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परिषदीय विद्यालयों में एमडीएम बनना हुआ ठप, नहीं मिला राशन
Updated Fri, 03 Nov 2017 12:03 AM IST
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राशन नहीं मिलने से परिषदीय स्कूलों में भूखे पेट पढ़ रहे बच्चे
बाराबंकी। बेसिक शिक्षा विभाग व विपणन विभाग के आपसी टकराव के चलते परिषदीय स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले एमडीएम का राशन नहीं उठ सका है। अक्तूबर व नवंबर का राशन एक साथ मिलने की आस में कोटेदार व प्रधान अपने पास से स्कूलों को आपूर्ति करते रहे। 23 अक्तूबर को हुए उठान में एमडीएम का राशन न मिलने पर स्कूलों में एमडीएम पूरी तरह से ठप हो गया।
जिले में 3071 परिषदीय स्कूलों में 324483 बच्चों का पंजीकरण है। एमडीएम के लिए उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 1265.85 व प्राथमिक विद्यालयों में 2164.36 क्विंटल राशन प्रतिमाह खपत होता है। राशन की उठान माह की 23-30 तारीख को कोटेदारों के माध्यम से स्कूलों को दिए जाने का प्राविधान है। बजट न मिलने पर एफसीआई द्वारा विपणन विभाग को आरओ जारी नहीं किया गया, जिससे अक्तूबर व नवंबर माह के एमडीएम का राशन नहीं मिल सका। राशन आने की उम्मीद में अब तक कोटेदार व प्रधानों द्वारा अपने पास से किसी तरह से खाना बनवाया जा रहा था। 23 तारीख बीत जाने के बाद भी अक्तूबर छोड़ नवंबर माह का राशन भी न मिलने पर कोटेदारों ने स्कूलों को राशन देने से मना कर दिया। 23 अक्तूबर के बाद से स्कूलों में एमडीएम पूरी तरह से ठप हो गया। बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा राशन आवंटन के लिए एफसीआई को बजट भेजने की बात कही जा रही है, तो खाद्य एवं विपणन विभाग द्वारा एफसीआई से बिना आरओ मिले राशन न देने की बात कही जा रही है। दोनों विभागों के आपसी टकराव में स्कूली बच्चे भूखे पेट पढ़ाई करने को मजबूर हैं। हैदरगढ़ ब्लॉक के पूर्व माध्यमिक विद्यालय चकौरा, प्राथमिक विद्यालय सरांय चौबे, हरख ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय अतरौली आदि स्कूलों में एक माह से बच्चे भूखे पेट पढ़ाई कर रहे हैं।
बीएसए पीएन सिंह का कहना है कि, भारतीय खाद्य निगम को बजट भेजा जा चुका है। विपणन कार्यालय से राशन एसएमआई को स्कूलों तक भेजवाना चाहिए था, पर वहां से अभी तक राशन नहीं भेजा गया है। जिससे एमडीएम प्रभावित है।
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बाराबंकी। बेसिक शिक्षा विभाग व विपणन विभाग के आपसी टकराव के चलते परिषदीय स्कूलों में बच्चों को मिलने वाले एमडीएम का राशन नहीं उठ सका है। अक्तूबर व नवंबर का राशन एक साथ मिलने की आस में कोटेदार व प्रधान अपने पास से स्कूलों को आपूर्ति करते रहे। 23 अक्तूबर को हुए उठान में एमडीएम का राशन न मिलने पर स्कूलों में एमडीएम पूरी तरह से ठप हो गया।
जिले में 3071 परिषदीय स्कूलों में 324483 बच्चों का पंजीकरण है। एमडीएम के लिए उच्च प्राथमिक विद्यालयों में 1265.85 व प्राथमिक विद्यालयों में 2164.36 क्विंटल राशन प्रतिमाह खपत होता है। राशन की उठान माह की 23-30 तारीख को कोटेदारों के माध्यम से स्कूलों को दिए जाने का प्राविधान है। बजट न मिलने पर एफसीआई द्वारा विपणन विभाग को आरओ जारी नहीं किया गया, जिससे अक्तूबर व नवंबर माह के एमडीएम का राशन नहीं मिल सका। राशन आने की उम्मीद में अब तक कोटेदार व प्रधानों द्वारा अपने पास से किसी तरह से खाना बनवाया जा रहा था। 23 तारीख बीत जाने के बाद भी अक्तूबर छोड़ नवंबर माह का राशन भी न मिलने पर कोटेदारों ने स्कूलों को राशन देने से मना कर दिया। 23 अक्तूबर के बाद से स्कूलों में एमडीएम पूरी तरह से ठप हो गया। बेसिक शिक्षा विभाग द्वारा राशन आवंटन के लिए एफसीआई को बजट भेजने की बात कही जा रही है, तो खाद्य एवं विपणन विभाग द्वारा एफसीआई से बिना आरओ मिले राशन न देने की बात कही जा रही है। दोनों विभागों के आपसी टकराव में स्कूली बच्चे भूखे पेट पढ़ाई करने को मजबूर हैं। हैदरगढ़ ब्लॉक के पूर्व माध्यमिक विद्यालय चकौरा, प्राथमिक विद्यालय सरांय चौबे, हरख ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय अतरौली आदि स्कूलों में एक माह से बच्चे भूखे पेट पढ़ाई कर रहे हैं।
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बीएसए पीएन सिंह का कहना है कि, भारतीय खाद्य निगम को बजट भेजा जा चुका है। विपणन कार्यालय से राशन एसएमआई को स्कूलों तक भेजवाना चाहिए था, पर वहां से अभी तक राशन नहीं भेजा गया है। जिससे एमडीएम प्रभावित है।
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