{"_id":"576ecbdf4f1c1ba321b49204","slug":"untouchability-thoughts-of-suicide-mental-illness","type":"story","status":"publish","title_hn":"छुआछूत, आत्महत्या का विचार मानसिक रोग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
छुआछूत, आत्महत्या का विचार मानसिक रोग
ब्यूरो अमर उजाला, बांदा
Updated Sat, 25 Jun 2016 11:52 PM IST
विज्ञापन
राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम में जानकारी देते डॉ. हरदयाल।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बांदा। छुआछूत और आत्महत्या का विचार आना मानसिक रोग के लक्षण हैं। ऐसे विचार आने पर मरीज को डाक्टर से तुरंत मिलना चाहिए। यह जानकारी मनोरोग चिकित्सक डॉ. हरदयाल ने भवानी पुरवा में मानसिक रोग जागरूकता शिविर में दी।
विज्ञापन
राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत शनिवार को आंगनबाड़ी केंद्र, भवानी पुरवा में लगे मानसिक रोग जागरूकता शिविर में मनोरोग विभाग की टीम ने महिलाओं और बच्चों को रोगों की जानकारी और निपटने उपाय बताए।
विज्ञापन
इसके लिए व्यायाम पर भी जोर दिया। साइकोलाजिस्ट डॉ. रिजवाना हाशमी ने कहा कि नकारात्मक सोच, डर, हीनभावना, नींद न आना, शक करना, दौरे आना, जिद, अत्यधिक सफाई आदि मानसिक रोगों के लक्षण हैं। मानीटरिंग आफीसर नरेंद्र कुमार मिश्रा ने कहा मानसिक रोग का इलाज संभव है।
विज्ञापन
लक्षण होने पर तुरंत डाक्टर से मिलें। साइकेट्रिक सोशल वर्कर नंदिनी कुरील ने बच्चों में होने वाले मानसिक रोगों की जानकारी दी। क्लीनिकल नर्स त्रिभुवन नाथ, स्टाफ नर्स कीर्ति प्रभा पाल ने भी जानकारियां दीं। ग्राम प्रधान गुलाब सिंह यादव, आंगनबाड़ी कार्यकत्री शशि कुमारी व उमा देवी सहित तमाम लोग मौजूद रहे।