फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Barabanki News ›   बाढ़ से निपटने के लिए कागजों पर दौड़ाए जा रहे घोड़े

बाढ़ से निपटने के लिए कागजों पर दौड़ाए जा रहे घोड़े

Mon, 03 Jul 2017 01:47 AM IST
Updated Mon, 03 Jul 2017 01:47 AM IST
विज्ञापन
बाढ़ से निपटने के लिए कागजों पर दौड़ाए जा रहे घोड़े
घाघरा ने बांध को छुआ, मंडराया खतरा
विज्ञापन

प्रशासन ने अभी तक नहीं की नावों की व्यवस्था, बाढ़ चौकियों से भी कर्मचारी नदारद
अमर उजाला ब्यूरो
बाराबंकी। जिले के तराई क्षेत्र के पौने दो सौ गांवों में हर साल तबाही मचाने वाली घाघरा एक बार फिर अपना रौद्र रूप दिखाने के संकेत दे रही है। नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। बारिश ने खतरे को और बढ़ा दिया है। घाघरा का पानी बांध तक पहुंच चुका है। लगातार जलस्तर बढ़ने से आसपास के गांवों पर खतरा मंडराने लगा है। जिला प्रशासन व बाढ़ सिर्फ कागजी घोड़े दौड़ा रहा है। अभी तक नावों के खरीदने, बाढ़ चौकियों पर कर्मचारियों की तैनाती से लेकर तटबंधों की मरम्मत के सिर्फ इंतजाम ही किए जा रहे है। बाढ़ मंत्री स्वाती सिंह रविवार को जायजा लेने के लिए आने वाली थी पर एन वक्त पर उनका कार्यक्रम टल गया।
रविवार को घाघरा का जलस्तर 104.266 रहा। जो खतरे के निशान से करीब दो मीटर कम है। जिले में हर वर्ष बाढ़ से चार तहसीलों के करीब पौने दो सौ गांव प्रभावित होते है। रामनगर तहसील के 34, रामसनेहीघाट के 36, फतेहपुर के 25 व सिरौलीगौसपुर के 34 गांवों में बाढ़ हर वर्ष तबाही मचाती है। अन्य गांवों में लोगों को महीनों अपना घर छोड़कर खुले आसमान के नीचे जीवन यापन करना पड़ता है। इससे निपटने के लिए प्रति वर्ष दावे दर दावे किए जाते है पर बाढ़ के साथ दावे भी बह जाते है। प्रशासन का दावा है कि बाढ़ से निपटने के लिए 15 बाढ़ चौकियां बनाई गई है। जिनमें रामसनेहीघाट व फतेहुपर में 3-3, रामनगर में 4 व सिरौलीगौसपुर में 5 बाढ़ चौकियां है। मगर अभी बाढ़ चौकी व राहत शिविर में एक भी कर्मचारी की तैनाती नहीं हो सकी है।
विज्ञापन


नहीं पहुंची मंत्री, अधिकारियों ने ली राहत
बाढ़ राज्य मंत्री स्वाती सिंह के चरसढ़ी बांध के निरीक्षण को लेकर रविवार सुबह से सक्रिय जिले के आला अफसरों ने राज्यमंत्री के प्रोग्राम के निरस्त होने की खबर से राहत की सांस ली। इस बीच कई जिम्मेदार अधिकारी राजधानी निकल गए। जिस तरह से घाघरा का जलस्तर बढ़ रहा है। उससे गांवों में पानी घुसने का खतरा मंडराने लगा है। दो दिनों में करीब चार दर्जन गांव जो घाघरा के मुहाने पर हैं, उनमें बाढ़ आ जायेगी। नदी में पानी लगातार बढ़ने से घाघरा का पानी भूमि को काटता हुआ बांध के समीप आ चुका है। अब वह बांध को पार कर गांवों में घुसने को बेताब है। जिसको लेकर ग्रामीणों की धड़कने बढ़ने लगी हैं। प्रशासन महज बाढ़ से निपटने की योजना बनाकर फाइलों में बाढ़ से निपटने की तैयारी में हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन


कम पड़ने पर फैजाबाद से आएंगी नाव
फतेहपुर के एसडीएम संतोष कुमार ने बताया कि पुरानी नावों की मरम्मत कराने के निर्देश दिए गए है। नई नावों के खरीदने का स्टीमेट तैयार किया जा रहा है। बाढ़ चौकियों पर कर्मचारियों की तैनाती कर दी गई है। रामसनेहीघाट के एसडीएम राहुल यादव ने बताया कि पुरानी नावें गांव में होगी। बाढ़ चौकियों पर कर्मचारियों की ड्यूटी लगा दी गई है। कम पड़ने पर अयोध्या व फैजाबाद से नावें मंगा ली जाएगी। एसडीएम सिरौलीगौसपुर सुशील प्रताप सिंह का कहना है कि बाढ़ की तैयारियां पूरी है। नावों कहां से मिलेगी इसे चिंहित कर लिया गया है। एसडीएम रामनगर लव कुमार सिंह ने बताया कि नावों की मरम्मत की जिम्मेदारी ग्राम प्रधानों को दी गई है। बाकी चौकी व बाढ़ राहत शिविर के स्थल चिंहित कर लिए गए है और कर्मचारियों की ड्यूटी भी लगा दी गई है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed