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रोडवेज बसों की बंदी का व्यापारी भी भुगत रहे खामियाजा
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विधायक ओममणि वर्मा।
- फोटो : BANDA
करतल/नरैनी। रोडवेज बसों की कमी का खामियाजा यूपी-एमपी की सरहद पर आबाद गांवों से जुड़े साधारण कारोबारियों और मजदूर पेशा यात्रियों को भुगतना पड़ रहा है। निजी बसों में मनमाना किराया अदा कर यह पन्ना, अजयगढ़ और सीमा पार के गांवों में अपने कारोबार के लिए जा रहे हैं। ठीक इसी तरह उन गांवों से भी कारोबारी यहां आ रहे हैं।
रोडवेज बसों की कमी का सबसे ज्यादा असर दूध कारोबारियों पर पड़ा है। सैकड़ों की संख्या में रोजाना दूध कारोबारी यहां से मध्य प्रदेश के पन्ना, अजयगढ़, मैहर आदि जाते हैं। निजी बसों में बढ़े किराए की मार मैहर और चित्रकूट जाने वाले श्रद्धालुओं पर भी पड़ रही है।
परिवहन निगम पन्ना के लिए बांदा से पांच बसें चलाता था। लेकिन पिछले एक वर्ष से तीन बसें बंद कर दीं। दो खटारा बसें चल रही हैं और उनकी भी कोई समय-सारिणी नहीं है। निगम अधिकारियों का कहना है कि यात्री न होने से तीन बसें हटाना पड़ीं।
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दूसरी तरफ जमीनी हकीकत यह है कि इसी रूट पर प्राइवेट बसें धमाल मचाए हैं। टैक्सी के रूप में छोटे और डग्गामार वाहन भी कमाई कर रहे हैं। यात्रियों को करीब 20 फीसदी तक ज्यादा किराया देकर जोखिम भरी यात्रा करनी पड़ रही है। सीमा पर स्थित यूपी के गाजीपुर, खलारी, नहरी, उदई पुरवा, महरानी आदि गांवों से रोजाना बड़ी संख्या में दूध लेकर मध्य प्रदेश के पन्ना, अजयगढ़ व अन्य गांवों में दूध कारोबारी जाते हैं।
इसी तरह धर्म नगरी मैहर में बड़ी संख्या में लोग शारदा देवी के दर्शन को जाते हैं। पन्ना के कारोबारी कपड़ा, जूता-चप्पल, मसाले आदि कानपुर से लाते हैं। रोडवेज बसों की कमी से इन सभी को निजी बसों में बढ़ा किराया देकर असुरक्षित यात्रा करनी पड़ रही है। हीरा खदान में मजदूरी करने जाने वाले मजदूर भी प्रभावित हैं। उन्हें ज्यादा किराया देकर पन्ना खदान आना-जाना पड़ रहा है।
परसहर गांव के चंद्रभान यादव ने बताया कि नरैनी से कालिंजर के लिए कई रोडवेज बसें चलती थीं। इनके बंद हो जाने से प्राइवेट बसें यात्रियों को ठूंसकर भर रही हैं। उधर, टैक्सियां भी मनमाना किराया लेकर चल रही हैं। इन दोनों में ही यात्रा करने में डर लगता है। रोडवेज बसें पुन: बहाल होना चाहिए।
करतल मार्ग निवासी फखरुद्दीन का कहना है कि पन्ना-छतरपुर रोड पर एक दर्जन से ज्यादा प्राइवेट बसें चल रही हैं। इनमें अधिकांश बिना परमिट की हैं। अधिकारियों को सब पता है पर चुप्पी साधे हैं। रोडवेज ने अपनी बसें हटा ली हैं। इस अवैध संचालन को और बढ़ावा मिला है।
रोडवेज अफसर बोले, मार्ग में होती गुंडागर्दी
नरैनी। रोडवेज बसों की कमी और प्राइवेट बसों के अवैध संचालन व ज्यादा किराया वसूली की अमर उजाला में छप रही खबरों का संज्ञान भाजपा की नरैनी विधायक ओममणि वर्मा ने लिया है। उधर, विधायक के हस्तक्षेप पर रोडवेज अधिकारियों के स्वर बदल गए हैं। पहले वह यात्री कम होने की बात कर रहे थे। अब कह रहे हैं कि इस मार्ग पर गुंडागर्दी बहुत हो रही है।
विधायक वर्मा ने बताया कि उन्होंने बांदा डिपो रोडवेज के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक परमानंद से फोन पर बात की है। एआरएम ने विधायक को बताया कि डग्गामार वाहनों से रोडवेज बसों को नुकसान हो रहा है। प्राइवेट बस वाले गुंडई कर रोडवेज बसों की सवारियां जबरन उतार ले जाते हैं। परिवहन अधिकारियों को इसकी सूचना दी जा चुकी है। विधायक ने बताया कि एआरएम का कहना है कि डग्गामार वाहन बंद हो जाएं तो रोडवेज बसों को पूर्व की भांति पुन: चालू कर दिया जाएगा। विधायक ने कहा कि अगर परिवहन विभाग शीघ्र नहीं सुधरा तो मंत्रालय को पत्र भेजकर दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि हर हाल में क्षेत्र की जनता को सरकारी बसों की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।
