फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Banda News ›   The floors of development continued to be found in the journey of 70 years

70 साल के सफर में मिलती रहीं विकास की मंजिलें

Sat, 25 Jan 2020 11:54 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 25 Jan 2020 11:54 PM IST
विज्ञापन
The floors of development continued to be found in the journey of 70 years
राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कालेज। - फोटो : BANDA
बांदा। गणतंत्र के 70 साल के सफर में बांदा शहर भी विकास के पथ पर आगे बढ़ता रहा। कस्बे का रूप शहर में बदला। प्रगति और परवान चढ़ी तो मंडल मुख्यालय बना। 1961 में नगर पालिका का क्षेत्रफल करीब चार वर्ग किलोमीटर था। अब यह बढ़कर 11 वर्ग किलोमीटर हो गया है। तब शहर की आबादी करीब 50 हजार थी, अब बढ़कर 3 लाख 15 हजार का आंकड़ा पार कर गई है।
विज्ञापन

1981 में बांदा विकास प्राधिकरण का गठन हुआ। शहर की सीमा बढ़ने के साथ ही आबादी बढ़ी। सड़कें और गलियों का विस्तार हुआ। शहर के चारों ओर बाईपास बना है। कुछ निर्माणाधीन हैं। 1950 में सिर्फ दो यात्री ट्रेनें चलती थीं। अब इनकी संख्या बढ़कर लगभग 36 हो गई है। महानगरों के लिए सुपरफास्ट ट्रेन भी है।
विज्ञापन

बसों का बेड़ा भी बढ़ा है। 70 साल में शहर ने कई राजनीतिक उतार-चढ़ाव भी देखे। शहर के बाशिंदे जमुना प्रसाद बोस और नसीमुद्दीन सिद्दीकी प्रदेश की कई सरकारों में मंत्री बने। विवेक कुमार सिंह व बाबूलाल कुशवाहा राज्यमंत्री हुए। शिक्षा के क्षेत्र में भी बदलाव आया। कई डिग्री कालेज, इंटर कालेज, इंजीनियरिंग कालेज आदि खुले। ऋषि बामदेव और बांदा नवाब की इस नगरी का सांप्रदायिक सद्भाव और कौमी एकता पर कभी आंच नहीं आई।
विज्ञापन
विज्ञापन

राजकीय एलोपैथिक मेडिकल कालेज
700 करोड़ के राजकीय मेडिकल कालेज में बांदा शहर को नई पहचान दी। न सिर्फ बांदा बल्कि पड़ोसी जिलों और मध्यप्रदेश के लोगों को यहां स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही हैं। वर्ष 2016 से शुरू हुए इस मेडिकल कालेज में एमबीबीएस की कक्षाएं चल रही हैं।
कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय
वर्ष 2008 में तत्कालीन कैबिनेट मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी के प्रयासों से स्वीकृत कृषि विश्वविद्यालय का शिलान्यास किया। वर्ष 2011 में इसकी शुरुआत हुई। इसमें अलग-अलग विषयों के कई महाविद्यालय चल रहे हैं। कृषि वैज्ञानिक शोध कर रहे हैं। लगभग दो सौ छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं।
सर्किट हाउस
शहर के किनारे मवई रोड पर स्थित सर्किट हाउस भी वर्ष 2015 में बना। यह भी बसपा सरकार के तत्कालीन मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी की देन है। करीब 13 करोड़ से तैयार हुए सर्किट हाउस में वीवीआईपी और वीआईपी ठहरते हैं। सभागार में बैठकें होती हैं। दो मंजिला भवन में लगभग 8 वीआईपी सूट और दो सभागार हैं।
डीएवी कालेज के सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य बाबूलाल गुप्त बताते हैं कि चारों तरफ बांदा बढ़ा। 70 साल पहले शहर में बिजली सिर्फ पावर हाउस तक थी। वह भी डीसी करंट की। सड़कों पर नगर पालिका के स्टैंड लैंप पोस्ट में दीपक जलाए जाते थे।
गरीब छात्र उसी की रोशनी में बैठकर पढ़ाई करते थे। अब चारों तरफ हाईमॉस्क लाइटें हैं। तब शहर में सड़कें नहीं थीं। चेयरमैन बने डा. श्यामलाल ने सीसी सड़क की शुरुआत कराई। शहर में मात्र तीन स्कूल थे। अब तीन दर्जन से ज्यादा हो गए।
वरिष्ठ अधिवक्ता मनमोहन सिंह बताते हैं कि गणतंत्र दिवस की 70वीं वर्षगांठ मनाते समय इस अवधि में शहर में हुआ विकास हमारे सामने है। तब वो दिन थे जब शहर में सुरक्षा के लिए इकलौती कोतवाली और गिनीचुनी चौकियां थीं।

आज यहां मंडल मुख्यालय है। कमिश्नर और डीआईजी जैसे उच्चस्तरीय अधिकारी बैठते हैं। प्रशासनिक नजर से इसे मंडल मुख्यालय का दर्जा मिला। शहर की हर गली और सड़क जगमगाती स्ट्रीट लाइट से रोशन है। सड़कें भी पहले से बेहतर हुई हैं।

कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय।

कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय।- फोटो : BANDA

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed