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Barabanki News: उच्च जोखिम श्रेणी में 1553 गर्भवती, देवा में खतरा ज्यादा
Sat, 21 Sep 2024 05:31 AM IST
लखनऊ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
संवाद न्यूज एजेंसी, बाराबंकी
Updated Sat, 21 Sep 2024 05:31 AM IST
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बाराबंकी। खून की कमी व ब्लड प्रेशर से लेकर अन्य गंभीर बीमारियों से पीड़ित 1553 गर्भवती महिलाएं हाई रिस्क श्रेणी में चिह्नित की गई हैं। इसमें देवा की गर्भवतियों में खतरा सबसे ज्यादा है। यह खुलासा प्रतिमाह सीएचसी पर लगने वाले शिविरों में हुई जांच में हुआ है।
जच्चा-बच्चा की सेहत को लेकर स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर संचालित विभिन्न योजनाओं के बावजूद जिले में हाई रिस्क श्रेणी में मिली गर्भवती की संख्याओं ने जिम्मेदारों की परेशानी बढ़ा दी है। इससे निबटने के लिए विभागीय स्तर पर विशेष जागरूकता अभियान के साथ ही आशाओं को जिम्मेदारी भी बढ़ा दी गई है। निर्देशित किया गया है कि हाई रिस्क श्रेणी में चिह्नित गर्भवती की नियमित तौर पर निगरानी कर उनके इलाज का प्रबंधन सीएचसी और जिला महिला अस्पताल में प्राथमिकता पर कराया जाए।
जिले के 15 में से पांच ब्लॉकों में हाई रिस्क श्रेणी में चिह्नित गर्भवतियों की स्थिति सबसे खराब है। इन ब्लॉक क्षेत्रों में 959 हाई रिस्क गर्भवती सामने आई हैं। इनमें देवा में सबसे ज्यादा 299, रामनगर में 208, सिद्धौर में 194, दरियाबाद में 141 तथा बंकी में 117 मामले शामिल हैं। जांच के दौरान इन गर्भवतियों में ब्लड प्रेशर, खून की कमी, गर्भ में बच्चा तिरछा होने सहित कई प्रकार की परेशानी सामने आई। सीएमओ डॉ. अवधेश कुमार यादव ने बताया कि ऐसी गर्भवतियों को चिह्नित कर उनके स्वास्थ्य की विशेष निगरानी की जा रही है।
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प्रत्येक सीएचसी पर माह में 1, 9 , 16 और 24 तारीख को चार शिविर आयोजित किए जाते हैं। जिसमें आशा इन गर्भवती महिलाओं को लेकर आती है और इनकी सेहत की जांच कराती है। इस दौरान इनकी सभी प्रकार की जांचे और अल्ट्रासाउंड तक मुफ्त कराए जाते हैं। जांच के बाद यदि इनमें कोई बीमारी पाई जाती है तो काउंसलिंग के बाद उन्हें सीएचसी और जिला अस्पताल में भर्ती कर इलाज भी कराया जाता है।
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जच्चा-बच्चा की सेहत को लेकर स्वास्थ्य विभाग के स्तर पर संचालित विभिन्न योजनाओं के बावजूद जिले में हाई रिस्क श्रेणी में मिली गर्भवती की संख्याओं ने जिम्मेदारों की परेशानी बढ़ा दी है। इससे निबटने के लिए विभागीय स्तर पर विशेष जागरूकता अभियान के साथ ही आशाओं को जिम्मेदारी भी बढ़ा दी गई है। निर्देशित किया गया है कि हाई रिस्क श्रेणी में चिह्नित गर्भवती की नियमित तौर पर निगरानी कर उनके इलाज का प्रबंधन सीएचसी और जिला महिला अस्पताल में प्राथमिकता पर कराया जाए।
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जिले के 15 में से पांच ब्लॉकों में हाई रिस्क श्रेणी में चिह्नित गर्भवतियों की स्थिति सबसे खराब है। इन ब्लॉक क्षेत्रों में 959 हाई रिस्क गर्भवती सामने आई हैं। इनमें देवा में सबसे ज्यादा 299, रामनगर में 208, सिद्धौर में 194, दरियाबाद में 141 तथा बंकी में 117 मामले शामिल हैं। जांच के दौरान इन गर्भवतियों में ब्लड प्रेशर, खून की कमी, गर्भ में बच्चा तिरछा होने सहित कई प्रकार की परेशानी सामने आई। सीएमओ डॉ. अवधेश कुमार यादव ने बताया कि ऐसी गर्भवतियों को चिह्नित कर उनके स्वास्थ्य की विशेष निगरानी की जा रही है।
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प्रत्येक सीएचसी पर माह में 1, 9 , 16 और 24 तारीख को चार शिविर आयोजित किए जाते हैं। जिसमें आशा इन गर्भवती महिलाओं को लेकर आती है और इनकी सेहत की जांच कराती है। इस दौरान इनकी सभी प्रकार की जांचे और अल्ट्रासाउंड तक मुफ्त कराए जाते हैं। जांच के बाद यदि इनमें कोई बीमारी पाई जाती है तो काउंसलिंग के बाद उन्हें सीएचसी और जिला अस्पताल में भर्ती कर इलाज भी कराया जाता है।