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यूनिक नंबर न लेने वाले 290 शस्त्र लाइसेंस होंगे निरस्त

Fri, 01 Apr 2016 11:58 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा Updated Fri, 01 Apr 2016 11:58 PM IST
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Unique numbers that do not have 290 arms licenses canceled
पिस्‍टल - फोटो : अमर उजाला
बांदा। शस्त्र लाइसेंस का यूनिक आइडेंटीफिकेशन नंबर न लेने पर जिले के 290 शस्त्र धारकों के लाइसेंस निरस्त करने की कार्रवाई शुरू हो गई है। इनकी सूची तैयार कर नोटिस दी जाएगी। पूरे जनपद में 9638 लाइसेंसी शस्त्र हैं। इनमें 9348 लाइसेंसों का यूनिक नंबर जारी हुआ है।
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प्रदेश सरकार के गृह मंत्रालय ने पिछले वर्ष लाइसेंसी शस्त्र धारक को यूआईएन (यूनिक आइडेंटीफिकेशन नंबर) आवंटित करने का आदेश दिया था। इसके तहत तहसील स्तर पर ऑनलाइन फीडिंग भी हुई। शासन ने पिछले वर्ष एक अक्तूबर तक यूनिक नंबर लेना अनिवार्य किया था।
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इसके बाद तिथियां बढ़ती रहीं। अंतत: 31 मार्च 2016 को अंतिम तिथि खत्म के बाद यूनिक नंबर आवंटित करने का काम खत्म हो गया। शासन ने यूनिक नंबर न लेने वाले शस्त्रधारकों के लाइसेंस खारिज करने के निर्देश दिए हैं। इसके दायरे में 290 शस्त्र लाइसेंस हैं। इन शस्त्रधारकों ने यूनिक नंबर फीड नहीं कराया है। इनके शस्त्र अब अवैध माने जाएंगे। कलेक्ट्रेट स्थित शस्त्र अनुभाग में इन लाइसेंस धारकों की सूची तैयार की जा रही है।
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प्रभारी अधिकारी शस्त्र और एडीएम डीएस पांडेय ने बताया कि यूनिक नंबर आवेदन के लिए शस्त्र धारकों को दो बार नोटिसें जारी की जा चुकी हैं। अंतिम तिथि बीत जाने के बाद शस्त्र लाइसेंस निरस्त माने जा रहे हैं। ऐसे शस्त्र धारकों को फिर मौका देना या न देना शासन का काम है। ऐसे लाइसेंस धारक अपना शस्त्र तत्काल जमा कर दें। फिलहाल तिथि बढ़ाने का कोई आदेश नहीं आया है।

एक्ट में निरस्तीकरण का प्रावधान नहीं
बांदा। कानून के जानकार यूनिक नंबर न लेने पर शस्त्र लाइसेंस का निरस्तीकरण आसान नहीं मानते। फौजदारी के वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक दीक्षित का कहना है कि शस्त्र लाइसेंस आर्म्स एक्ट से जारी होता है। इस एक्ट में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है कि यूनिक नंबर न होने पर लाइसेंस निरस्त कर दिए जाए।

अगर कोई शस्त्र धारक किन्हीं कारणों से यूनिक नंबर नहीं ले पाया है तो पहले उसे कानूनी नोटिस दी जाए। वह अपनी मजबूरी या सफाई हलफनामा देकर बताएगा। उसके बाद उसे यूनिक नंबर दिया जाना चाहिए। सिर्फ यूनिक नंबर को आधार बनाकर शस्त्र लाइसेंस निरस्त किया जाना मौलिक अधिकारों का हनन है। इसमें उच्च न्यायालय में रिट भी दायर की जा सकती है।


साल भर में कम हो गए 1791 लाइसेंस
बांदा। यह पहला अवसर है कि शस्त्र लाइसेंसों की संख्या बढ़ने के बजाय घटी है। नए बने नहीं। पुराने में डेढ़ हजार से ज्यादा लाइसेंस रद्द हो गए। पिछले वर्ष 2015 में जनपद में शस्त्र लाइसेंसों की संख्या 11,429 थी। अब यह घटकर 9638 रह गई है। यानी एक वर्ष में 1791 लाइसेंस कम हो गए। इनमें लगभग 1134 शस्त्र धारकों की मृत्यु हो गई है। 378 शस्त्र धारक तबादले पर बाहर चले गए। 279 ने अपने लाइसेंस किसी कारणों से खुद निरस्त करा लिए।
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