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महिलाओं को बताया जैविक खेती का महत्व
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Sat, 02 Jan 2016 11:56 PM IST
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बांदा। बड़ोखर गांव में ह्यूमन एग्रेरियन सेंटर मेें
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चल रहे तीन दिवसीय महिला किसानों के जैविक कृषि प्रशिक्षण कार्यशाला में
शनिवार को दूसरे दिन जैविक खेती की विधियां, आर्थिक महत्व, जल स्रोत का
प्रभाव और मिट्टी की जानकारियां दी गईं।
भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय एवं आर्गेनिक फार्मिंग एसोसिएशन आफ इंडिया के सहयोग से चल रहे प्रशिक्षण में प्रशिक्षक रवि प्रकाश शुक्ल ने जैविक खेती के आर्थिक महत्व बताए।
कहा कि खेत-खलिहान और घरेलू कचरे के उपयोग से खेती की उर्वरा बनाए रखी जा सकती है। इससे पैसों की बचत होगी। प्रशिक्षक शैलेंद्र सिंह बुंदेला ने मिट्टी को समझने पर जोर दिया।
महिला किसानों को नाडेप खाद और जीवामृत खाद बनाने की विधियां बताईं। किसान शांती विश्वकर्मा (महोबा), सुमित्रा अहिरवार, राधा अनुरागी, क्रांती यादव, रमाबाई, रामदेवी, तारा नामदेव, रामसखी, पुष्पा सेन और हर कुंवर देवी ने खेती से जुड़े अपने अनुभव बयां किए।
कार्यशाला के दूसरे दिन सत्र की शुरुआत किसान मान कुंवर देवी, सुमित्रा देवी और बड़ोखर की शांती देवी व रज्जी ने दीप जलाकर की। कुमारी वंदना ने गीत पेश किया।
योग प्रशिक्षक डॉ. विमलेश राठौर ने प्राकृतिक तौर तरीकों से मिट्टी और अपनी सेहत को लंबा बनाने का अनुभव बताते हुए महिला किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने पर प्रेरित किया।
कार्यशाला में दादरे की धुन पर ढोलक की थाप भी गूंजी। कार्यशाला मेजबान प्रगतिशील किसान प्रेम सिंह सहित कई अन्य किसान उपस्थित रहे। संचालन गुंजन मिश्रा ने किया।
भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय एवं आर्गेनिक फार्मिंग एसोसिएशन आफ इंडिया के सहयोग से चल रहे प्रशिक्षण में प्रशिक्षक रवि प्रकाश शुक्ल ने जैविक खेती के आर्थिक महत्व बताए।
कहा कि खेत-खलिहान और घरेलू कचरे के उपयोग से खेती की उर्वरा बनाए रखी जा सकती है। इससे पैसों की बचत होगी। प्रशिक्षक शैलेंद्र सिंह बुंदेला ने मिट्टी को समझने पर जोर दिया।
महिला किसानों को नाडेप खाद और जीवामृत खाद बनाने की विधियां बताईं। किसान शांती विश्वकर्मा (महोबा), सुमित्रा अहिरवार, राधा अनुरागी, क्रांती यादव, रमाबाई, रामदेवी, तारा नामदेव, रामसखी, पुष्पा सेन और हर कुंवर देवी ने खेती से जुड़े अपने अनुभव बयां किए।
कार्यशाला के दूसरे दिन सत्र की शुरुआत किसान मान कुंवर देवी, सुमित्रा देवी और बड़ोखर की शांती देवी व रज्जी ने दीप जलाकर की। कुमारी वंदना ने गीत पेश किया।
योग प्रशिक्षक डॉ. विमलेश राठौर ने प्राकृतिक तौर तरीकों से मिट्टी और अपनी सेहत को लंबा बनाने का अनुभव बताते हुए महिला किसानों को प्राकृतिक खेती अपनाने पर प्रेरित किया।
कार्यशाला में दादरे की धुन पर ढोलक की थाप भी गूंजी। कार्यशाला मेजबान प्रगतिशील किसान प्रेम सिंह सहित कई अन्य किसान उपस्थित रहे। संचालन गुंजन मिश्रा ने किया।