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रोडवेज बसों की कमी का सबसे ज्यादा असर दूध कारोबारियों पर पड़ा है। सैकड़ों की संख्या में रोजाना दूध कारोबारी यहां से मध्य प्रदेश के पन्ना, अजयगढ़, मैहर आदि जाते हैं। निजी बसों में बढ़े किराए की मार मैहर और चित्रकूट जाने वाले श्रद्धालुओं पर भी पड़ रही है।
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परिवहन निगम पन्ना के लिए बांदा से पांच बसें चलाता था। लेकिन पिछले एक वर्ष से तीन बसें बंद कर दीं। दो खटारा बसें चल रही हैं और उनकी भी कोई समय-सारिणी नहीं है। निगम अधिकारियों का कहना है कि यात्री न होने से तीन बसें हटाना पड़ीं।
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दूसरी तरफ जमीनी हकीकत यह है कि इसी रूट पर प्राइवेट बसें धमाल मचाए हैं। टैक्सी के रूप में छोटे और डग्गामार वाहन भी कमाई कर रहे हैं। यात्रियों को करीब 20 फीसदी तक ज्यादा किराया देकर जोखिम भरी यात्रा करनी पड़ रही है। सीमा पर स्थित यूपी के गाजीपुर, खलारी, नहरी, उदई पुरवा, महरानी आदि गांवों से रोजाना बड़ी संख्या में दूध लेकर मध्य प्रदेश के पन्ना, अजयगढ़ व अन्य गांवों में दूध कारोबारी जाते हैं।
इसी तरह धर्म नगरी मैहर में बड़ी संख्या में लोग शारदा देवी के दर्शन को जाते हैं। पन्ना के कारोबारी कपड़ा, जूता-चप्पल, मसाले आदि कानपुर से लाते हैं। रोडवेज बसों की कमी से इन सभी को निजी बसों में बढ़ा किराया देकर असुरक्षित यात्रा करनी पड़ रही है। हीरा खदान में मजदूरी करने जाने वाले मजदूर भी प्रभावित हैं। उन्हें ज्यादा किराया देकर पन्ना खदान आना-जाना पड़ रहा है।
परसहर गांव के चंद्रभान यादव ने बताया कि नरैनी से कालिंजर के लिए कई रोडवेज बसें चलती थीं। इनके बंद हो जाने से प्राइवेट बसें यात्रियों को ठूंसकर भर रही हैं। उधर, टैक्सियां भी मनमाना किराया लेकर चल रही हैं। इन दोनों में ही यात्रा करने में डर लगता है। रोडवेज बसें पुन: बहाल होना चाहिए।
करतल मार्ग निवासी फखरुद्दीन का कहना है कि पन्ना-छतरपुर रोड पर एक दर्जन से ज्यादा प्राइवेट बसें चल रही हैं। इनमें अधिकांश बिना परमिट की हैं। अधिकारियों को सब पता है पर चुप्पी साधे हैं। रोडवेज ने अपनी बसें हटा ली हैं। इस अवैध संचालन को और बढ़ावा मिला है।
रोडवेज अफसर बोले, मार्ग में होती गुंडागर्दी
नरैनी। रोडवेज बसों की कमी और प्राइवेट बसों के अवैध संचालन व ज्यादा किराया वसूली की अमर उजाला में छप रही खबरों का संज्ञान भाजपा की नरैनी विधायक ओममणि वर्मा ने लिया है। उधर, विधायक के हस्तक्षेप पर रोडवेज अधिकारियों के स्वर बदल गए हैं। पहले वह यात्री कम होने की बात कर रहे थे। अब कह रहे हैं कि इस मार्ग पर गुंडागर्दी बहुत हो रही है।
विधायक वर्मा ने बताया कि उन्होंने बांदा डिपो रोडवेज के सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक परमानंद से फोन पर बात की है। एआरएम ने विधायक को बताया कि डग्गामार वाहनों से रोडवेज बसों को नुकसान हो रहा है। प्राइवेट बस वाले गुंडई कर रोडवेज बसों की सवारियां जबरन उतार ले जाते हैं। परिवहन अधिकारियों को इसकी सूचना दी जा चुकी है। विधायक ने बताया कि एआरएम का कहना है कि डग्गामार वाहन बंद हो जाएं तो रोडवेज बसों को पूर्व की भांति पुन: चालू कर दिया जाएगा। विधायक ने कहा कि अगर परिवहन विभाग शीघ्र नहीं सुधरा तो मंत्रालय को पत्र भेजकर दोषी अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि हर हाल में क्षेत्र की जनता को सरकारी बसों की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

चंद्रभान यादव - फोटो : BANDA

बांदा के करतल क्षेत्र से पन्ना (एमपी) के लिए चल रही निजी बस।- फोटो : BANDA