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घर में थी घुटन, अब स्कूल में खुली हवा में ले रहे सांस

Tue, 29 Mar 2022 11:30 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 29 Mar 2022 11:30 PM IST
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There was suffocation in the house, now breathing in the open air in school
अमरेंद्र वर्मा। - फोटो : BANDA
बांदा। कोरोना महामारी के दौरान विद्यार्थियों में इलेक्ट्रानिक उपकरणों (मोबाइल) आदि के अत्यधिक प्रयोग से चिड़चिड़ापन आया। स्कूल में खुली सांस लेने वाले विद्यार्थी घरों में घुटन के साथ जीने को मजबूर हुए। अब स्कूल खुलने से सहपाठियों और सहेलियों के साथ घुटन से आजादी मिली है।
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जिला अस्पताल में तैनात मनोवैज्ञानिक डॉ. रिजवाना हाशमी के मुताबिक, पूरे कोरोना काल में उन्होंने तकरीबन 100 विद्यार्थियों की काउंसलिंग कर उन्हें सही राह दिखाई। ज्यादातर विद्यार्थियों के स्वभाव में चिड़चिड़ापन, फेल होने का भय और घुटन महसूस करने के लक्षण पाए गए। इनमें 70 फीसदी शहरी और 30 फीसदी ग्रामीण विद्यार्थी हैं।
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मनोवैज्ञानिक/काउंसलर डॉ. रिजवाना हाशमी ने बताया कि स्कूल जाने वाले बच्चों को अगर किसी घर या कमरे में रहने को मजबूर किया जाए तो उनमें अवसाद और चिड़चिड़ापन की शिकायत आती है। अभिभावकों को चाहिए कि उनके हुनर जैसे लड़कियां है तो खाना पकाना, सिलाई, कढ़ाई आदि के लिए प्रेरित करें। अगर लड़के हैं तो उनके साथ बैठकर समय दें और अच्छी आदतें सिखाएं। बड़ा घर है तो उनके साथ खेलकर अवसाद और एकांत से बाहर निकाल सकते हैं।
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सरस्वती बालिका विद्या मंदिर इंटर कॉलेज की शिक्षिका प्रियंका सिंह ने बताया कि स्कूल में कुछ छात्राएं ऑनलाइन पढ़ाई सही से न कर पाने पर फेल होने के भय का शिकार हुईं। ऐसे में विद्यालय की ओर से छात्राओं को ऑनलाइन योग की शिक्षा देकर उनका मनोबल बढ़ाया गया।
छोटी बाजार (बांदा) निवासी डॉ. संजीव कुमार गुप्ता ने बताया कि उनके दो पुत्र निखिल गुप्ता व अर्नव गुप्ता कोरोना महामारी में मोबाइल में गेम इत्यादि में व्यस्त रहते थे। उनमें स्कूल न जाने की वजह से फेल होने का डर भी बैठ रहा था। उन्होंने बच्चों को समय दिया और उनके साथ कभी खेल कर तो कभी अच्छी कहानियां सुनाकर उनका मनोबल बढ़ाया।
12वीं की छात्रा कृति गुप्ता निवासी धीरज नगर ने बताया कि महामारी में वह घर में रहकर बोर हो रही थी। इस दौरान उसने यू-ट्यूब से खाना बनाना सीखा। भाई-बहनों के साथ लूडो, कैरम आदि खेल कर अपने को संभाला। अब स्कूल आने से वह खुश है।

10वीं के छात्र अमरेंद्र वर्मा निवासी महोतरा ने बताया कि महामारी के दौरान घर में कैद जैसा जीवन बीत रहा था। बीटेक कर रही उसकी बहन सृष्टि वर्मा ने उसकी मनोदशा को भांपा और खुद कोचिंग देकर स्कूल की कमी पूरी की।

कृति गुप्ता।

कृति गुप्ता। - फोटो : BANDA

डॉ. संजीव कुमार गुप्ता।

डॉ. संजीव कुमार गुप्ता। - फोटो : BANDA

डॉ. रिजवाना हाशमी।

डॉ. रिजवाना हाशमी। - फोटो : BANDA

प्रियंका सिंह।

प्रियंका सिंह। - फोटो : BANDA

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