 से 60 ट्रेनों को यह कवच मिल सकेगा।
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माइक्रो प्रोसेसर के जरिए ऑडियो-वीडियो करेंगे अलर्ट
स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली (कवच) में कई प्रकार की विश्वसनीय तकनीक का प्रयोग होगा। रेल अधिकारियों के अनुसार ये सिस्टम माइक्रो प्रोसेसर, ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम और रेडियो संचार से जुड़ा रहेगा। यह लोकोमोटिव तथा सिग्नलिंग सिस्टम के साथ-साथ पटरियों में भी प्रभावी रहेगा। इससे लोको पायलट की गतिविधियों की निगरानी होगी। ट्रेनों में टक्कर होने से पहले ही ऑडियो-वीडियो द्वारा अलर्ट कर दिया जाएगा। एक ट्रैक पर होने के बाद भी ट्रेनों में स्वत: ब्रेक लग जाएगी। खास बात यह होगी कि पांच किलोमीटर तक सभी ट्रेनों का संचालन बंद हो जाएगा।