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दस फिट और उफनाए गंगऊ और बारियारपुर बांध्ा
ब्यूरो अमर उजाला, बांदा
Updated Fri, 08 Jul 2016 11:34 PM IST
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शुक्रवार को बरियारपुर बांध की क्रस्टवाल के ऊपर से गुजर रही जलधारा।
- फोटो : अमर उजाला
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बांदा। मध्य प्रदेश की घाटियों और बांधों के जल संग्रह क्षेत्रों (इनकैचमेंट एरिया) में लगातार हो रही बारिश से केन नदी का जलस्तर तेजी से रहा है। केन नदी खतरे के निशान से चार मीटर ऊपर बह रही है।
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नदी किनारे आबाद गांवों के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी भर गया है। नदी किनारे स्थित शहर के कुछ इलाके भी जलमग्न हो गए हैं। केंद्रीय जल आयोग ने शनिवार से जलस्तर घटने का पूर्वानुमान जारी किया है।
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गंगऊ और बरियारपुर बांध मध्य प्रदेश में केन नदी में बने हैं। इन बांधों का जल संग्रह क्षेत्र मध्य प्रदेश की घाटियां हैं। पांच दिन पहले तक सूखे पड़े ये बांध पूरी तरह उफना गए हैं। गंगऊ बांध 24 घंटों में 9 फिट और बढ़ गया है। अब इसका जल स्तर 747.4 फिट हो गया है।
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शुक्रवार को इस बांध से 4,42,388 क्यूसेक पानी डिस्चार्ज होता रहा। बांध क्षेत्र में इस अवधि में 120 मिलीमीटर बारिश रिकार्ड की गई। उधर, बरियारपुर बांध का जलस्तर 24 घंटे में लगभग 10 फिट बढ़कर 624.9 फिट पर पहुंच गया है। इस बांध से 4,74,172 क्यूसिक पानी केन नदी में गिर रहा है। यहां 60 मिलीमीटर वर्षा हुई है।
गंगऊ बांध में क्रस्टवाल (दीवार) के ऊपर 14 फिट मोटी जल धारा उफनाकर केन नदी में गिर रही है। उधर, बरियारपुर में क्रस्टवाल के ऊपर से 17 फिट ऊंचा पानी नदी में गिर रहा है। रनगवां बांध फिलहाल उफान पर नहीं है। इसका जल स्तर 739.2 फिट ही हुआ है। यह क्षमता से काफी कम है।
बांधों के उफान से केन नदी में बाढ़ आ गई है। शुक्रवार को नदी का जलस्तर 108 मीटर पार कर गया, जो खतरे के निशान से चार मीटर ऊपर है। केंद्रीय जल आयोग द्वारा जारी पूर्वानुमान के मुताबिक शनिवार को तड़के छह बजे तक नदी का जल स्तर 108.250 मीटर पहुंच जाएगा। यानी खतरे के निशान से चार मीटर ऊपर हो जाएगा। पूर्वानुमान में बताया गया है कि इसके बाद नदी का पानी स्थिर हो जाएगा। फिर घटने की संभावना है। हालांकि शुक्रवार को सुबह के बाद दोपहर तक बांधों में बारिश नहीं हुई।
अलर्ट जारी, प्रधान और सचिव रखेंगे नजर
बांदा। केन नदी में आई बाढ़ के मद्देनजर प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया है। नदी किनारे आबाद गांवों और शहर की बस्तियों में दिनरात नजर रखी जा रही है। डीएम ने ग्राम प्रधानों और सचिवों को निर्देश दिए हैं कि बाढ़ की संभावना पर प्रभावित इलाकों के लोगों को तत्काल सुरक्षित इलाकों में भेजें। परिषदीय स्कूलों को बाढ़ राहत केंद्रों के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा। बाढ़ पीड़ितों के लिए राशन की व्यवस्था आपूर्ति विभाग करेगा।
डीएम योगेश कुमार ने लेखपालों को निर्देश दिया कि बाढ़ संभावित गांवों में पहले से ही मुनादी कराकर लोगों को सतर्क कर दें। बाढ़ चौकियों में जिन कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है, वे बिना लापरवाही ड्यूटी स्थल पर मौजूद रहें। इसमें ढिलाई बरतने पर बख्शा नहीं जाएगा। सूखे के दौरान गठित की गई डेली विलेज टीम (डीवीटी) को बाढ़ राहत कार्यों में लगा दिया गया है। शहर के निचले इलाकों खुटला, रहुनिया, छाबी तालाब, केवटरा, भूरागढ़ में भी बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं।
रेलवे ने बढ़ाई चौकसी, ट्रेनों की रफ्तार थमी
बांदा। केन नदी की बाढ़ से रेलवे भी अलर्ट हो गया है। भूरागढ़ के पास केन नदी पुल और दोनों ओर रेल पटरियों को सुरक्षित रखने के लिए एहतियाती उपाय किए जा रहे हैं। शुक्रवार को रेलवे के वरिष्ठ खंड अभियंता एके श्रीवास्तव ने पुल और पटरियों का निरीक्षण किया। उन्होंने दो कर्मचारियों को नजर रखने के लिए पुल पर तैनात किया है।
रेलवे का पुल सौ साल से भी ज्यादा पुराना है। इसकी अवधि बीत चुकी है लेकिन मजबूती के चलते यह चल रहा है। केन नदी का जल स्तर 110 मीटर होने पर रेलवे पुल को खतरा होने लगता है। ट्रेनों को धीमी रफ्तार से पुल से गुजारा जा रहा है। यात्री गाड़ी 50 किलोमीटर और मालगाड़ी 40 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से पुल पार करेगी।