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बलकट की खेती बनी नासूर
ब्यूरो/अमर उजाला,बांदा
Updated Wed, 17 Feb 2016 11:37 PM IST
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बांदा। सूखे की मार से बुंदेलखंड के सभी किसान त्रस्त हैं, लेकिन उन किसानों की हालत ज्यादा दयनीय है, जो बलकट पर खेती करते हैं।
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कई साल से पड़ रही दैवी आपदा ने इन किसानों का सब कुछ छीन लिया है। अब इनके सामने परिवार पालने का संकट है। कई किसानों ने खेती-बाड़ी छोड़ शहरों की राह पकड़ ली। वहां मेहनत मजदूरी कर किसी तरह काम चला रहे हैं।
बांदा जनपद के करीब ढाई लाख किसानों में 50 हजार से अधिक किसान भूमिहीन हैं। ये किसान बलकट पर जमीन लेकर खेती करते हैं। खेती ही इनकी जीविका प्रमुख साधन है।
कई साल से पड़ रही दैवी आपदा ने इन किसानों की कमर तोड़ दी है। फसल बर्बाद होने से इन किसानों पर लाखों रुपये का कर्ज हो गया है। आमतौर पर ये किसान दो से तीन हजार रुपये प्रति बीघे की दर से खेत बलकट रखते हैं। इनमें होने वाली फसल से ही इनका खाना-खर्च चलता है।
इस साल पड़े भयंकर सूखे ने इन्हें तबाह कर दिया है। अब आगे खेत बलकट रखने के लिए इनके पास न घर में पूंजी और न ही कहीं से कर्ज मिलने की उम्मीद है। तमाम ऐसे किसान परिवारों के घरों में फांकाकशी की नौबत है।
बुजुर्गों को छोड़ महिलाओं और घर के अन्य सदस्यों के साथ पलायन कर गए हैं। इन भूमिहीन किसानों की व्यथा न तो शासन को दिखाई दे रही है और न ही अफसर इनकी मदद करने को तैयार हैं।