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मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का विशेष अधिवेशन आज हथौरा में

Wed, 29 Mar 2017 12:09 AM IST
ब्यूरो अमर उजाला, बांदा
ब्यूरो अमर उजाला, बांदा Updated Wed, 29 Mar 2017 12:09 AM IST
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Special session of Muslim Personal Law Board today in Hammora
हथौरा गांव में स्थित विश्व विख्यात मदरसा जामिया अरबिया। - फोटो : amarujala

आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड का अधिवेशन 29 मार्च को विश्वविख्यात मदरसा जामिया अरबिया, हथौरा में होगी। सुबह बोर्ड की विशेष बैठक होगी और उसके बाद आम अधिवेशन होगा। इसमें तीन तलाक, बाबरी मस्जिद, यूनीफार्म सिविल कोड आदि मुद्दों पर चर्चा होगी। इसके साथ ही मदरसे में दारूल कजा (शरई अदालत) की स्थापना की जाएगी। इसके जरिए विभिन्न मसलों का निस्तारण किया जाएगा। बुंदेलखंड में पहली बार बोर्ड की आमद हो रही है। देश-प्रदेश में मौजूदा समय में चल रहे कई मुद्दों के मद्देनजर पर्सनल लॉ बोर्ड की यह बैठक काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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बांदा से करीब 16 किलोमीटर पूरब दिशा में हथौरा गांव स्थित विश्वविख्यात मदरसा जामिया अरबिया में बुधवार को दिन में तीन बजे से शाम पांच बजे तक बोर्ड की विशेष बैठक (खुसुसी नशिस्त) होगी। इसमें बोर्ड के चेयरमैन मौलाना सैय्यद मोहम्मद राबे हसनी नदवी सहित बोर्ड सचिव मौलाना खालिद सैफुल्ला रहमानी, बोर्ड के कनवीनर (दारुल कजा) मौलाना अतीक अहमद कासमी और काजी शरियत अमारात शरिया (बिहार व उड़ीसा) मौलाना मोहम्मद कासिम मुजफ्फरपुरी इत्यादि शरीक हो रहे हैं।
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बोर्ड की बैठक और जलसे की मेजबानी कर रहे मदरसा हथौरा के संचालक (नाजिम) मौलाना कारी सैय्यद हबीब अहमद ने बताया कि दिन में तीन बजे से शाम पांच बजे तक विशेष बैठक होगी। इसमें बोर्ड के पदाधिकारी और सदस्य तथा चुनिंदा लोग शामिल होंगे। इसके बाद शाम को 6 बजे मदरसा ग्राउंड में ही आम इजलास (खुला अधिवेशन) होगा। इस दौरान मदरसे में दारूल कजा (शरई अदालत) की स्थापना की जाएगी। इस अदालत के जरिए विभिन्न मसलों का निस्तारण किया जाएगा। बैठक में ही अदालत के संचालक का विधिवत रूपरेखा भी उजागर की जाएगी।  
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मंडल मुख्यालय से करीब 16 किलोमीटर दूर पूरब दिशा में बांदा-बबेरू स्टेट हाईवे पर हथौरा गांव स्थित इस मदरसे की स्थापना 1952 में मशहूर इस्लामी बुजुर्ग मौलाना कारी सैय्यद सिद्दीक अहमद ने अपनी निजी भूमि पर  खपरैलदार कमरे बनाकर की थी। बाद में यह दिन-ब-दिन विकसित होता गया। यहां भारत के विभिन्न प्रांतों के साथ ही अन्य देशों के करीब एक हजार से ज्यादा तलबा (छात्र) इस्लामी धार्मिक तालीम हासिल कर रहे हैं।


लगभग एक सैकड़ा कमरों में कक्षाएं और छात्रावास हैं। बुंदेलखंड में इतनी भव्य इमारत और सभागार अन्यत्र नहीं है। इस मदरसे को अंतर्राष्ट्रीय ख्याति हासिल है। मदरसे में आज भी हिंदू-मुस्लिम धर्मों के सभी लोग पूरी आस्था के साथ जाते हैं। यहां किसी भी राजनीतिक दल का कोई दखल नहीं है। गरीब छात्रों को मुफ्त शिक्षा के साथ छात्रावास और भोजन भी मिलता है। मौजूदा समय में मदरसे की कमान मरहूम मौलाना के ज्येष्ठ पुत्र कारी हबीब अहमद संभाले हैं। लगभग एक सैकड़ा शिक्षक व स्टाफ है।
       

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