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Banda News: आयुक्त ने डीडी से मांगा स्पष्टीकरण, लखनऊ पहुंचे डीपीआरओ
Sat, 11 Apr 2026 12:29 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
संवाद न्यूज एजेंसी, बांदा
Updated Sat, 11 Apr 2026 12:29 AM IST
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बांदा। पंचायत राज विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमितताओं की परतें तब खुलने लगीं जब उप निदेशक (पंचायत) परवेज आलम खां पर डीपीआरओ कार्यालय की महिला कर्मचारियों से अभद्रता करने का आरोप लगा। इस मामले में जहां पुलिस जांच कर रही है, वहीं चित्रकूटधाम मंडल के आयुक्त ने उप निदेशक पंचायत से स्पष्टीकरण मांगा है। दूसरी ओर उप निदेशक पंचायत ने भी डीपीआरओ कार्यालय और ग्राम पंचायतों में बड़े पैमाने पर फैले भ्रष्टाचार और मनमानी को लेकर पुलिस अधीक्षक को दो अलग-अलग तहरीर देकर रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग की है। इस घटनाक्रम के बाद से डीपीआरओ, लिपिक और कई सचिव खुद को बचाने के लिए लखनऊ की दौड़ लगा रहे हैं। स्वच्छ भारत मिशन के तहत मॉडल ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों के लिए सरकार द्वारा करोड़ों रुपये का बजट आवंटित किया गया था, लेकिन भ्रष्टाचार के चलते इसका सही ढंग से उपयोग नहीं हो सका। कई आरआरसी सेंटरों पर ताले लटके हुए हैं। कूड़ा एकत्र करने के लिए खरीदे गए ई-रिक्शा सचिवालय या प्रधानों के आवासों के बाहर खड़े पाए गए हैं। सफाई कार्य से बचने के लिए लगभग एक सौ सफाई कर्मचारी जिला और तहसील मुख्यालयों में संबद्ध कराए गए हैं, जबकि बड़े राजस्व गांवों की सफाई एक-एक कर्मचारी के भरोसे हैं।
मनमानी और अनियमितताओं के आरोप
हैंडपंप मरम्मत, खंडजा, नाली, तालाब खुदाई, आरआरसी सड़क, मुक्तिधाम निर्माण, और प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री आवास योजना जैसी विभिन्न योजनाओं में बड़े पैमाने पर मनमानी और अनियमितताएं बरती गई हैं। अपात्रों को आवास आवंटित करने के साथ ही मजदूरी में भी गोलमाल किया गया है। पिछले पांच सालों में ग्राम पंचायतों में अनियमितताओं को लेकर 480 ग्राम प्रधानों और सचिवों के खिलाफ शिकायतें दर्ज हुई हैं। एक सचिव के खिलाफ कई बार निलंबन और वेतन रोकने जैसी कार्रवाई की गई, लेकिन कुछ दिनों में ही वे बहाल हो गए। यह सब इसलिए संभव हुआ क्योंकि ग्राम पंचायतों से लेकर उच्चाधिकारियों तक, लिपिक भ्रष्टाचार में लिप्त रहे।
अधिकारियों के बीच टकराव और खुलासे
जब मामला बिगड़ा तो दो बड़े अधिकारी आमने-सामने आ गए, जिससे भ्रष्टाचार की परतें दर परत खुलने लगीं। इस टकराव के चलते दोनों पक्ष एक-दूसरे को भ्रष्ट और अमर्यादित बताने लगे। तीन दिन पहले, डीपीआरओ कार्यालय की महिला कर्मचारियों ने उप निदेशक पंचायत पर अभद्रता करने और फाइलों पर हस्ताक्षर के लिए घर बुलाने का आरोप लगाया था। इसकी शिकायत उच्चाधिकारियों और पुलिस से की गई, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। आयुक्त चित्रकूटधाम मंडल अजय कुमार ने भी इस मामले में उप निदेशक पंचायत से स्पष्टीकरण मांगा है।
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वहीं, बृहस्पतिवार को उप निदेशक पंचायत ने भी पुलिस अधीक्षक को दो अलग-अलग तहरीरें देकर गांव स्तर से लेकर डीपीआरओ कार्यालय तक में व्याप्त भ्रष्टाचार और मनमानी की विस्तृत जानकारी दी और रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की मांग की। इस घटनाक्रम के बाद से डीपीआरओ, लिपिक और कई सचिव खुद को बचाने के लिए लखनऊ की दौड़ लगा रहे हैं, ताकि वे इस मामले से बच सकें। यह पूरा मामला क्षेत्र में पंचायत राज विभाग की कार्यप्रणाली और उसमें व्याप्त भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
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मनमानी और अनियमितताओं के आरोप
हैंडपंप मरम्मत, खंडजा, नाली, तालाब खुदाई, आरआरसी सड़क, मुक्तिधाम निर्माण, और प्रधानमंत्री व मुख्यमंत्री आवास योजना जैसी विभिन्न योजनाओं में बड़े पैमाने पर मनमानी और अनियमितताएं बरती गई हैं। अपात्रों को आवास आवंटित करने के साथ ही मजदूरी में भी गोलमाल किया गया है। पिछले पांच सालों में ग्राम पंचायतों में अनियमितताओं को लेकर 480 ग्राम प्रधानों और सचिवों के खिलाफ शिकायतें दर्ज हुई हैं। एक सचिव के खिलाफ कई बार निलंबन और वेतन रोकने जैसी कार्रवाई की गई, लेकिन कुछ दिनों में ही वे बहाल हो गए। यह सब इसलिए संभव हुआ क्योंकि ग्राम पंचायतों से लेकर उच्चाधिकारियों तक, लिपिक भ्रष्टाचार में लिप्त रहे।
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अधिकारियों के बीच टकराव और खुलासे
जब मामला बिगड़ा तो दो बड़े अधिकारी आमने-सामने आ गए, जिससे भ्रष्टाचार की परतें दर परत खुलने लगीं। इस टकराव के चलते दोनों पक्ष एक-दूसरे को भ्रष्ट और अमर्यादित बताने लगे। तीन दिन पहले, डीपीआरओ कार्यालय की महिला कर्मचारियों ने उप निदेशक पंचायत पर अभद्रता करने और फाइलों पर हस्ताक्षर के लिए घर बुलाने का आरोप लगाया था। इसकी शिकायत उच्चाधिकारियों और पुलिस से की गई, जिसके बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। आयुक्त चित्रकूटधाम मंडल अजय कुमार ने भी इस मामले में उप निदेशक पंचायत से स्पष्टीकरण मांगा है।
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वहीं, बृहस्पतिवार को उप निदेशक पंचायत ने भी पुलिस अधीक्षक को दो अलग-अलग तहरीरें देकर गांव स्तर से लेकर डीपीआरओ कार्यालय तक में व्याप्त भ्रष्टाचार और मनमानी की विस्तृत जानकारी दी और रिपोर्ट दर्ज कर कार्रवाई की मांग की। इस घटनाक्रम के बाद से डीपीआरओ, लिपिक और कई सचिव खुद को बचाने के लिए लखनऊ की दौड़ लगा रहे हैं, ताकि वे इस मामले से बच सकें। यह पूरा मामला क्षेत्र में पंचायत राज विभाग की कार्यप्रणाली और उसमें व्याप्त भ्रष्टाचार पर गंभीर सवाल खड़े करता है।