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80 फीसदी भूगर्भ जल का हो रहा दोहन, रोक जरूरी
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कलक्ट्रेट में मंडलीय समीक्षा बैठक संबोधित करते जल शक्ति मंत्रालय (भारत सरकार) के सचिव यूपी सिंह।
- फोटो : BANDA
बांदा। केंद्रीय जल शक्ति मंत्रालय के सचिव यूपी सिंह ने कहा है कि बुंदेलखंड के छह जिलों में लागू की गई अटल भूजल योजना के तहत अत्यधिक भूजल दोहन रोककर भूजल संरक्षण किया जाएगा। इसमें जन सहयोग लिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में 80 फीसदी सिंचाई भूगर्भ जल से होती है। इसमें कमी लाने की जरूरत है। ये बातें उन्होंने जल संरक्षण और जल प्रबंधन की मंडलीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए कही। इसमें चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलों के अधिकारी भी उपस्थित रहे।
यूपी सिंह ने कहा कि जल आंदोलन को जन आंदोलन बनाया जाए। इसके लिए जो काम चल रहे हैं, उन्हें आगे बढ़ाएं। जल संरक्षण और प्रबंधन में स्थानीय शैक्षिक संस्थाओं का सहयोग लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जल को चिंतन और चेतना का केंद्र बनाकर पानी की बर्बादी हर स्तर पर रोकने का प्रयास करें।
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कहा कि छोटी नदियों को जिंदा करने का काम भी प्राथमिकता के आधार पर करना होगा। तभी बड़ी नदियों में पानी बढ़ेगा। कार्यशाला में मंडलायुक्त गौरव दयाल ने कहा कि बुंदेलखंड में पानी की समस्या सदियों पुरानी है। गर्मी में तो स्थिति और गंभीर हो जाती है। उन्होंने कहा कि मंडल के सभी जिलों में भूगर्भ जल संरक्षण और प्रबंधन का कार्य किया जा रहा है। इसके अच्छे नतीजे मिल रहे हैं। आयुक्त ने केंद्रीय सचिव का आभार जताते हुए कहा कि यह कार्यशाला मंडल के लिए उपयोगी सिद्ध होगी।
बांदा में चल रहे जन सहभागिता वाले कई अभियान
डीएम हीरालाल ने कहा कि जन सहभागिता से जिले में जल संरक्षण के कई अभियान चलाए गए हैं। कुआं-तालाब जियाओ अभियान और रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर काफी काम हुआ है। नदियों और जलस्रोतों के प्रति लोगों में आदर का भाव पैदा करने के लिए नदी घाटों पर आरती कार्यक्रम चल रहा है।
डीएम ने कहा कि जनपद की नदियों किनारे बसे 130 गांवों को मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा। महोबा डीएम अवधेश कुमार तिवारी ने कहा कि वहां बड़े तालाबों के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अर्जुन सहायक परियोजना पूरी होने पर महोबा की पेयजल और सिंचाई समस्या का समाधान होगा।
हमीरपुर डीएम ज्ञानेश्वर त्रिपाठी ने कहा कि उनके यहां वनीकरण और उद्यानीकरण को बढ़ावा देते हुए जन सहभागिता से जल संरक्षण कार्य चल रहे हैं। बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे में तालाबों की मिट्टी का प्रयोग हो रहा है। चित्रकूट के सीडीओ डॉ. महेंद्र कुमार ने कहा कि वहां मेरा छत-मेरा पानी अभियान चलाया गया है। मंदाकिनी नदी की सिल्ट साफ की जा रही है। मंदाकिनी सेना गठित की गई है।
कम पानी वाली फसलों पर दिया जोर
वाटर एड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. एके माधवन ने जल संरक्षण में जन समुदाय को जोड़कर प्रबंधन बड़ी चुनौती बताया। भूगर्भ जल बोर्ड के वैज्ञानिक पीके त्रिपाठी ने कम पानी वाली फसलों पर जोर दिया। विशेषज्ञ प्रभु सक्सेना ने अटल भूजल योजना के बारे में बताया।
कार्यशाला को ग्रामोदय सेवा संस्थान के राजेंद्र निगम, परमार सेवा संस्थान के सतीश व अशोक श्रीवास्तव, अखिल भारतीय समाज सेवा संस्थान के विजय सिंह ने भी संबोधित किया। कार्यशाला की शुरुआत केंद्रीय सचिव ने दीप जलाकर की। जल शक्ति मंत्रालय के संयुक्त सचिव सुबोध यादव, क्षेत्रीय निदेशक वाईवी कौशिक सहित चारों जिलों के सीडीओ, वन संरक्षक, एडीएम, उप निदेशक सूचना भूपेंद्र यादव सहित बड़ी संख्या में मंडल व जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे। संचालन बांदा के अर्थ एवं संख्याधिकारी संजीव कुमार बघेल ने किया।
