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दोनों सूबों की सरकारें तय करेंगी नहर विवाद

Tue, 03 May 2016 11:42 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा
ब्यूरो/अमर उजाला, बांदा Updated Tue, 03 May 2016 11:42 PM IST
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The governments of both provinces will decide canal dispute
नहर में शव की तलाश - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो

बांदा। बरियारपुर बांध मेें बनाई जा रही नहर के विवाद की गेंद अब दोनों प्रदेशों की सरकारों के पाले में चली गई है। स्थानीय स्तर पर दोनों राज्यों के सिंचाई विभाग की तीन बार हुईं संयुक्त बैठकें बेनतीजा साबित हुईं। एमपी के अभियंता अपनी दावेदारी के कोई भी अभिलेख अभी भी नहीं पेश कर सके। अब शायद दोनों प्रदेशों की सरकारें इस विवाद का निपटारा करेंगे। बांदा को पानी देने वाले बरियारपुर बांध के पास उत्तर प्रदेश की भूमि पर मध्य प्रदेश सिंचाई विभाग द्वारा नहर खोदने को लेकर दोनों राज्यों के सिंचाई विभाग आमने-सामने आ गए हैं। हांलाकि बांदा यूपी के सिंचाई विभाग की इस मामले में जबरदस्त लापरवाही सामने आई।

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हफ्तों से नहर की खुदाई का काम चलता रहा और यहां के अभियंताओं ने सुध नहीं ली। ‘अमर उजाला’ में प्रमुखता से खबर छपने के बाद अभियंताओं की नींद टूटी। डीएम योगेश कुमार ने भी उन्हें लताड़ लगाई। इसी के बाद बांदा से अधिशासी अभियंता योगेश रावल बरियारपुर पहुंचे और एमपी के अभियंताओं के समक्ष कड़ा विरोध जताते हुए नहर खुदाई का काम रुकवा दिया। यह अभी भी बंद है।
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अधिशासी अभियंता स्तर की दो बैठकों के बाद मंगलवार को यहां के अधीक्षण अभियंता डीएस सचान बरियारपुर बांध पहुंचे। उसके साथ अधिशासी अभियंता योगेश रावल और जेई मनोज कुमार भी थे। उधर, एमपी की ओर से वहां के एसडीओ विलम श्रीवास्तव और उप यांत्रिक एमके दोहरे मौजूद थे। दोनों पक्षों के बीच लगभग आधा घंटे तक बैठक हुई। एक-दूसरे के अभिलेख देखे गए। बांध और पानी के बंटवारे के लेकर 1965 और 1977 मेें दोनों राज्यों के बीच हुए समझौते की प्रतियों का आदान-प्रदान हुआ।
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अधीक्षण अभियंता श्री सचान ने बताया कि एमपी के अभियंता आज भी खोदी जा रही नहर की भूमि का अपने स्वामित्व संबंधी कोई अभिलेख नहीं दिखा पाए। न ही उत्तर प्रदेश की अनुमति दिखाई। अलबत्ता यही दलील देते रहे कि बांध एमपी में है इसलिए पहला हक उनका है। दोनों पक्षों के बीच हल्की-फुल्की नोंकझोक भी हुई। यूपी के अभियंताओं ने दोटूक शब्दों में खबरदार किया कि समझौते का उल्लंघन हुआ तो सख्त रुख अपनाया जाएगा। अंतत: बैठक मेें यही तय हुआ कि अब दोनों राज्यों के सिंचाई विभाग अभियंता अपनी रिपोर्ट अपने-अपने सूबे की सरकारों को सौंपेंगे। फिलहाल नहर खुदाई का काम बंद रहेगा। उधर, नहर खुदाई मेें उजाड़े गए यूपी के पट्टा धारकों ने भी यहां के अधीक्षण अभियंता से मिलकर भूमि वापस दिलाने या कहीं और पट्टा देने की फरियाद की।

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