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घाघरा ने मारी पलटी, खतरे के निशान के पहुंची करीब
Updated Thu, 20 Jul 2017 01:19 AM IST
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घाघरा ने फिर तेज की कटान, सहमे लोग
खतरे के निशान से तीन सेंटीमीटर नीचे बह रही नदी
अमर उजाला ब्यूरो
बाराबंकी। घाघरा ने एक बार फिर पलटी मारी है। बुधवार को घाघरा का जलस्तर खतरे के निशान को छूने को बेताब दिखा। घाघरा के उतार चढ़ाव को लेकर तराई में कटान होने लगी। रामसनेहीघाट के गढ़ी गांव के पास खेतों में तेजी से कटान होने से ग्रामीण भी सहमे हैं।
बुधवार को एल्गिन ब्रिज पर घाघरा का जलस्तर 106.046 रहा, जो खतरे के निशान से तीन सेंटीमीटर नीचे था। बुधवार को बारिश होने से बंधे पर रहे सिरौलीगौसपुर व रामसनेहीघाट तहसील के नाउनपुरवा, चरपुरवा, बेहटा, रायपुर मांझा, परसावल के बाढ़ पीड़ितों को काफी दिक्कतें हुई। झोपड़ी व तिरपाल के नीचे पहुंची बौछारों ने उनकी मुसीबतें और बढ़ी दी है। मगर, घाघरा का जलस्तर कम होने के बाद अधिकारियों ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में दौरा नहीं किया। जिसको लेकर राहत केंद्र व बाढ़ चौकी पर तैनात कर्मचारी भी गायब हो गए। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में बीमार लोगों को निजी चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी अधिकारियों के न आने के बाद ड्यूटी स्थल से नदारद है। एडीएम अनिल कुमार सिंह ने बताया कि घाघरा का जलस्तर घटने-बढ़ने से कटान हो रही है। मगर, इससे तराई के लोगों को कोई खतरा नहीं है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में लगे अधिकारी व कर्मचारी अगर ड्यूटी स्थल से गायब मिले तो कार्रवाई की जाएगी।
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खतरे के निशान से तीन सेंटीमीटर नीचे बह रही नदी
अमर उजाला ब्यूरो
बाराबंकी। घाघरा ने एक बार फिर पलटी मारी है। बुधवार को घाघरा का जलस्तर खतरे के निशान को छूने को बेताब दिखा। घाघरा के उतार चढ़ाव को लेकर तराई में कटान होने लगी। रामसनेहीघाट के गढ़ी गांव के पास खेतों में तेजी से कटान होने से ग्रामीण भी सहमे हैं।
बुधवार को एल्गिन ब्रिज पर घाघरा का जलस्तर 106.046 रहा, जो खतरे के निशान से तीन सेंटीमीटर नीचे था। बुधवार को बारिश होने से बंधे पर रहे सिरौलीगौसपुर व रामसनेहीघाट तहसील के नाउनपुरवा, चरपुरवा, बेहटा, रायपुर मांझा, परसावल के बाढ़ पीड़ितों को काफी दिक्कतें हुई। झोपड़ी व तिरपाल के नीचे पहुंची बौछारों ने उनकी मुसीबतें और बढ़ी दी है। मगर, घाघरा का जलस्तर कम होने के बाद अधिकारियों ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में दौरा नहीं किया। जिसको लेकर राहत केंद्र व बाढ़ चौकी पर तैनात कर्मचारी भी गायब हो गए। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में बीमार लोगों को निजी चिकित्सकों का सहारा लेना पड़ा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी अधिकारियों के न आने के बाद ड्यूटी स्थल से नदारद है। एडीएम अनिल कुमार सिंह ने बताया कि घाघरा का जलस्तर घटने-बढ़ने से कटान हो रही है। मगर, इससे तराई के लोगों को कोई खतरा नहीं है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में लगे अधिकारी व कर्मचारी अगर ड्यूटी स्थल से गायब मिले तो कार्रवाई की जाएगी।
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