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उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश में 80 फीसदी सिंचाई भूगर्भ जल से होती है। इसमें कमी लाने की जरूरत है। ये बातें उन्होंने जल संरक्षण और जल प्रबंधन की मंडलीय कार्यशाला को संबोधित करते हुए कही। इसमें चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलों के अधिकारी भी उपस्थित रहे।
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यूपी सिंह ने कहा कि जल आंदोलन को जन आंदोलन बनाया जाए। इसके लिए जो काम चल रहे हैं, उन्हें आगे बढ़ाएं। जल संरक्षण और प्रबंधन में स्थानीय शैक्षिक संस्थाओं का सहयोग लिया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जल को चिंतन और चेतना का केंद्र बनाकर पानी की बर्बादी हर स्तर पर रोकने का प्रयास करें।
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कहा कि छोटी नदियों को जिंदा करने का काम भी प्राथमिकता के आधार पर करना होगा। तभी बड़ी नदियों में पानी बढ़ेगा। कार्यशाला में मंडलायुक्त गौरव दयाल ने कहा कि बुंदेलखंड में पानी की समस्या सदियों पुरानी है। गर्मी में तो स्थिति और गंभीर हो जाती है। उन्होंने कहा कि मंडल के सभी जिलों में भूगर्भ जल संरक्षण और प्रबंधन का कार्य किया जा रहा है। इसके अच्छे नतीजे मिल रहे हैं। आयुक्त ने केंद्रीय सचिव का आभार जताते हुए कहा कि यह कार्यशाला मंडल के लिए उपयोगी सिद्ध होगी।
बांदा में चल रहे जन सहभागिता वाले कई अभियान
डीएम हीरालाल ने कहा कि जन सहभागिता से जिले में जल संरक्षण के कई अभियान चलाए गए हैं। कुआं-तालाब जियाओ अभियान और रेन वाटर हार्वेस्टिंग पर काफी काम हुआ है। नदियों और जलस्रोतों के प्रति लोगों में आदर का भाव पैदा करने के लिए नदी घाटों पर आरती कार्यक्रम चल रहा है।
डीएम ने कहा कि जनपद की नदियों किनारे बसे 130 गांवों को मॉडल के रूप में विकसित किया जाएगा। महोबा डीएम अवधेश कुमार तिवारी ने कहा कि वहां बड़े तालाबों के संरक्षण पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। अर्जुन सहायक परियोजना पूरी होने पर महोबा की पेयजल और सिंचाई समस्या का समाधान होगा।
हमीरपुर डीएम ज्ञानेश्वर त्रिपाठी ने कहा कि उनके यहां वनीकरण और उद्यानीकरण को बढ़ावा देते हुए जन सहभागिता से जल संरक्षण कार्य चल रहे हैं। बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे में तालाबों की मिट्टी का प्रयोग हो रहा है। चित्रकूट के सीडीओ डॉ. महेंद्र कुमार ने कहा कि वहां मेरा छत-मेरा पानी अभियान चलाया गया है। मंदाकिनी नदी की सिल्ट साफ की जा रही है। मंदाकिनी सेना गठित की गई है।
कम पानी वाली फसलों पर दिया जोर
वाटर एड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. एके माधवन ने जल संरक्षण में जन समुदाय को जोड़कर प्रबंधन बड़ी चुनौती बताया। भूगर्भ जल बोर्ड के वैज्ञानिक पीके त्रिपाठी ने कम पानी वाली फसलों पर जोर दिया। विशेषज्ञ प्रभु सक्सेना ने अटल भूजल योजना के बारे में बताया।
कार्यशाला को ग्रामोदय सेवा संस्थान के राजेंद्र निगम, परमार सेवा संस्थान के सतीश व अशोक श्रीवास्तव, अखिल भारतीय समाज सेवा संस्थान के विजय सिंह ने भी संबोधित किया। कार्यशाला की शुरुआत केंद्रीय सचिव ने दीप जलाकर की। जल शक्ति मंत्रालय के संयुक्त सचिव सुबोध यादव, क्षेत्रीय निदेशक वाईवी कौशिक सहित चारों जिलों के सीडीओ, वन संरक्षक, एडीएम, उप निदेशक सूचना भूपेंद्र यादव सहित बड़ी संख्या में मंडल व जिला स्तरीय अधिकारी उपस्थित रहे। संचालन बांदा के अर्थ एवं संख्याधिकारी संजीव कुमार बघेल ने किया।