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10 करोड़ खर्च फिर भी जीआईटीआई भवन अधूरे

Mon, 11 Oct 2021 12:39 AM IST
Lucknow Bureau लखनऊ ब्यूरो
Updated Mon, 11 Oct 2021 12:39 AM IST
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10 crores spent yet GITI building incomplete
बाराबंकी। युवाओं को रोजगार की मुख्य धारा से जोड़ने के लिए सरकार उन्हें तकनीकी रूप से दक्ष करना चाह रही है। ऐसे में गांव व घर के करीब आईटीआई व कौशल विकास केंद्र हो, इस पर काम कर रही है। इसी के तहत सिरौलीगौसपुर व बनीकोडर ब्लॉक में तकरीबन सात वर्ष पहले जीआईटीआई भवन बनने शुरू हुए।
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10 करोड़ खर्च होने के बावजूद दोनों भवन अधूरे पड़े हैं। ऐसे में हैंडओवर होने से पहले ही दोनों भवन खंडहर हो गए जबकि इन दोनों संस्थानों में पद सृजित होने के साथ ही सीटें भी आवंटित कर दी गई हैं। ऐसे में इनका संचालन 50 से 60 किमी दूर नोडल आईटीआई में किया जा रहा है।
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जिले में सिरौलीगौसपुर ब्लॉक के किंतूर व बनीकोडर ब्लॉक के करौंधिया में वर्ष 2013-14 में अल्प संख्यक विभाग द्वारा जीआईटीआई भवन का निर्माण कराया जाना था। इसका काम कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस (उप्र जल निगम) को दिया गया। इस संस्था ने 498-498 लाख की लागत वाले दोनों जीआईटीआई भवनों का निर्माण शुरू कराया। इसे लेकर क्षेत्र के युवाओं व उनके अभिभावकों में काफी उत्साह दिखा।
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धीरे-धीरे जीआईटीआई के भवन लगभग आधे से ज्यादा बन गए। मगर, समय अधिक होने व महंगाई के कारण धनराशि कम पड़ गई। ऐसे में बिजली व पानी आदि का काम नहीं हो सका। इसे लेकर रिवाइज्ड इस्टीमेट डीएम व अल्पसंख्यक विभाग द्वारा कई बार शासन को भेजा गया। मगर, इस पर कोई स्वीकृत नहीं मिली।
वहीं वर्ष 2017 में शासन ने इन दोनों जीआईटीआई में पद सृजित कर कार्यदेशक, अनुदेशक व बाबू के आठ व नौ के स्टाफ तैनात कर दिए। प्रवेश के लिए चार-चार सौ सीटें भी आवंटित कर दीं।
इसके बाद से ही जिले की तीन राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों की तरह इनमें भी छात्र-छात्राओं को प्रवेश दिया जाने लगा। मगर, भवन अधूरा व हैंडओवर न होने के कारण जहांगीराबाद स्थित नोडल आईटीआई में कक्षाएं संचालित की जाने लगीं। कक्षाएं शुरू हुए धीरे-धीरे पांच वर्ष का समय गुजर गया।
मगर, इन दोनों जीआईटीआई को अपने भवन नसीब न होने से क्षेत्र के युवाओं को कागज पर तो अपने तहसील व ब्लॉक के आईटीआई में प्रवेश मिला लेकिन पढ़ाई करने के लिए 40 से 50 किमी की दूरी तय कर जहांगीराबाद स्थित नोडल आईटीआई जाना पड़ता है। ऐसे में लंबी दूरी होने के कारण काफी सीटें खाली रह जाती हैं।
जिले के सिरौलीगौसपुर व बनीकोडर ब्लॉक में जीआईटीआई भवन का निर्माण कराने वाली कार्यदायी संस्था सीएंडडीएस ने निर्माण कार्य पूरा नहीं किया। वहीं इस संस्था के लापरवाहीपूर्ण कार्यों को लेकर सरकार ने उसको ब्लैकलिस्टेड कर दिया। ऐसे में अधूरे पड़े भवन के चारों ओर झाड़ियां उग आई हैं।

जिलाधिकारी डॉ. आदर्श सिंह ने बताया कि जीआईटीआई भवन के अधूरे निर्माण का मामला संज्ञान में नहीं है। अब संज्ञान में आया है तो इसकी जानकारी की जाएगी। इसके बाद इस संबंध में मेरे स्तर से जो भी संभव होगा, हर संभव प्रयास किए जाएगा।
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