फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Barabanki News ›   1299 child labour are child

1299 बच्चे कर रहे बालश्रम

Fri, 31 Jul 2015 11:08 PM IST
बाराबंकी/अमर उजाला ब्यूरो
बाराबंकी/अमर उजाला ब्यूरो Updated Fri, 31 Jul 2015 11:08 PM IST
विज्ञापन
ग्रेटर नोएडा में बच्चे को यातनाएं देने की वारदात से भी श्रम विभाग सबक नहीं ले रहा। जिले में बाल श्रमिक होटल, ढाबों व खतरनाक उद्योगों में कार्य कर रहे हैं, लेकिन प्रशासन व श्रम विभाग मौन है। श्रम विभाग का तर्क है कि सीमित संसाधन व मैन पॉवर की कमी के चलते गोरखधंधे को रोक पाने में दिक्कत हो रही है। बाल श्रम में लिप्त बच्चों को मुक्त कराने के लिए स्वयं के सीमित संसाधनों के सहारे कैलाश सत्यार्थी ने बेहतर कार्य कर नोबेल पुरस्कार जीता। बावजूद इसके बाल श्रम पर रोक नहीं लगा पाना अधिकारियों की कमजोर इच्छा शक्ति व व्यवस्था की लचर कार्यशैली का उदाहरण है। जिले में बाल श्रमिकों को चिह्नित करने के लिए प्रशासन द्वारा सोशल वर्क
विज्ञापन
विभाग लखनऊ विश्वविद्यालय से सर्वे में सर्वेयर टीम ने विभिन्न ब्लॉकों में 1,299 बाल श्रमिक पाए थे। यह बाल श्रमिक होटल, ढाबों, ईंट भट्टों, ऑटो मोबाइल और जरदोजी के कार्य में लिप्त पाए गए। सर्वे टीम ने यह रिपोर्ट प्रशासन को सौंपी थी। इन बाल श्रमिकों को बाल श्रम से मुक्त कराने के लिए बाल श्रम विद्यालय खोले जाने की योजना थी लेकिन अभी तक विद्यालय नहीं खोले जा सके हैं। इससे चिह्नित किए गए बाल श्रमिक अभी भी उन्हीं कार्यों में लिप्त हैं।

समाजसेवियों को चाय पिलाता है छोटू
नगर के अति व्यस्त बंकी ब्लाक के सामने एक चाय का ठेला लगा था। इस पर एक बच्चा जिसकी उम्र करीब 12 वर्ष होगी लोगों को के  लिए चाय छान रहा था। पूछने पर अपना नाम नहीं बताया। जबकि इस स्थान पर बड़े-बड़े समाजसेवियों का जमावड़ा लगता है।
विज्ञापन


श्रम विभाग के बगल बच्चे धो रहे प्लेट
जनेस्मा कॉलेज गेट के पास छोटू चाय बना रहा है। सुबह से शाम तक यहीं पर रहता है। फोटो खींचे जाने पर होटल मालिक ने एतराज जताना शुरू कर दिया। यह होटल श्रम पिवभाग से महज दो सौ मीटर की दूरी है।
विज्ञापन
विज्ञापन


अनजाने बने रहते हैं सब
बस स्टॉप के पास न्यायालय गेट के पास संचालित होटल पर भी एक करीब 13 साल का बालक कार्य कर रहा था। इस गेट व रोड से कई अधिकारियों का आना जाना होता है लेकिन किसी का ध्यान इन बाल श्रमिकों पर नहीं जाता। विभाग की अनजान बना रहता है।


गलती होने पर जमकर पिटाई
बच्चों को काम पर रखे जाने से होटल मालिकों को काफी बचत होती है। होटल वाले पारिश्रमिक देने के दौरान उम्र के हिसाब से एक हजार व बारह सौ रुपये तक देते हैं लेकिन काम भोर से लेकर रात तक लेते हैं। बच्चे छोटे होने के कारण मना भी नहीं कर पाते हैं। गलती होने पर कई बार पिटाई भी की जाती है।

छापे के नाम पर खानापूर्ति
बाल श्रमिकों को मुक्त कराने के लिए श्रम विभाग है। विभिन्न क्षेत्रों के लिए श्रम प्रवर्तन अधिकारी की तैनाती है। बाल श्रम पर रोक लगाने के लिए पुलिस, स्थानीय प्रशासन व श्रम विभाग के अधिकारियों की टीम बना अभियान चलाकर होटल, ढाबों, ऑटो मोबाइल की दुकानों आदि पर छापा मारा जाना चाहिए। लेकिन तीनों विभागों में सामंजस्य के अभाव में अभियान चल ही नहीं पाते।


श्रम प्रवर्तन अधिकारी घनश्याम वर्मा ने बताया कि बाल श्रमिकों को पहले चिह्नित किया जाता है। इसके बाद पुलिस व स्थानीय प्रशासन की मदद से बच्चों को पकड़ कर संस्थान संचालक के खिलाफ डिप्टी कमिश्नर फैजाबाद को रिपोर्ट भेजी जाती है। जिस पर दुकानदार के खिलाफ आरसी जारी की जाती है। इस वित्तीय वर्ष में अभी तक 6 बाल श्रमिकों को चिह्नित कर उन्हें बाल श्रम से मुक्त कराया गया है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed