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Banda News: मेडिकल कॉलेज व विश्वविद्यालय की कैंटीन में दो दिन का ईंधन

Fri, 13 Mar 2026 12:00 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा Updated Fri, 13 Mar 2026 12:00 AM IST
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Two days' fuel in the canteen of the medical college and university
फोटो- 12 पंजाबी टिफिन सेंटर में मौजूद कर्मचारी। संवाद - फोटो : अमर उजाला/संवाद
बांदा। एलपीजी गैस की बढ़ती किल्लत ने शिक्षण संस्थानों की कैंटीनों के साथ-साथ टिफिन और फास्ट फूड कारोबार को भी संकट में डाल दिया है। इस्राइल-ईरान युद्ध के कारण उत्पादन और आपूर्ति में आई बाधा के चलते व्यावसायिक गैस सिलिंडरों की आपूर्ति पूरी तरह ठप है। जिससे दो हजार से अधिक छात्र-छात्राओं के समक्ष भोजन की गंभीर समस्या उत्पन्न हो गई है।
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रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज और कृषि विश्वविद्यालय की कैंटीनों में मात्र दो से तीन दिनों का ही ईंधन बचा है। गैस बुकिंग के बावजूद आपूर्ति न होने से छात्र-छात्राओं के सामने भोजन का संकट खड़ा हो गया है। यदि समय रहते गैस की आपूर्ति सुनिश्चित नहीं हुई तो कैंटीनें बंद हो सकती हैं। जिससे छात्रों को पढ़ाई छोड़कर घर वापस लौटना पड़ सकता है। कॉलेज प्रशासन ने इंडेन गैस संचालक को पत्र लिखकर तत्काल आपूर्ति की मांग की है।
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प्राथमिक स्कूलों में भी भट्ठी पर पक रहा भोजन गैस सिलिंडर की कमी का असर प्राथमिक विद्यालयों पर भी पड़ा है। बडोखर, नरैनी और तिंदवारी ब्लॉक के कई प्राथमिक स्कूलों में गैस सिलिंडर समाप्त हो जाने के कारण मध्याह्न भोजन बनाने के लिए चूल्हों और भट्ठियों का सहारा लेना पड़ रहा है। टिफिन और फास्ट फूड कारोबार पर भी संकट
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शहर में पांच टिफिन कारोबारियों द्वारा दो हजार से अधिक लोगों को प्रतिदिन घर पर खाना पहुंचाया जाता है। गैस संकट के कारण इस व्यवसाय पर भी बंदी का खतरा मंडरा रहा है। कारोबारियों का कहना है कि लकड़ी और कोयले पर खाना बनाना महंगा पड़ रहा है। जिससे टिफिन की कीमत 20 प्रतिशत तक बढ़ सकती है।



इसी तरह, शहर में लगभग 200 ठेले और 100 दुकानों में फास्ट फूड का व्यवसाय करने वाले कारोबारी भी गैस की कमी से जूझ रहे हैं। आधे से ज्यादा ठेले बंद हो चुके हैं और कई के बंद होने की आशंका है। दुकानदार ब्लैक में 200 से 300 रुपये में सिलिंडर खरीदने को मजबूर हैं। फिर भी उन्हें आसानी से गैस नहीं मिल पा रही है। ऐसे में कई कारोबारियों ने भट्ठी बनवाने का काम शुरू कर दिया है।

वर्जन-



घरेलू सिलिंडर का व्यावसायिक इस्तेमाल गलत है। ऐसे में तो रसोई गैस की भी किल्लत बढ़ जाएगी। जल्द इस पर अंकुश लगाया जाएगा। उम्मीद है कि जल्द स्थिति सामान्य हो जाएगी। अश्विनी कुमार, पूर्ति अधिकारी, इंडेन
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