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Barabanki News: आएससीआर का हिस्सा बनेंगे बाराबंकी के 234 गांव
Wed, 06 Mar 2024 01:35 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Wed, 06 Mar 2024 01:35 AM IST
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बाराबंकी। आजादी के बाद जिले के विकास और कायाकल्प की सबसे बड़ी पहल हुई है। छह जिलों को मिलाकर बनाए जा रहे राज्य राजधानी क्षेत्र (एससीआर) में बाराबंकी के 234 गांव भी शामिल होंगे। मंगलवार को लखनऊ में हुई कैबिनेट की बैठक में इस प्रस्ताव पर मुहर लग जाने के बाद एससीआर के गठन को लेकर चल रहीं चर्चाओं पर विराम लग गया है। एससीआर के बाद डिवाइडर वाली चमचमाती सड़कें, मेट्रो परियोजना, औद्योगिक गलियारा, विभिन्न प्रकार के उद्योगों की सौगात ही नहीं मिलेगी, बल्कि सुनियोजित विकास होगा। एससीआर में बाराबंकी की करीब आठ लाख की आबादी समाहित होगी, जिसका असर पूरे जिले पर पड़ेगा।
एनसीआर की तर्ज पर एससीआर बनाने की कवायद दो साल से चल रही है। नवंबर 2023 में योगी सरकार ने राज्य राजधानी क्षेत्र और अन्य क्षेत्र प्राधिकरण विधेयक 2023 का ड्राफ्ट तैयार किया था। एससीआर में बाराबंकी जिले के 234 गांव शामिल करने का प्रस्ताव बनाकर अधिसूचना जारी हुई थी। ये गांव बंकी, देवा, हरख और निंदूरा ब्लाकों के हैं। इनका कुल क्षेत्रफल 57828.10 हेक्टेयर है।
इसे लेकर इस पर लोगों से ऑनलाइन सुझाव मांगे गए थे। बाराबंकी से भी लोगों ने एससीआर के गठन को लेकर सुझाव और सहमति दी थी। इसके बाद एससीआर के गठन का रास्ता साफ हो गया। साफ जाहिर है कि अब 234 गांव शहर बन जाएंगे। चूंकि एससीआर के सभी छह जिलों को मेट्रो ट्रेन व परिवहन की अन्य सुविधाओं से जोड़ा जाएगा, इसलिए बाराबंकी को भी मेट्रो की सौगात मिलेगी। इसके साथ यहां औद्योगिक गलियारा भी बनाने की योजना है।
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इससे शहर ही नहीं, गांव भी चमचमाती सड़कों से जुड़ेंगे और कॉलेज, सामुदायिक केंद्र, पुस्तकालय, ऑडिटोरियम आदि का निर्माण कराया जाएगा। इसमें उत्तर प्रदेश सरकार 40 फीसदी सहयोग प्रदान करेगी। बाराबंकी लखनऊ सीमा पर हो रही अनियमित प्लॉटिंग पर रोक लगेगी और संयोजित विकास का रास्ता साफ होगा। एक अधिकारी के मुताबिक 234 गांवों की जमीन कई गुनी महंगी हो जाएगी। किसानों से अनुबंध के माध्यम से जमीनी ली जाएगी और उनके पुनर्वास का प्रबंध भी होगा, इसके लिए उन्हें उचित मुआवजा दिया जाएगा। एसडीएम सदर विजय कुमार त्रिवेदी का कहना है कि एससीआर के बाद जिले का सुनियोजित विकास होगा। इसका लाभ पूरे जिले की जनता को मिलेगा।
बनेगी एक नियमावली, मगर रहेगा विनियमित क्षेत्र
एससीआर में रहने वाले लोगों के लिए एक नियमावली बनाई जाएगी। इसी के तहत विकास किया जाएगा। पूरे क्षेत्र की मैपिंग होगी। नाला-नाली निर्माण से लेकर सड़क बनाने तक के लिए जांच की प्रक्रिया से गुजरना होगा। आवासीय और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तथा जमीनों के लिए कर का निर्धारण भी अलग से होगा। एसडीएम सदर का कहना है कि एससीआर बनने के बाद भी विनियमित क्षेत्र का अस्तित्व रहने की पूरी उम्मीद है।
