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ग्राम प्रधान व प्रधानाध्यापकों से पोषाहार वितरण कराने की तैयारी
Updated Fri, 15 Dec 2017 01:34 AM IST
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ग्राम प्रधान व प्रधानाध्यापकों से पोषाहार वितरण कराने की तैयारी
- ग्राम स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस पर कराया जाएगा वितरण
- आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के धरने का पड़ा बुरा असर
अमर उजाला ब्यूरो
बाराबंकी। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर बाल एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा संचालित योजनाओं पर पड़ रहा है। जिसको देखते हुए निदेशालय द्वारा हर हाल में पोषाहार वितरण कराने की नई रणनीति तैयार की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि बैठक में ग्राम प्रधान व प्रधानाध्यापकों से पोषाहार वितरण कराए जाने की तैयारी की जा रही है।
जिले में बाल एंव पुष्टाहार विभाग द्वारा संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों पर 3054 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की तैनाती है। करीब दो माह से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता 13 सूत्री मांगों कोे लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। जिससे विभाग केंद्रों पर पंजीकत 3.94 लाख नौनिहालों को पोषाहार न मिलने से इनमें कुपोषण बढ़ने लगा है। वहीं गर्भवती व धात्री महिलाओं के स्वास्थ्य की देखभाल व्यापक स्तर पर प्रभावित हो रही है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की हड़ताल को देखते हुए विभाग दो माह से पोषाहर की आपूर्ति रोक दी। सुपरवाइजरों की मानीटरिंग रिपोर्ट के आधार पर 0-5 साल तक के बच्चों व गर्भवती महिलाओं में कुपोषण बढ़ना पाया गया। जिसको देखते हुए दो दिन पूर्व शासन स्तर पर हुई बैठक में इससे निपटने के लिए रणनीति तैयार की गई। बैठक में ग्राम स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस पर ग्राम प्रधान व सरकारी स्कूल के प्रधानाध्यापक से पोषाहार वितरण कराने की तैयारी की को अंतिम रूप देने में अधिकारी लगे रहे।
बाक्स-
हड़ताल का विभाग पर पड़ा 65 प्रतिशत असर
बाल एवं पोषाहार विभाग द्वारा संचालित योजनाओं के क्रियांवयन कराने में प्रदेश की रैंकिंग में दूसरा स्थान रखने वाला बाराबंकी जिला टाप टेन से बाहर हो गया। अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में सबसे ज्यादा हड़ताल जिले की कार्यकर्ताओं के करने से यह क्षति हुई है। अगर जल्द ही इनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो भयावह स्थित उत्पन्न हो जाएगी।
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वर्जन-
बुधवार को शासन स्तर पर हुई बैठक में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के धरने को देखते हुए पोषाहार वितरण कराने की अलग रणनीति तैयार की गई। इसमें ग्राम प्रधान व प्रधानाध्यापकों के माध्यम से पोषाहार वितरण कराए जाने की तैयारी की जा रही है। हड़ताल से विभाग पर 65 प्रतिशत बुरा असर पड़ा है।
- प्रकाश कुमार चौरसिया, डीपीओ
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- ग्राम स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस पर कराया जाएगा वितरण
- आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के धरने का पड़ा बुरा असर
अमर उजाला ब्यूरो
बाराबंकी। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के अनिश्चितकालीन हड़ताल का असर बाल एवं पुष्टाहार विभाग द्वारा संचालित योजनाओं पर पड़ रहा है। जिसको देखते हुए निदेशालय द्वारा हर हाल में पोषाहार वितरण कराने की नई रणनीति तैयार की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि बैठक में ग्राम प्रधान व प्रधानाध्यापकों से पोषाहार वितरण कराए जाने की तैयारी की जा रही है।
जिले में बाल एंव पुष्टाहार विभाग द्वारा संचालित आंगनबाड़ी केंद्रों पर 3054 आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की तैनाती है। करीब दो माह से आंगनबाड़ी कार्यकर्ता 13 सूत्री मांगों कोे लेकर अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। जिससे विभाग केंद्रों पर पंजीकत 3.94 लाख नौनिहालों को पोषाहार न मिलने से इनमें कुपोषण बढ़ने लगा है। वहीं गर्भवती व धात्री महिलाओं के स्वास्थ्य की देखभाल व्यापक स्तर पर प्रभावित हो रही है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की हड़ताल को देखते हुए विभाग दो माह से पोषाहर की आपूर्ति रोक दी। सुपरवाइजरों की मानीटरिंग रिपोर्ट के आधार पर 0-5 साल तक के बच्चों व गर्भवती महिलाओं में कुपोषण बढ़ना पाया गया। जिसको देखते हुए दो दिन पूर्व शासन स्तर पर हुई बैठक में इससे निपटने के लिए रणनीति तैयार की गई। बैठक में ग्राम स्वास्थ्य एवं पोषण दिवस पर ग्राम प्रधान व सरकारी स्कूल के प्रधानाध्यापक से पोषाहार वितरण कराने की तैयारी की को अंतिम रूप देने में अधिकारी लगे रहे।
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बाक्स-
हड़ताल का विभाग पर पड़ा 65 प्रतिशत असर
बाल एवं पोषाहार विभाग द्वारा संचालित योजनाओं के क्रियांवयन कराने में प्रदेश की रैंकिंग में दूसरा स्थान रखने वाला बाराबंकी जिला टाप टेन से बाहर हो गया। अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश में सबसे ज्यादा हड़ताल जिले की कार्यकर्ताओं के करने से यह क्षति हुई है। अगर जल्द ही इनकी मांगों पर विचार नहीं किया गया तो भयावह स्थित उत्पन्न हो जाएगी।
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वर्जन-
बुधवार को शासन स्तर पर हुई बैठक में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के धरने को देखते हुए पोषाहार वितरण कराने की अलग रणनीति तैयार की गई। इसमें ग्राम प्रधान व प्रधानाध्यापकों के माध्यम से पोषाहार वितरण कराए जाने की तैयारी की जा रही है। हड़ताल से विभाग पर 65 प्रतिशत बुरा असर पड़ा है।
- प्रकाश कुमार चौरसिया, डीपीओ