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नत्थू की विधवा और बच्चों का हीमोग्लोबिन कम
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
Updated Mon, 09 May 2016 11:31 PM IST
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जिला अस्पताल में चेकअप के लिए मृतक नत्थू की पत्नी, पुुत्र और पुत्री।
- फोटो : अमर उजाला
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बांदा। भूखे पेट मौत के मुंह में समा गए मूंगुस पुरवा गांव के दलित नत्थू की मौत से हुई किरकिरी से परेशान प्रशासन ने अब मृतक के बच्चों का आठ दिन बाद स्वास्थ्य परीक्षण कराया है। परीक्षण में नत्थू की विधवा और उसके पुत्र और पुत्रियों का हीमोग्लोबिन कम पाया गया है। इससे यह साफ होता है कि मृतक के परिवार को भरपूर भोजन मयस्सर नहीं हुआ। बच्चों के स्वास्थ्य परीक्षण की बात डीएम योगेश कुमार ने कही थी।
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यह बात अब खुलकर सामने आ गई है कि दलित नत्थू के घर में तंगहाली थी। अक्सर फाकाकशी होती थी। नत्थू की मौत से पहले चार दिन तक चूल्हा नहीं जला। यह बात उसकी विधवा और बच्चे लगातार कह रहे हैं। हालांकि नत्थू की मौत के बाद मीडिया में आई खबरों से प्रशासन ने आनन-फानन उसके घर राशन पहुंचा दिया। बसपा और भाजपा नेता नगद मदद कर आए। मुख्यमंत्री ने भी पांच लाख की मदद मंजूर की है। पिछले आठ दिनों से नत्थू के घर रोजाना चूल्हा जल रहा है।
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सोमवार को प्रशासन ने नत्थू के परिवार को जिला अस्पताल लाकर स्वास्थ्य परीक्षण कराया। इसके पीछे शायद यह मंशा थी कि बच्चों को चंगा पाए जाने पर यह कहा जा सके कि नत्थू के घर खाने-पीने की कोई कमी नहीं थी और उसके बच्चे स्वस्थ हैं। मंशा चाहे जो भी हो पर जिला अस्पताल में हुए स्वास्थ्य परीक्षण में नत्थू की विधवा और उसकी पुत्री और पुत्रों में हीमोग्लोबिन काफी कम पाया गया है।
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35 वर्षीय मुन्नी देवी का हीमोग्लोबिन 10.9 ग्राम पाया गया, जबकि महिलाओं का हीमोग्लोबिन 12 से 16 ग्राम के बीच होना चाहिए। बड़ी पुत्री 14 वर्षीय गुड़िया का हीमोग्लोबिन 11 ग्राम, 17 वर्षीय पुत्र आनंद का 11.4 ग्राम और सात वर्षीय पुत्री निशी का 9.2 ग्राम पाया गया। जिला अस्पताल में इनकी जांच करने वाले पैथालाजी विभाग के प्रभारी डॉ. एसके वाजपेई ने बताया कि जांच रिपोर्ट मंगलवार को मुख्य चिकित्साधिकारी को भेजी जाएगी
खाने-पीने में कमी से हीमोग्लोबिन की कमी
बांदा। खून में हीमोग्लोबिन की कमी के बारे में वरिष्ठ चिकित्सक डॉ. मोहम्मद रफीक (एमडी) का कहना है कि हीमोग्लोबिन में कमी खाने-पीने में आयरन और प्रोटीन की कमी या कुपोषण आदि से होती है। हीमोग्लोबिन खून को आक्सीजन देता है, जिससे खून का संचार बढ़ता है। उन्होंने बताया कि बच्चों में बड़ों की अपेक्षा कुछ ज्यादा ही हीमोग्लोबिन होता है।