तीरगांव से लेकर रेंदुआ पल्हरी तक होगा कायाकल्प
एससीआर के गठन में जहां हरक ब्लॉक का अंतिम छोर पर बसा तीरगांव भी शामिल होगा, वहीं लखनऊ की सीमा को छूता रेंदुआ पल्हरी भी इसका हिस्सा होगा। सराय परसंडा से लेकर देवा के उमरी, रीवा तक इसमें शामिल हैं।
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एनसीआर की तर्ज पर एससीआर बनाने की कवायद दो साल से चल रही है। नवंबर 2023 में योगी सरकार ने राज्य राजधानी क्षेत्र और अन्य क्षेत्र प्राधिकरण विधेयक 2023 का ड्राफ्ट तैयार किया था। एससीआर में बाराबंकी जिले के 234 गांव शामिल करने का प्रस्ताव बनाकर अधिसूचना जारी हुई थी। ये गांव बंकी, देवा, हरख और निंदूरा ब्लाकों के हैं। इनका कुल क्षेत्रफल 57828.10 हेक्टेयर है।
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इसे लेकर इस पर लोगों से ऑनलाइन सुझाव मांगे गए थे। बाराबंकी से भी लोगों ने एससीआर के गठन को लेकर सुझाव और सहमति दी थी। इसके बाद एससीआर के गठन का रास्ता साफ हो गया। साफ जाहिर है कि अब 234 गांव शहर बन जाएंगे। चूंकि एससीआर के सभी छह जिलों को मेट्रो ट्रेन व परिवहन की अन्य सुविधाओं से जोड़ा जाएगा, इसलिए बाराबंकी को भी मेट्रो की सौगात मिलेगी। इसके साथ यहां औद्योगिक गलियारा भी बनाने की योजना है।
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इससे शहर ही नहीं, गांव भी चमचमाती सड़कों से जुड़ेंगे और कॉलेज, सामुदायिक केंद्र, पुस्तकालय, ऑडिटोरियम आदि का निर्माण कराया जाएगा। इसमें उत्तर प्रदेश सरकार 40 फीसदी सहयोग प्रदान करेगी। बाराबंकी लखनऊ सीमा पर हो रही अनियमित प्लॉटिंग पर रोक लगेगी और संयोजित विकास का रास्ता साफ होगा। एक अधिकारी के मुताबिक 234 गांवों की जमीन कई गुनी महंगी हो जाएगी। किसानों से अनुबंध के माध्यम से जमीनी ली जाएगी और उनके पुनर्वास का प्रबंध भी होगा, इसके लिए उन्हें उचित मुआवजा दिया जाएगा। एसडीएम सदर विजय कुमार त्रिवेदी का कहना है कि एससीआर के बाद जिले का सुनियोजित विकास होगा। इसका लाभ पूरे जिले की जनता को मिलेगा।
बनेगी एक नियमावली, मगर रहेगा विनियमित क्षेत्र
एससीआर में रहने वाले लोगों के लिए एक नियमावली बनाई जाएगी। इसी के तहत विकास किया जाएगा। पूरे क्षेत्र की मैपिंग होगी। नाला-नाली निर्माण से लेकर सड़क बनाने तक के लिए जांच की प्रक्रिया से गुजरना होगा। आवासीय और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों तथा जमीनों के लिए कर का निर्धारण भी अलग से होगा। एसडीएम सदर का कहना है कि एससीआर बनने के बाद भी विनियमित क्षेत्र का अस्तित्व रहने की पूरी उम्मीद है।
तीरगांव से लेकर रेंदुआ पल्हरी तक होगा कायाकल्प
एससीआर के गठन में जहां हरक ब्लॉक का अंतिम छोर पर बसा तीरगांव भी शामिल होगा, वहीं लखनऊ की सीमा को छूता रेंदुआ पल्हरी भी इसका हिस्सा होगा। सराय परसंडा से लेकर देवा के उमरी, रीवा तक इसमें शामिल हैं।