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परीक्षा से लौटाई गई छात्रा ने फांसी लगाकर जान दी

Mon, 04 Jan 2021 10:59 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 04 Jan 2021 10:59 PM IST
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Student returned from examination hanged
बांदा के बबेरू क्षेत्र में फीस के लिए परीक्षा देने से लौटाने पर जान देने वाली संजना। (फाइल फोटो) - फोटो : BANDA
बबेरू (बांदा)। कोतवाली क्षेत्र में फीस न जमा होने पर स्कूल प्रबंधन द्वारा परीक्षा देने से मना करने से परेशान अनुसूचित जाति की बारहवीं कक्षा की मेधावी छात्रा ने रविवार की रात घर पर फांसी लगाकर जान दे दी। परिजनों का आरोप है कि छमाही परीक्षा में स्कूल प्रबंधन ने बेटी को शामिल होने से रोक दिया था, जिसके चलते उसने यह आत्मघाती कदम उठाया। छात्रा के पिता ने इन्हीं आरोपों की तहरीर पुलिस को भी दी है। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है।
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नेता नगर निवासी अनंत कुमार दिहाड़ी मजदूर हैं और लॉकडाउन में आर्थिक तंगहाली से बुरी तरह से टूट गए हैं। अनंत की बेटी संजना (16) विद्या मंदिर इंटर कालेज में कक्षा 12 में पढ़ती थी। हाईस्कूल में प्रथम श्रेणी में पास होने वाली संजना पढ़ने में बहुत होशियार थी। पिता के मुताबिक, संजना की इंटर छमाही की परीक्षाएं इन दिनों चल रही थीं। दो विषयों की परीक्षा भी दे चुकी थी। रविवार की रात वह अपने कमरे में सोने चली गई और रात में किसी समय सीलिंग फैन से मां की साड़ी का फंदा बनाकर फांसी लगा ली।
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परिजनों ने सुबह शव लटका देखा, तो हड़कंप मच गया। पिता ने बेटी की खुदकुशी के लिए स्कूल प्रबंधन को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि लॉकडाउन के बाद कामधंधा न मिलने से वह बेटी की फीस का इंतजाम नहीं कर सका। बेटी शनिवार को परीक्षा देने गई थी, लेकिन फीस जमा न होने पर स्कूल वालों ने उसे फीस लेकर आने की बात कहकर बिना परीक्षा दिए ही लौटा दिया।
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आरोप लगाया कि इससे संजना काफी तनाव में आ गई और आत्मग्लानि महसूस करते हुए खुदकुशी कर ली। पिता ने पुलिस को दी तहरीर में भी फीस जमा न हो पाने से स्कूल संचालकों द्वारा शनिवार को बेटी को परीक्षा में शामिल नहीं होने देने की बात लिखी है। कोतवाली प्रभारी भास्कर मिश्रा ने बताया कि संजना के पिता ने फीस न अदा कर पाने पर स्कूल से लौटाने की बात का तहरीर में जिक्र किया है। मामले में जांच कर कार्रवाई की जाएगी।

उधर, प्रधानाचार्य अनिल द्विवेदी ने कहा कि संजना कक्षा छह से स्कूल में पढ़ रही थी और आठ माह की फीस उसकी बकाया है। विद्यालय वित्तविहीन/प्राइवेट है। ग्रामीण क्षेत्र के छात्र-छात्राएं हैं। अधिकांश विद्यार्थियों की फीस कई-कई माह की बकाया रहती है। फीस वसूली के लिए किसी छात्र-छात्रा पर दबाव नहीं डाला जाता। कहा कि संजना का छोटा भाई भी स्कूल में साइंस विषय से 11वीं में निशुल्क पढ़ रहा है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
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